
मध्य प्रदेश : चर्चित नर्सिंग फर्जीवाड़े से जुड़े मामले में मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट और मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में महत्वपूर्ण सुनवाई हुई। ग्वालियर-चंबल संभाग के नर्सिंग कॉलेजों में पढ़ रहे हजारों छात्रों के भविष्य से जुड़े इस विवाद में फिलहाल छात्रों को परीक्षा में शामिल होने की सीधी अनुमति नहीं मिल सकी है।
परीक्षा की अनुमति को लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंचे थे छात्र
कुछ छात्रों ने 13 अगस्त को मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें संबंधित कॉलेजों के विद्यार्थियों को परीक्षा में बैठने की अनुमति देने से इनकार कर दिया गया था। छात्रों का तर्क था कि उनके कॉलेजों से जुड़ी सीबीआई जांच पर सुप्रीम कोर्ट की ओर से रोक लगी हुई है, इसलिए उन्हें पूर्व वर्षों की तरह परीक्षा देने का अवसर मिलना चाहिए।छात्रों ने यह भी कहा कि उन्होंने वर्ष 2021-22 में इन संस्थानों में प्रवेश लिया था और पहले हुई जांच व निरीक्षण की प्रक्रिया में कॉलेजों को निर्धारित मानकों के अनुरूप बताया गया था। इसके बावजूद परीक्षा को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।
फैकल्टी की डुप्लीकेसी जांच बनी बड़ा मुद्दा
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने पहले की सुनवाई में यह माना था कि वर्ष 2021 में ग्वालियर बेंच के निर्देश पर गठित 10 सदस्यीय समिति फैकल्टी डुप्लीकेसी से जुड़े सभी पहलुओं की जांच नहीं कर सकी थी। ऐसे में अदालत का मानना रहा कि संस्थानों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट किए बिना उन्हें राहत देना उचित नहीं होगा।इसी कारण कॉलेजों की पात्रता और जांच प्रक्रिया इस पूरे मामले का केंद्रीय मुद्दा बनी हुई है।
8 से 10 हजार छात्रों के भविष्य पर असर
ग्वालियर-चंबल संभाग के करीब 130 नर्सिंग कॉलेजों के लगभग 8 से 10 हजार विद्यार्थी इस मामले से प्रभावित बताए जा रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान सीजीआई सूर्यकांत ने स्पष्ट किया कि जिन कॉलेजों की सीबीआई जांच होगी, वहां की वास्तविक स्थिति जांच के बाद सामने आ जाएगी।अदालत ने संकेत दिया कि यदि कोई कॉलेज जांच में सभी नियमों और मानकों के अनुरूप पाया जाता है तो वहां के छात्रों को परीक्षा का अवसर मिल सकता है। वहीं, यदि कोई संस्थान मानकों पर खरा नहीं उतरता है तो छात्रों को उपयुक्त दूसरे कॉलेजों में स्थानांतरित करने की व्यवस्था की जा सकती है।
कॉलेज प्रबंधन से जवाब मांगने की सलाह
सुनवाई के दौरान सीजीआई ने कहा कि छात्रों को फीस, डोनेशन या अन्य राशि लेने वाले कॉलेज प्रबंधन से भी जवाब मांगना चाहिए। अदालत ने माना कि कॉलेजों को जांच प्रक्रिया का सामना करना होगा और जांच पूरी होने के बाद ही उनकी वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।सुप्रीम कोर्ट ने छात्रों की विशेष अनुमति याचिका खारिज करते हुए परीक्षा में शामिल होने की अनुमति के लिए संबंधित हाई कोर्ट का रुख करने की सलाह दी।
हाई कोर्ट ने भी जांच के बिना राहत से किया इनकार
इधर, मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में हुई सुनवाई में भी ग्वालियर-चंबल संभाग के संबंधित नर्सिंग कॉलेजों को बिना सीबीआई जांच राहत देने से इनकार कर दिया गया। अदालत ने कहा कि यदि कॉलेज प्रबंधन सीबीआई जांच कराने की स्पष्ट वचनबद्धता देता है और इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट से आवश्यक स्पष्टीकरण भी प्राप्त करता है, तभी आगे की प्रक्रिया पर विचार किया जा सकता है।फिलहाल हजारों नर्सिंग छात्रों की परीक्षा और भविष्य का रास्ता कॉलेजों की जांच और अदालतों में होने वाली आगामी सुनवाई पर टिका हुआ है।




















