
Form 7 Rules: उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर सियासी बहस के बीच निर्वाचन आयोग ने फॉर्म-7 के दुरुपयोग पर सख्त रुख अपनाया है। प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने स्पष्ट किया है कि किसी मतदाता का नाम गलत तरीके से कटवाने के लिए फॉर्म-7 का इस्तेमाल करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने प्रिंट मीडिया, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया, सोशल मीडिया और दूसरे माध्यमों से व्यापक जागरूकता अभियान चलाने पर जोर दिया है, ताकि मतदाता सूची में नाम हटाने की प्रक्रिया का दुरुपयोग रोका जा सके।
फॉर्म-7 के गलत इस्तेमाल पर निर्वाचन आयोग सख्त
मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने कहा है कि लोगों को फॉर्म-7 के इस्तेमाल और उससे जुड़े नियमों के बारे में जागरूक करना जरूरी है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी योग्य मतदाता का नाम अनुचित तरीके से सूची से हटाने का प्रयास न हो। आयोग की ओर से विभिन्न प्रचार माध्यमों के जरिए लोगों तक जरूरी जानकारी पहुंचाने की बात कही गई है।
उत्तर प्रदेश में 17 से 24 अक्टूबर तक विशेष अभियान
उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची में नए नाम जोड़ने और छूटे हुए पात्र मतदाताओं को शामिल करने के लिए 17 अक्टूबर से विशेष पंजीकरण अभियान शुरू किया गया है। यह अभियान 24 अक्टूबर तक चलेगा। इसके तहत ऐसे लोगों को मतदाता सूची में शामिल करने पर जोर दिया जा रहा है, जिनके नाम किसी वजह से सूची में दर्ज नहीं हो पाए हैं।
इस अभियान को आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की तैयारियों के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। निर्वाचन अधिकारियों का जोर यह सुनिश्चित करने पर है कि सभी पात्र नागरिकों को मतदाता सूची में जगह मिले।
प्रदेश में करीब 2 करोड़ मतदाताओं के नाम जोड़ने की जरूरत
उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के मुताबिक, प्रदेश में लगभग 2 करोड़ पात्र मतदाताओं के नाम सूची में जोड़े जाने की जरूरत है। उनके अनुसार, आबादी के अनुपात के आधार पर मतदाताओं की संख्या करीब 16 करोड़ होने का अनुमान था, जबकि SIR के दौरान लगभग 14 करोड़ मतदाताओं के नाम सामने आए। इस अंतर को देखते हुए छूटे हुए पात्र लोगों का पंजीकरण कराने पर जोर दिया जा रहा है।
नए मतदाता के रूप में नाम दर्ज कराने के लिए फॉर्म-6 भरकर आवेदन किया जा सकता है।
राजनीतिक दलों के साथ साझा होगी मतदाता सूची
विशेष अभियान के दौरान मतदाता सूची में जोड़े जाने वाले नामों की जानकारी सभी राजनीतिक दलों के साथ साझा की जाएगी। इससे सूची को लेकर सामने आने वाले दावों और आपत्तियों का समय पर निपटारा करने में मदद मिलेगी। निर्वाचन आयोग का उद्देश्य मतदाता सूची को अधिक समावेशी और सटीक बनाना है, ताकि पात्र नागरिक मतदान के अधिकार से वंचित न रहें।




















