बलरामपुर। बलरामपुर-रामानुजगंज जिले की नई कलेक्टर चंदन संजय त्रिपाठी ने बलरामपुर जिले की पहली महिला कलेक्टर के रूप में शुक्रवार, 22 मई 2026 को पदभार ग्रहण किया। उनके पदभार ग्रहण करते ही जिला प्रशासनिक अमले में नई ऊर्जा, उत्साह एवं सकारात्मक कार्यसंस्कृति का संचार देखा जा रहा है।

श्रीमती त्रिपाठी 2016 बैच की भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) अधिकारी हैं और हालिया पदस्थापना से पूर्व कोरिया जिले की कलेक्टर के रूप में कार्यरत थीं। कोरिया जिला भी सरगुजा संभाग का हिस्सा है, जहां आदिवासी क्षेत्रों, दूरस्थ गांवों, सीमित आधारभूत सुविधाओं और योजनाओं की जमीनी मॉनिटरिंग जैसी चुनौतियां प्रशासन के सामने रहती हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि वहां का अनुभव बलरामपुर जिले में उनके कार्यकाल के दौरान महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

बलरामपुर-रामानुजगंज जिले की नई कलेक्टर चंदन संजय त्रिपाठी की नियुक्ति को केवल नियमित प्रशासनिक फेरबदल नहीं बल्कि क्षेत्रीय अनुभव आधारित रणनीतिक निर्णय के रूप में भी देखा जा रहा है। उत्तर छत्तीसगढ़ और सरगुजा संभाग की प्रशासनिक परिस्थितियों की समझ रखने वाली अधिकारी के रूप में उनकी पहचान को देखते हुए प्रशासनिक हलकों में माना जा रहा है कि सरकार ने संवेदनशील जिले के लिए अनुभव और संतुलन दोनों को प्राथमिकता दी है।

बलरामपुर-रामानुजगंज जिला भौगोलिक दृष्टि से राज्य के सबसे संवेदनशील जिलों में गिना जाता है। झारखंड और उत्तर प्रदेश की सीमा से लगे इस जिले में बड़ी आदिवासी आबादी निवास करती है। वनांचल क्षेत्रों में सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा, पोषण, पेयजल, वनाधिकार पट्टा, ग्रामीण रोजगार और पलायन जैसे मुद्दे लगातार प्रशासन की प्राथमिकताओं में शामिल रहते हैं। इसके अलावा दूरस्थ पंचायतों तक शासन की योजनाओं की प्रभावी पहुंच सुनिश्चित करना भी बड़ी चुनौती माना जाता है।

सरगुजा संभाग में कार्य कर चुके अधिकारियों को इस क्षेत्र की सामाजिक संरचना, स्थानीय समस्याओं और प्रशासनिक व्यवहार की बेहतर समझ होती है। यही कारण है कि नई कलेक्टर को जिले की परिस्थितियों को समझने में अपेक्षाकृत कम समय लग सकता है। इससे शासन की योजनाओं के क्रियान्वयन और जनसमस्याओं के निराकरण की प्रक्रिया में तेजी आने की उम्मीद जताई जा रही है।

श्रीमती त्रिपाठी की कार्यशैली को लेकर भी सकारात्मक चर्चा है। उनके पूर्व कार्यकाल में मैदानी मॉनिटरिंग, योजनाओं की समीक्षा और प्रशासनिक सक्रियता पर विशेष जोर देखने को मिला था। ऐसे में बलरामपुर जिले में भी जनसुनवाई, विकास कार्यों की निगरानी, शिक्षा-स्वास्थ्य सेवाओं की समीक्षा तथा ग्रामीण क्षेत्रों में प्रशासनिक पहुंच को लेकर लोगों की अपेक्षाएं बढ़ गई हैं। प्रशासनिक हलकों में माना जा रहा है कि आने वाले समय में उनका कार्यकाल जिले की प्रशासनिक कार्यशैली और विकास योजनाओं के क्रियान्वयन पर प्रभाव छोड़ सकता है।

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