रायपुर। छत्तीसगढ़ में स्कूली शिक्षा को अधिक रोचक, रचनात्मक और व्यवहारिक बनाने के लिए स्कूल शिक्षा विभाग ने महत्वपूर्ण पहल की है। नए शैक्षणिक सत्र से प्रदेश के सभी बालवाड़ी, प्राथमिक और मिडिल स्कूलों में प्रत्येक शनिवार को ‘गतिविधि दिवस’ के रूप में मनाया जाएगा। इसका उद्देश्य बच्चों को पारंपरिक पढ़ाई के साथ अनुभव आधारित शिक्षा से जोड़ना है।

किताबों से आगे बढ़कर सीखेंगे बच्चे, संस्कृति और परंपराओं से होगा परिचय

गतिविधि दिवस के दौरान विद्यार्थियों को महापुरुषों के जीवन, राष्ट्रीय और स्थानीय त्योहारों, मेलों, लोक परंपराओं तथा सांस्कृतिक विरासत से जुड़ी जानकारियां दी जाएंगी। इससे बच्चों को अपने समाज, संस्कृति और इतिहास को करीब से समझने का अवसर मिलेगा।

कला, खेल, योग और कौशल विकास पर रहेगा विशेष फोकस

हर शनिवार आयोजित होने वाली गतिविधियों में कला, संगीत, खेलकूद, योग, शारीरिक शिक्षा और विभिन्न रचनात्मक कार्यक्रम शामिल किए जाएंगे। इन गतिविधियों के माध्यम से बच्चों की प्रतिभा को पहचानने और उसे विकसित करने का प्रयास किया जाएगा। शिक्षा विभाग का मानना है कि इससे विद्यार्थियों की रचनात्मक सोच, आत्मविश्वास और सीखने की क्षमता में सकारात्मक वृद्धि होगी।

कक्षा 6 से 8 तक के विद्यार्थियों को मिलेगा व्यावसायिक प्रशिक्षण का अवसर

नई व्यवस्था के तहत कक्षा 6 से 8 तक के छात्रों को व्यावसायिक शिक्षा से जोड़ने की योजना भी तैयार की गई है। इसके जरिए विद्यार्थियों को शुरुआती स्तर पर विभिन्न व्यावहारिक कौशल सीखने का अवसर मिलेगा, जो भविष्य में उनके लिए उपयोगी साबित हो सकता है।

स्थानीय विशेषज्ञ बच्चों को देंगे विशेष मार्गदर्शन

स्कूलों में समय-समय पर स्थानीय विषय विशेषज्ञों, कलाकारों और संस्कृति से जुड़े व्यक्तियों को आमंत्रित किया जाएगा। वे बच्चों को क्षेत्रीय परंपराओं, लोक कला और सामाजिक मूल्यों के बारे में जानकारी देंगे। इससे विद्यार्थियों का अपने परिवेश से जुड़ाव और मजबूत होगा।

16 जून से शुरू होगा नया शैक्षणिक सत्र

प्रदेश के सभी सरकारी और निजी विद्यालयों में 16 जून से नियमित कक्षाएं शुरू हो जाएंगी। इसके बाद 30 जून को शाला प्रवेश उत्सव का आयोजन किया जाएगा। इस अवसर पर विद्यार्थियों को यूनिफॉर्म, पाठ्यपुस्तकें और साइकिलों का वितरण किया जाएगा।

शाला प्रवेश उत्सव में शामिल होंगे मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री

शाला प्रवेश उत्सव को लेकर विशेष तैयारियां की जा रही हैं। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और स्कूल शिक्षा मंत्री की भी उपस्थिति प्रस्तावित है। सरकार का लक्ष्य है कि प्रत्येक बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ ऐसा माहौल मिले, जहां वह पढ़ाई के साथ अपने व्यक्तित्व और कौशल का भी विकास कर सके।

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