दिल्ली : हाईकोर्ट ने राजधानी में ओपन जेल (Open Jail) स्थापित करने को लेकर अहम निर्देश जारी किए हैं। अदालत ने दिल्ली सरकार को दो महीने के भीतर एक विस्तृत और ठोस योजना तैयार कर पेश करने को कहा है।

कैदियों की पहचान और चयन प्रक्रिया पर जोर
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सरकार पहले ऐसे कैदियों की पहचान करे जिन्हें ओपन जेल में स्थानांतरित किया जा सकता है। यह प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट के दिशा निर्देशों के अनुसार होनी चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तहत निगरानी समिति जरूरी
अदालत ने कहा कि इस पूरी व्यवस्था के लिए एक निगरानी समिति का गठन किया जाए, जो सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप काम करेगी। यह समिति सुधारात्मक जेल व्यवस्था की निगरानी करेगी।

ओपन जेल का उद्देश्य केवल सजा नहीं, सुधार भी
हाईकोर्ट ने टिप्पणी की कि ओपन जेल का मकसद सिर्फ सजा देना नहीं है, बल्कि कैदियों का सुधार और पुनर्वास भी है। इस व्यवस्था में कैदियों को दिन में बाहर काम करने की अनुमति मिलती है, जिससे वे समाज से जुड़े रहते हैं।

सरकार से विस्तृत हलफनामा मांगा गया
कोर्ट ने दिल्ली सरकार से यह भी कहा है कि वह एक विस्तृत हलफनामा दाखिल करे, जिसमें सुप्रीम कोर्ट के 26 फरवरी के आदेश के अनुपालन की जानकारी दी जाए।

विशेष समिति बनाकर योजना तैयार करने का निर्देश
अदालत ने निर्देश दिया कि एक विशेष समिति बनाई जाए, जो ओपन या सेमी ओपन जेल व्यवस्था को लागू करने की रणनीति तैयार करे और मौजूदा स्थिति का आकलन करे।

समाज सुधार की दिशा में अहम कदम
अदालत ने माना कि यह पहल जेल प्रणाली में सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिससे कैदियों को बेहतर पुनर्वास और दूसरा मौका मिल सकता है।

अगली सुनवाई जुलाई में तय
इस मामले की अगली सुनवाई जुलाई में होगी। तब तक सरकार को अपनी योजना और प्रगति रिपोर्ट पेश करनी होगी।

ओपन जेल क्या है
ओपन या सेमी ओपन जेल ऐसी व्यवस्था होती है जहां कैदियों को सीमित स्वतंत्रता दी जाती है। वे दिन में काम के लिए बाहर जा सकते हैं और शाम को वापस लौटना अनिवार्य होता है, जबकि सुरक्षा प्रतिबंध अपेक्षाकृत कम होते हैं।

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