बिलासपुर: सात साल पुराने आत्महत्या प्रकरण में छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए निचली अदालत के निर्णय को पलट दिया है। बिलासपुर हाई कोर्ट के जस्टिस एनके व्यास की एकल पीठ ने एक युवक को आत्महत्या के लिए उकसाने का दोषी माना है। अदालत ने कहा कि एकतरफा प्रेम के नाम पर लगातार शादी का दबाव बनाना, पीछा करना, धमकियां देना और मानसिक रूप से प्रताड़ित करना ऐसी परिस्थितियां पैदा करता है, जो पीड़ित को आत्महत्या जैसा कदम उठाने के लिए मजबूर कर सकती हैं।

2018 में मिली थी युवती की लाश

यह मामला कोरबा जिले के करतला थाना क्षेत्र का है। जनवरी 2018 में युवती अपने कमरे में सोने गई थी। अगले दिन सुबह उसकी मां ने कमरे का दरवाजा खोला तो बेटी का शव स्कार्फ के सहारे फंदे से लटका मिला। घटना की जांच के दौरान पुलिस को एक सुसाइड नोट और मोबाइल फोन मिला, जिसके आधार पर मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई।

एकतरफा प्रेम बना प्रताड़ना की वजह

पुलिस जांच और ट्रायल के दौरान सामने आया कि आरोपी मो. सेराज युवती से एकतरफा प्रेम करता था। वह लगातार उस पर शादी करने का दबाव बना रहा था। युवती के इंकार करने पर आरोपी कथित तौर पर उसका पीछा करता, धमकियां देता और उसकी मां को भी जान से मारने की बात कहता था। इन घटनाओं से युवती लंबे समय तक मानसिक तनाव में रही।

आत्महत्या से पहले भी कर चुकी थी प्रयास

मामले में यह तथ्य भी सामने आया कि मई 2017 में लगातार प्रताड़ना से परेशान होकर युवती ने अपनी कलाई की नस काटकर आत्महत्या का प्रयास किया था। उसका इलाज कराया गया था। परिवार भी इस घटनाक्रम से गहरे तनाव में था। यहां तक कि युवती की मां ने भी मानसिक दबाव के चलते नींद की गोलियां खा ली थीं। गांव के जनप्रतिनिधियों और पुलिस की समझाइश के बाद भी आरोपी का व्यवहार नहीं बदला।

ट्रायल कोर्ट ने सबूतों को माना था अपर्याप्त

कोरबा की निचली अदालत ने वर्ष 2019 में आरोपी को बरी कर दिया था। अदालत का मानना था कि सुसाइड नोट की हैंडराइटिंग की विशेषज्ञ से पुष्टि नहीं कराई गई और आत्महत्या के लिए उकसाने के पर्याप्त प्रत्यक्ष साक्ष्य उपलब्ध नहीं हैं।

हाई कोर्ट ने कहा, गवाहों की संख्या नहीं, गुणवत्ता अहम

इस फैसले को चुनौती दिए जाने के बाद हाई कोर्ट ने पूरे मामले की दोबारा समीक्षा की। अदालत ने कहा कि किसी भी आपराधिक मामले में गवाहों की संख्या से अधिक उनके बयान की विश्वसनीयता और साक्ष्यों की गुणवत्ता महत्वपूर्ण होती है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि जब मौखिक गवाही, मेडिकल रिकॉर्ड और अन्य परिस्थितिजन्य साक्ष्य प्रताड़ना की पुष्टि करते हों, तब केवल हैंडराइटिंग विशेषज्ञ की रिपोर्ट नहीं होने से पूरा मामला कमजोर नहीं हो जाता।

27 जुलाई को तय होगी सजा

हाई कोर्ट ने आरोपी मो. सेराज को भारतीय दंड संहिता की धारा 306 के तहत आत्महत्या के लिए उकसाने का दोषी करार दिया है। अब मामले में सजा के निर्धारण के लिए 27 जुलाई की तारीख तय की गई है। अदालत ने आरोपी या उसके अधिवक्ता को उस दिन अनिवार्य रूप से उपस्थित रहने का निर्देश दिया है।

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