
सामाजिक एकजुटता, संगठन की मजबूती और युवाओं की भूमिका पर हुआ मंथन, आरक्षण के मुद्दे पर भी दी गई जानकारी
अम्बिकेश गुप्ता
कुसमी। सामुदायिक भवन कुसमी में बुधवार को अखिल भारतीय चिक बड़ाईक महासभा का 13वां स्थापना दिवस बड़े उत्साह, उमंग और सामाजिक एकजुटता के साथ मनाया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता चिक बड़ाईक समाज के जिलाध्यक्ष बोधन राम बुनकर ने की। स्थापना दिवस समारोह में शंकरगढ़ क्षेत्र सहित आसपास के विभिन्न क्षेत्रों से बड़ी संख्या में समाज के महिला-पुरुष, युवा एवं वरिष्ठजन शामिल हुए।
कार्यक्रम का शुभारंभ सामाजिक ध्वज के ध्वजारोहण के साथ किया गया। इसके पश्चात राष्ट्रगीत का सामूहिक गायन हुआ तथा भारत रत्न बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर के छायाचित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें नमन किया गया। समाज के दिवंगत सदस्यों की स्मृति में श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनकी आत्मा की शांति के लिए मौन रखा गया। इसके बाद कार्यक्रम में पहुंचे पदाधिकारियों, वरिष्ठजनों एवं अतिथियों का फूल-माला से स्वागत किया गया।
संगठन की मजबूती और सामाजिक एकता पर जोर..
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अखिल भारतीय चिक बड़ाईक महासभा के संगठन मंत्री एवं स्थापना दिवस के छत्तीसगढ़ प्रभारी खसरू बुनकर ने स्वागत उद्बोधन दिया। उन्होंने समाज की वर्तमान सामाजिक स्थिति, संगठन की आवश्यकता तथा समाज को आगे ले जाने के लिए सामूहिक प्रयासों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि किसी भी समाज की मजबूती उसकी एकजुटता और संगठित प्रयासों में निहित होती है। ऐसे आयोजनों के माध्यम से समाज के लोगों को एक मंच पर आने और सामाजिक मुद्दों पर विचार-विमर्श का अवसर मिलता है।
उन्होंने समाज के लोगों से आपसी समन्वय बनाए रखने, सामाजिक गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी करने तथा आने वाली पीढ़ी को शिक्षा और संस्कार से जोड़ने पर विशेष जोर दिया।
आरक्षण के मुद्दे को लेकर दिल्ली में चल रही कार्रवाई की जानकारी
कार्यक्रम के दौरान महासभा के प्रांतीय अध्यक्ष दिलेश्वर चौहान ने दूरभाष के माध्यम से सभा को संबोधित किया। उन्होंने समाज की ओर से चिक जाति के आरक्षण से संबंधित विषय को लेकर किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी। उन्होंने दिल्ली प्रवास तथा केंद्र सरकार के समक्ष चल रही सामाजिक कार्रवाई के संबंध में समाजजनों को अवगत कराया। उन्होंने समाज के लोगों से आरक्षण सहित विभिन्न सामाजिक मुद्दों को लेकर संगठित होकर आगे बढ़ने का आह्वान किया।
युवाओं से नशे से दूर रहकर शिक्षा को प्राथमिकता देने की अपील
युवा संगठन सचिव दीपक बुनकर ने भी दूरभाष के माध्यम से स्थापना दिवस की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने समाज के युवाओं की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि युवा ही समाज के भविष्य की दिशा तय करेंगे। उन्होंने युवाओं से नशे जैसी सामाजिक बुराइयों से दूर रहने, शिक्षा को प्राथमिकता देने तथा समाज के संस्कारों और जिम्मेदारियों को मजबूत बनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि युवाओं को अपनी ऊर्जा सकारात्मक दिशा में लगाकर समाज और राष्ट्र के निर्माण में योगदान देना चाहिए।
वरिष्ठजनों ने रखे अपने विचार..
समारोह में बोधन राम, शिवनाथ बड़ाईक, अमर बुनकर, महेश बुनकर, दयाराम, सुदामा चौहान, मनबोध बुनकर, गोपाल राम, जोहन राम एवं सीताराम सहित समाज के अन्य वरिष्ठजनों ने भी अपने विचार रखे। वक्ताओं ने समाज के सामाजिक उत्थान, संगठन को मजबूत करने, शिक्षा को बढ़ावा देने, युवाओं की भागीदारी बढ़ाने तथा समाज में आपसी भाईचारा और एकता कायम रखने सहित विभिन्न विषयों पर अपने विचार साझा किए।
महिला और युवाओं की भागीदारी रही उल्लेखनीय..
स्थापना दिवस समारोह में समाज की महिलाओं एवं युवाओं की भी उल्लेखनीय भागीदारी रही। कार्यक्रम में सामाजिक गतिविधियों में महिलाओं की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए समाज के विकास में उनकी सक्रिय सहभागिता की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया। समारोह के दौरान उपस्थित समाजजनों में स्थापना दिवस को लेकर खासा उत्साह देखने को मिला। कार्यक्रम सामाजिक एकता, आपसी भाईचारे और संगठन की मजबूती का संदेश देता नजर आया।
इनकी रही प्रमुख उपस्थिति..
कार्यक्रम का सफल संचालन मधेश्वर बड़ाईक एवं सतीश चौहान ने किया। इस अवसर पर गुरु राम बुनकर, फिरन बुनकर, गणेश बड़ाईक, मतरु राम, बाबर राम, रेखा दास, मानती चौहान, प्रीति बुनकर, बलवंती, दया मुनि, गायत्री, रामवती, उर्मिला, हरिरिते, भास्कर, सुरेश, महेंदी, राजमुनि, सुष्मिता, सीमा, अरुणा, संगीता, रोशनी, शोभा, अनीता, सुनीता, सुमति, सरिता, रामलाल, बसंत राम, पूसाई, शिवनाथ, बसंत, बिपहिया, गणेश एवं अशोक दास सहित शंकरगढ़ क्षेत्र से बड़ी संख्या में समाज के माता-बहनों एवं समाजजनों की गरिमामयी उपस्थिति रही। समारोह के अंत में समाज की एकजुटता, संगठन की मजबूती और सामाजिक विकास के संकल्प के साथ अखिल भारतीय चिक बड़ाईक महासभा का 13वां स्थापना दिवस उत्साहपूर्वक संपन्न हुआ।




















