अंबिकापुर: राजीव गांधी शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में कॉलेज कल्चर एंड क्रिएटिविटी फोरम द्वारा मुहिम फाउंडेशन के सहयोग से दो दिवसीय रचनात्मक लेखन कार्यशाला का सफल आयोजन किया गया। कार्यशाला में सीएसडीएस नई दिल्ली से आए कवि मृत्युंजय ने रिसोर्स पर्सन के रूप में विद्यार्थियों को लेखन की बारीकियों से अवगत कराया

इस कार्यशाला को चार सत्रों में विभाजित किया गया था। पहले सत्र में कविता के इतिहास और उसकी निर्माण प्रक्रिया पर चर्चा करते हुए प्रतिभागियों में रचनात्मक लेखन की समझ विकसित की गई। इस दौरान विद्यार्थियों ने लेखन को लेकर अपने विचार प्रस्तुत किए, जिसे सुनकर प्राचार्य सहित उपस्थित सभी लोग प्रभावित हुए।दूसरे सत्र में कहानी लेखन की प्रक्रिया और उसके इतिहास पर प्रकाश डाला गया। प्रतिभागियों को लेखन की तकनीकों से परिचित कराते हुए उन्हें अगले दिन के लिए कविता या कहानी लिखने का कार्य दिया गया।तीसरे सत्र में प्रतिभागियों ने अपनी रचनाओं का प्रस्तुतीकरण किया। विद्यार्थियों की कविताओं और कहानियों ने उनकी रचनात्मक प्रतिभा का परिचय दिया, जिसे सुनकर यह महसूस हुआ कि सरगुजा क्षेत्र में साहित्यिक प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है।

अंतिम सत्र में कवि मृत्युंजय ने प्रतिभागियों की रचनाओं पर विस्तार से चर्चा करते हुए उन्हें आवश्यक सुझाव दिए और सुधार के लिए समय भी प्रदान किया। इसके बाद प्रतिभागियों से फीडबैक लिया गया, जिसमें सभी ने कार्यशाला को अत्यंत उपयोगी बताया और भविष्य में ऐसे आयोजन लगातार करने की मांग की।इस समापन अवसर पर कवि मृत्युंजय ने कालिदास, तुलसीदास, कबीरदास, निराला, नागार्जुन और वीरेन डंगवाल जैसे महान साहित्यकारों की रचनाओं का उल्लेख करते हुए विद्यार्थियों को साहित्य की व्यापक दुनिया से परिचित कराया।

प्राचार्य डॉ. अनिल कुमार सिन्हा ने कहा कि रचनात्मकता मनुष्य की पहचान है और लेखन के माध्यम से व्यक्ति अपनी सोच और भावनाओं को सशक्त रूप से व्यक्त कर सकता है। उन्होंने विद्यार्थियों की प्रतिभा की सराहना करते हुए भविष्य में ऐसे आयोजनों को निरंतर जारी रखने का आश्वासन दिया।

इस अवसर पर वरिष्ठ प्राध्यापक डॉ. राजकमल मिश्र ने भी साहित्य लेखन के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम के समन्वयक डॉ. दीपक सिंह ने आयोजन को सफल बताते हुए विद्यार्थियों के उत्साह की सराहना की। वहीं मुहिम फाउंडेशन के संस्थापक ऋषिकेश ठाकुर ने इसे एक सकारात्मक अनुभव बताया।

इस कार्यशाला में कुल 21 प्रतिभागियों ने भाग लिया। कार्यक्रम का सफल संचालन ऋषिकेश ठाकुर, डॉ. कामिनी और रोज एक्का द्वारा किया गया। अंत में प्रतिभागियों से फीडबैक लेकर कार्यक्रम का समापन किया गया।

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