
बहुचर्चित अक्षत अग्रवाल हत्याकांड में दो साल बाद आया फैसला, अदालत ने आरोपी संजीव मंडल उर्फ भानु को हत्या और आर्म्स एक्ट में दोषी ठहराया
अंबिकापुर। सरगुजा जिले के बहुचर्चित अक्षत अग्रवाल हत्याकांड में करीब दो वर्ष बाद न्यायालय ने अहम फैसला सुनाते हुए आरोपी संजीव मंडल उर्फ भानु को आजीवन सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। सप्तम अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश, अंबिकापुर के न्यायालय ने अपने फैसले में माना कि आरोपी ने मृतक अक्षत अग्रवाल से दो लाख रुपये में उसकी हत्या करने का सौदा किया था और 20 अगस्त 2024 को योजनाबद्ध तरीके से तीन गोलियां मारकर उसकी हत्या कर दी थी। न्यायालय ने आरोपी को भारतीय न्याय संहिता की धारा 103(1) तथा आर्म्स एक्ट की धारा 25 एवं 27 के तहत दोषी ठहराया है।
गुमशुदगी की रिपोर्ट से शुरू हुई थी जांच
मामले की शुरुआत 20 अगस्त 2024 को हुई थी, जब अंबिकापुर के पटपरिया निवासी महेश कुमार केडिया ने गांधीनगर थाना पहुंचकर अपने पुत्र अक्षत अग्रवाल की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। रिपोर्ट में बताया गया था कि उनका पुत्र शाम करीब छह बजे अपनी सफेद रंग की एस्टर कार क्रमांक सीजी-10-बीएस-4184 से घर से निकला था, लेकिन देर रात तक वापस नहीं लौटा। उसका मोबाइल फोन भी बंद आ रहा था। शिकायत के बाद पुलिस ने गुमशुदगी दर्ज कर जांच प्रारंभ की।
मोबाइल कॉल डिटेल से पुलिस पहुंची आरोपी तक
जांच के दौरान पुलिस ने अक्षत अग्रवाल के मोबाइल फोन की कॉल डिटेल, लोकेशन और तकनीकी साक्ष्यों का विश्लेषण किया। इस दौरान पुलिस को अक्षत के संपर्क में रहने वाले युवक संजीव मंडल उर्फ भानु पर संदेह हुआ। पुलिस ने उसके घर की घेराबंदी कर उसे हिरासत में लिया और पूछताछ की। पूछताछ के दौरान आरोपी ने हत्या की पूरी कहानी पुलिस के सामने रख दी।
जंगल में ले जाकर मारी थीं तीन गोलियां
आरोपी ने पुलिस को बताया कि 20 अगस्त 2024 की शाम वह अक्षत अग्रवाल के साथ उसकी हुंडई एक्सटर कार में बैठकर ग्राम मेंड्रा स्थित पहाड़ घुटरी जंगल पहुंचा था। वहां पिस्टल से अक्षत अग्रवाल के सीने में लगातार तीन गोलियां दाग दी गईं, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। हत्या के बाद आरोपी शव को वाहन में छोड़कर वहां से वापस लौट आया।

न्यायालय ने माना मृतक ने ही किया था संपर्क
इस मामले का सबसे चौंकाने वाला पहलू न्यायालय के फैसले में सामने आया। फैसले के पैरा 205, 206 और 208 में न्यायालय ने उपलब्ध साक्ष्यों, मेमोरेंडम कथन, नार्को टेस्ट तथा पॉलीग्राफ टेस्ट के आधार पर यह माना कि घटना से कुछ समय पहले मृतक और आरोपी एक-दूसरे के संपर्क में थे। न्यायालय ने अपने निर्णय में उल्लेख किया है कि मृतक ने आरोपी से संपर्क कर अपनी हत्या कराने के लिए सौदा (सुपारी) किया था। फैसले के अनुसार 20 अगस्त 2024 को मृतक स्वयं आरोपी को अपने साथ वाहन में बैठाकर जंगल ले गया था और वहां अपनी हत्या किए जाने की बात कही थी।
न्यायालय के अनुसार साक्ष्यों से यह भी प्रमाणित हुआ कि मृतक ने आरोपी को पिस्टल उपलब्ध कराई थी तथा आरोपी ने उसी पिस्टल से तीन गोलियां चलाकर उसकी हत्या कर दी। अदालत ने अपने निर्णय में कहा है कि आरोपी संजीव मंडल ने मृतक अक्षत अग्रवाल से दो लाख रुपये में हत्या करने की सुपारी ली थी और तय योजना के अनुसार हत्या को अंजाम दिया था।
हत्या के बाद जेवर और नकदी लेकर फरार हुआ
पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि हत्या के बाद आरोपी ने मृतक के गले में पहनी सोने की चेन, हाथों की अंगूठियां और अन्य कीमती सामान निकाल लिए थे। आरोपी ने मृतक के पास मौजूद 50 हजार रुपये नकद में से 48 हजार रुपये भी अपने पास रख लिए थे। इसके बाद वह हत्या में प्रयुक्त हथियारों को लेकर इंजीनियरिंग कॉलेज के पास पहुंचा और झाड़ियों में छिपाकर फेंक दिया।
आरोपी की निशानदेही पर हथियार और जेवर बरामद
आरोपी की निशानदेही पर पुलिस ने एक मोटरसाइकिल, एक मोबाइल फोन, दो सोने की चेन, एक ब्रेसलेट, दो अंगूठियां, तीन देशी लोहे के पिस्टल, 32 जिंदा कारतूस, तीन खोखे और दो लोहे की मैगजीन बरामद की थीं। इसके अलावा मृतक के जेवर और नकदी भी बरामद की गई थी। पुलिस ने घटनास्थल, हथियारों और अन्य बरामद सामग्रियों के संबंध में वैज्ञानिक एवं तकनीकी साक्ष्य एकत्र कर न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किए।

अभियोजन के साक्ष्यों को न्यायालय ने माना पर्याप्त
सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने गवाहों के बयान, बरामदगी पंचनामा, पोस्टमार्टम रिपोर्ट, एफएसएल रिपोर्ट, मोबाइल लोकेशन, मेमोरेंडम कथन तथा अन्य दस्तावेजी साक्ष्य न्यायालय में प्रस्तुत किए। न्यायालय ने कहा कि आरोपी के विरुद्ध प्रस्तुत साक्ष्यों की श्रृंखला पूर्ण है और उससे यह सिद्ध होता है कि आरोपी ने हत्या की वारदात को अंजाम दिया था। न्यायालय ने यह भी माना कि हत्या में प्रयुक्त पिस्टल, कारतूस और अन्य सामग्री की बरामदगी आरोपी के अपराध की पुष्टि करती है।
उम्रकैद समेत आर्म्स एक्ट में भी सजा
सभी पक्षों को सुनने के बाद न्यायालय ने आरोपी संजीव मंडल उर्फ भानु को भारतीय न्याय संहिता की धारा 103(1) के तहत आजीवन सश्रम कारावास एवं अर्थदंड से दंडित किया। वहीं आर्म्स एक्ट की धारा 25 एवं 27 के तहत भी अलग-अलग कारावास और अर्थदंड की सजा सुनाई गई। न्यायालय ने आदेश दिया कि सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी। आरोपी 21 अगस्त 2024 से न्यायिक अभिरक्षा में है और जेल में बिताई गई अवधि को सजा में समायोजित किया जाएगा।
दो वर्ष बाद हुआ चर्चित हत्याकांड का पटाक्षेप
हत्या, कथित सुपारी, अवैध हथियारों की बरामदगी और न्यायालय के समक्ष आए असामान्य तथ्यों के कारण यह मामला पूरे सरगुजा संभाग में चर्चा का विषय बना रहा। करीब दो वर्षों तक चली सुनवाई के बाद आए इस फैसले के साथ ही बहुचर्चित अक्षत अग्रवाल हत्याकांड का न्यायिक पटाक्षेप हो गया।





















