

ग्वालियर। मध्य प्रदेश में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से प्रेरित पहली यूनिवर्सिटी की शुरुआत होने जा रही है। इस नए संस्थान का नाम ऋषि गालव विश्वविद्यालय रखा गया है। इसे ग्वालियर के शिवपुरी लिंक रोड स्थित बेलगांव क्षेत्र में विकसित किया जाएगा। यह परियोजना करीब 110 करोड़ रुपये की लागत से तैयार होगी और 55 बीघा जमीन पर इसका निर्माण किया जाएगा।
नर्सिंग से इंजीनियरिंग तक, कई प्रोफेशनल कोर्स होंगे उपलब्ध
इस विश्वविद्यालय में नर्सिंग, पैरामेडिकल, मैनेजमेंट और इंजीनियरिंग जैसे व्यावसायिक कोर्स संचालित किए जाएंगे। उद्देश्य यह है कि छात्रों को एक ही परिसर में आधुनिक और रोजगारपरक शिक्षा उपलब्ध कराई जा सके। निर्माण कार्य को एक साल के भीतर पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
4 मई को भूमिपूजन, सीएम मोहन यादव करेंगे शिलान्यास
4 मई 2026 को मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव इस विश्वविद्यालय का भूमिपूजन करेंगे। इस अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कई वरिष्ठ पदाधिकारी भी मौजूद रहेंगे। साथ ही राज्य के उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार और प्रभारी मंत्री तुलसी सिलावट सहित कई जनप्रतिनिधि कार्यक्रम में भाग लेंगे।
कौन थे ऋषि गालव, जिनके नाम पर रखा गया विश्वविद्यालय
ऋषि गालव प्राचीन भारतीय परंपरा के प्रसिद्ध ऋषि माने जाते हैं और वे ऋषि विश्वामित्र के शिष्य थे। मान्यता है कि उन्होंने भगवान शिव की लंबी तपस्या की थी। गुरु दक्षिणा के रूप में उन्होंने अपने गुरु को दुर्लभ अश्व और माधवी प्रदान कर वचन निभाया था। उनकी तपोभूमि जयपुर के गलताजी क्षेत्र में मानी जाती है।
ग्वालियर नाम से जुड़ा इतिहास, सांस्कृतिक पहचान को मिलेगा नया आयाम
ऐसी मान्यता भी है कि ग्वालियर शहर का नाम ऋषि गालव के नाम से ही प्रेरित है। ऐसे में इस विश्वविद्यालय का नामकरण न केवल शैक्षणिक पहल है, बल्कि क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत को भी नई पहचान देने का प्रयास माना जा रहा है।
शिक्षा और वैचारिक विस्तार का नया केंद्र बनने की तैयारी
यह यूनिवर्सिटी केवल शिक्षा का केंद्र ही नहीं, बल्कि वैचारिक और सांस्कृतिक गतिविधियों का भी प्रमुख स्थान बन सकती है। आने वाले समय में इसका प्रभाव क्षेत्रीय शिक्षा व्यवस्था और युवाओं के करियर अवसरों पर भी देखने को मिल सकता है।
































