

रायपुर : छत्तीसगढ़ में सोमवार से हर घर तिरंगा अभियान की औपचारिक शुरुआत हो गई। राजधानी रायपुर में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने तिरंगा यात्रा को रवाना कर अभियान का शुभारंभ किया। देशभक्ति के नारों, राष्ट्रगान और हाथों में तिरंगा लिए बड़ी संख्या में लोग इस कार्यक्रम में शामिल हुए। सरकार का कहना है कि अभियान का उद्देश्य स्वतंत्रता सेनानियों और राष्ट्र निर्माण में योगदान देने वाले महान व्यक्तित्वों को सम्मान देना तथा नागरिकों में राष्ट्रीय एकता और देशभक्ति की भावना को मजबूत करना है।
15 अगस्त तक चलेगा राज्यव्यापी अभियान
राज्य सरकार के कार्यक्रम के अनुसार 15 अगस्त तक हर घर तिरंगा अभियान पूरे छत्तीसगढ़ में व्यापक स्तर पर संचालित किया जाएगा। जिला, मंडल, पंचायत और बूथ स्तर तक तिरंगा यात्राएं निकाली जाएंगी। सरकारी भवनों, निजी प्रतिष्ठानों और आम नागरिकों के घरों पर राष्ट्रीय ध्वज फहराने के लिए लोगों को प्रेरित किया जाएगा।
इस दौरान विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों और प्रमुख शहरों में युवा, महिलाएं और सामाजिक संगठनों की भागीदारी भी सुनिश्चित की जाएगी। स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के परिजनों, शहीद परिवारों और पूर्व सैनिकों का सम्मान करने के साथ महापुरुषों की प्रतिमाओं की साफ-सफाई और माल्यार्पण जैसे कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे।
अभियान पर सियासत भी हुई शुरू
हर घर तिरंगा अभियान की शुरुआत के साथ ही इसे लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने भाजपा की तिरंगा यात्रा पर सवाल उठाते हुए कहा कि भाजपा को अपने अतीत पर भी नजर डालनी चाहिए।
उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का इतिहास तिरंगे के प्रति सम्मान से जुड़ा नहीं रहा। बैज ने कहा कि भाजपा आज तिरंगा यात्रा निकालकर अपने पुराने राजनीतिक रुख को छिपाने की कोशिश कर रही है। उनके अनुसार आजादी के आंदोलन के दौरान भाजपा की वैचारिक पृष्ठभूमि वाले संगठनों की भूमिका पर भी सवाल उठते रहे हैं।
राष्ट्रभक्ति और राजनीति दोनों केंद्र में
एक ओर राज्य सरकार इस अभियान को राष्ट्रीय एकता, सामाजिक समरसता और देशभक्ति से जोड़कर आगे बढ़ा रही है, वहीं दूसरी ओर विपक्ष इसे राजनीतिक नजरिए से देख रहा है। ऐसे में स्वतंत्रता दिवस से पहले शुरू हुआ हर घर तिरंगा अभियान अब राष्ट्रभक्ति के साथ-साथ राजनीतिक बहस का भी प्रमुख विषय बन गया है।
हर घर तिरंगा अभियान शुरू, छत्तीसगढ़ में राष्ट्रभक्ति के साथ सियासी बयानबाजी भी तेज
रायपुर से मुख्यमंत्री ने दिखाई तिरंगा यात्रा को हरी झंडी
छत्तीसगढ़ में सोमवार से हर घर तिरंगा अभियान की औपचारिक शुरुआत हो गई। राजधानी रायपुर में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने तिरंगा यात्रा को रवाना कर अभियान का शुभारंभ किया। देशभक्ति के नारों, राष्ट्रगान और हाथों में तिरंगा लिए बड़ी संख्या में लोग इस कार्यक्रम में शामिल हुए। सरकार का कहना है कि अभियान का उद्देश्य स्वतंत्रता सेनानियों और राष्ट्र निर्माण में योगदान देने वाले महान व्यक्तित्वों को सम्मान देना तथा नागरिकों में राष्ट्रीय एकता और देशभक्ति की भावना को मजबूत करना है।
15 अगस्त तक चलेगा राज्यव्यापी अभियान
राज्य सरकार के कार्यक्रम के अनुसार 15 अगस्त तक हर घर तिरंगा अभियान पूरे छत्तीसगढ़ में व्यापक स्तर पर संचालित किया जाएगा। जिला, मंडल, पंचायत और बूथ स्तर तक तिरंगा यात्राएं निकाली जाएंगी। सरकारी भवनों, निजी प्रतिष्ठानों और आम नागरिकों के घरों पर राष्ट्रीय ध्वज फहराने के लिए लोगों को प्रेरित किया जाएगा।
इस दौरान विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों और प्रमुख शहरों में युवा, महिलाएं और सामाजिक संगठनों की भागीदारी भी सुनिश्चित की जाएगी। स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के परिजनों, शहीद परिवारों और पूर्व सैनिकों का सम्मान करने के साथ महापुरुषों की प्रतिमाओं की साफ-सफाई और माल्यार्पण जैसे कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे।
अभियान पर सियासत भी हुई शुरू
हर घर तिरंगा अभियान की शुरुआत के साथ ही इसे लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने भाजपा की तिरंगा यात्रा पर सवाल उठाते हुए कहा कि भाजपा को अपने अतीत पर भी नजर डालनी चाहिए।
उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का इतिहास तिरंगे के प्रति सम्मान से जुड़ा नहीं रहा। बैज ने कहा कि भाजपा आज तिरंगा यात्रा निकालकर अपने पुराने राजनीतिक रुख को छिपाने की कोशिश कर रही है। उनके अनुसार आजादी के आंदोलन के दौरान भाजपा की वैचारिक पृष्ठभूमि वाले संगठनों की भूमिका पर भी सवाल उठते रहे हैं।
राष्ट्रभक्ति और राजनीति दोनों केंद्र में
एक ओर राज्य सरकार इस अभियान को राष्ट्रीय एकता, सामाजिक समरसता और देशभक्ति से जोड़कर आगे बढ़ा रही है, वहीं दूसरी ओर विपक्ष इसे राजनीतिक नजरिए से देख रहा है। ऐसे में स्वतंत्रता दिवस से पहले शुरू हुआ हर घर तिरंगा अभियान अब राष्ट्रभक्ति के साथ-साथ राजनीतिक बहस का भी प्रमुख विषय बन गया है।











