
बिलासपुर/दुर्ग: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट, बिलासपुर ने सीबीआई अधिकारी बनकर लोगों से साइबर ठगी करने के मामले में जेल में बंद आरोपी लईक अहमद को जमानत दे दी है। न्यायमूर्ति राकेश मोहन पांडेय की एकलपीठ ने 16 अक्टूबर 2026 को आरोपी की दूसरी जमानत याचिका स्वीकार करते हुए यह आदेश पारित किया। आरोपी के खिलाफ दुर्ग जिले के नेवई थाना में अपराध दर्ज है।
सीबीआई अधिकारी बनकर परिवार से की गई थी ठगी..
अभियोजन के अनुसार, 29 अप्रैल 2025 से 29 मई 2025 के बीच कुछ लोगों ने खुद को सीबीआई अधिकारी बताकर शिकायतकर्ता के पिता से संपर्क किया। आरोपियों ने बैंक खाते का मनी लॉन्ड्रिंग के लेनदेन में इस्तेमाल होने का झूठा आरोप लगाकर शिकायतकर्ता और उसके परिवार को डराया तथा विभिन्न बैंक खातों में कुल 54 लाख 90 हजार रुपये ट्रांसफर करा लिए। इसके बाद 22 लाख रुपये की अतिरिक्त मांग की गई। इस मांग के बाद परिवार को ठगी का एहसास हुआ और शिकायत दर्ज कराई गई।
पहली जमानत याचिका हो चुकी थी खारिज..
आरोपी लईक अहमद की पहली जमानत याचिका एमसीआरसी क्रमांक 8972/2025 को हाईकोर्ट ने 5 दिसंबर 2025 को गुण-दोष के आधार पर खारिज कर दिया था। इसके बाद आरोपी ने दूसरी जमानत याचिका पेश की। सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने दलील दी कि आरोपी 3 सितंबर 2025 से जेल में बंद है, आरोपपत्र दाखिल हो चुका है और मुकदमे के निपटारे में अभी समय लगने की संभावना है। यह भी बताया गया कि मामले के छह सह-आरोपियों को पहले ही जमानत मिल चुकी है।
सह-आरोपियों को जमानत मिलने का दिया गया आधार..
बचाव पक्ष ने सह-आरोपी शुभम श्रीवास्तव उर्फ मोंटी लाल को एमसीआरसी क्रमांक 8600/2026 में 5 अक्टूबर 2026 को मिली जमानत का हवाला देते हुए समानता के आधार पर राहत देने की मांग की। वहीं, राज्य की ओर से जमानत का विरोध करते हुए कहा गया कि आरोपी साइबर धोखाधड़ी में शामिल है और परिस्थितियों में ऐसा कोई ठोस बदलाव नहीं हुआ है, जिसके आधार पर दोबारा जमानत दी जाए।
सुनवाई में अधिवक्ताओं ने रखा पक्ष..
आरोपी लईक अहमद की ओर से अधिवक्ता मोहम्मद नक़ीब ने पैरवी की। वहीं, छत्तीसगढ़ राज्य की ओर से धर्मेश श्रीवास्तव, उप महाधिवक्ता (डिप्टी एडवोकेट जनरल) ने जमानत याचिका का विरोध करते हुए पक्ष रखा। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और केस डायरी का अवलोकन करने के बाद हाईकोर्ट ने जमानत याचिका पर अपना आदेश पारित किया।
50 हजार रुपये के मुचलके पर रिहाई का आदेश..
हाईकोर्ट ने मामले के तथ्यों, आरोपी के लंबे समय से जेल में रहने, आरोपपत्र दाखिल होने, मुकदमे में संभावित देरी तथा छह सह-आरोपियों को जमानत मिलने पर विचार करते हुए आरोपी को राहत प्रदान की। अदालत ने निर्देश दिया कि संबंधित विचारण न्यायालय की संतुष्टि के अनुसार 50 हजार रुपये का व्यक्तिगत बंधपत्र और समान राशि का एक जमानतदार प्रस्तुत करने पर आरोपी को जमानत पर रिहा किया जाए।अदालत ने यह भी शर्त रखी कि आरोपी मामले से जुड़े व्यक्तियों को प्रभावित करने के लिए कोई प्रलोभन, धमकी या वादा नहीं करेगा, निष्पक्ष एवं शीघ्र सुनवाई में बाधा डालने वाला कोई कार्य नहीं करेगा तथा मुकदमे के निपटारे तक विचारण न्यायालय द्वारा निर्धारित प्रत्येक तारीख पर उपस्थित रहेगा।
मामले के गुण-दोष पर टिप्पणी नहीं..
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि आदेश में की गई टिप्पणियां केवल जमानत याचिका के निर्णय तक सीमित हैं। विचारण न्यायालय मामले का फैसला अपने गुण-दोष के आधार पर करेगा। जमानत मिलने का अर्थ आरोपी का दोषमुक्त होना नहीं है।
प्रकरण विवरण..
एमसीआरसी क्रमांक 9939/2026, लईक अहमद विरुद्ध छत्तीसगढ़ राज्य। अपराध क्रमांक 156/2025, थाना नेवई, जिला दुर्ग। प्रकरण में भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 318(4), 336(3), 338, 340(2) सहपठित धारा 3(5) तथा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66D के तहत अपराध दर्ज है।




















