Chhattisgarh News: छत्तीसगढ़ के Bastar क्षेत्र में अब हालात तेजी से बदल रहे हैं। कभी डर और खामोशी में डूबे रहे गांवों में अब फिर से जीवन की रौनक लौटने लगी है। इन्हीं बदलावों की एक मिसाल बना है कामाराम गांव, जहां वर्षों बाद शादी की खुशियों ने माहौल को फिर से जीवंत कर दिया है।


जब शादी भी होती थी डर और अनुमति के बीच

जगरगुंडा से करीब 10 किलोमीटर दूर स्थित कामाराम गांव में लंबे समय तक स्थिति ऐसी रही कि किसी भी शादी से पहले लोगों को नक्सलियों से अनुमति लेनी पड़ती थी। यह तय करना होता था कि बारात कितने लोग आएंगे, कार्यक्रम कितने बजे तक चलेगा और बाराती कब लौटेंगे।

सरकारी कर्मचारियों की मौजूदगी या बाहरी मेहमानों का आना लगभग असंभव था, जिससे सामाजिक जीवन पूरी तरह प्रभावित हो गया था।


दशकों बाद पहली बार आई धूमधाम से बारात

हाल ही में दंतेवाड़ा के गोंगपाल गांव से बारात पहुंची, जो 2005 के बाद इस इलाके में पहली बड़ी शादी मानी जा रही है। यह बारात वाहनों के साथ धूमधाम से पहुंची, जिसे देखकर पूरा गांव उत्साह और खुशी से भर उठा।


डर के माहौल से टूटे सामाजिक रिश्ते

पहले इस क्षेत्र में शादी-ब्याह ही नहीं, बल्कि बीमारी या किसी की मृत्यु के समय भी लोग सुरक्षित यात्रा नहीं कर पाते थे। पंडितों से मुहूर्त निकलवाना और पारंपरिक रीति रिवाज निभाना भी मुश्किल हो गया था।

नक्सली प्रभाव के कारण कई परिवारों को पलायन तक करना पड़ा, जिससे सामाजिक ताना-बाना कमजोर हो गया था।


अब बदल रहा है बस्तर का चेहरा

नक्सल प्रभावित इलाकों में स्थिति में सुधार के बाद अब लोग अपने गांव लौटने लगे हैं। शादी और सामाजिक आयोजनों में फिर से चहल पहल देखने को मिल रही है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि अब माहौल बदल रहा है और लंबे समय बाद वे खुलकर अपने रिश्तों और परंपराओं को फिर से जी पा रहे हैं।


नई शुरुआत की उम्मीद

कामाराम गांव की यह कहानी केवल एक शादी की नहीं, बल्कि उस बदलाव की है जहां डर की जगह अब उत्सव और उम्मीदें ले रही हैं। यह संकेत है कि बस्तर में सामाजिक जीवन धीरे धीरे फिर से अपनी पुरानी रफ्तार पकड़ रहा है।

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