नई दिल्ली। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रवक्ता सौरभ दास एक बार फिर विवादों के घेरे में हैं। पिछले कुछ समय से पार्टी के प्रदर्शनों को लेकर सुर्खियों में रहने वाले सौरभ अब अपनी कथित पहचान को लेकर चर्चा में हैं। दावा किया जा रहा है कि उनका वास्तविक नाम योगेश शर्मा है। इस मामले को लेकर मद्रास हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई है। अदालत ने याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार सहित संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

योगेश शर्मा उर्फ सौरभ दास के नाम से दाखिल हुई याचिका

यह याचिका गणेश कुमार नामक व्यक्ति ने दायर की है। इसमें सौरभ दास को योगेश शर्मा उर्फ सौरभ दास बताया गया है। याचिकाकर्ता ने अदालत से उनकी वास्तविक पहचान, नागरिकता और पारिवारिक पृष्ठभूमि की जांच कराने की मांग की है। साथ ही उनके माता-पिता और परिवार से संबंधित जानकारियों का भी सत्यापन कराने की अपील की गई है।

केंद्र सरकार से जवाब तलब, पहचान की जांच की मांग

मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने याचिका में उठाए गए सवालों पर संबंधित पक्षों से जवाब मांगा है। याचिकाकर्ता का कहना है कि सौरभ दास की वास्तविक पहचान और नागरिकता से जुड़े तथ्यों की आधिकारिक स्तर पर पड़ताल होनी चाहिए। उनके नाम में कथित बदलाव हुआ है या किसी महत्वपूर्ण जानकारी को छिपाया गया है, इसकी भी जांच कराने की मांग की गई है।

X और इंस्टाग्राम अकाउंट ब्लॉक करने की भी अपील

याचिका में इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय को सौरभ दास के नाम से संचालित X और इंस्टाग्राम अकाउंट पर रोक लगाने का निर्देश देने की मांग भी शामिल है। याचिकाकर्ता ने यह भी कहा है कि यदि जांच में सौरभ दास विदेशी नागरिक पाए जाते हैं, तो उनके पासपोर्ट और आधार कार्ड को निरस्त करने के लिए नियमानुसार कार्रवाई की जाए।

सुनवाई में पेश किए गए पहचान और पते से जुड़े दस्तावेज

अदालत में सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने सौरभ दास की पहचान और निवास स्थान से संबंधित कुछ दस्तावेज प्रस्तुत किए। पीठ ने इन कागजातों का अवलोकन किया और उनमें दर्ज कुछ जानकारियों को लेकर स्पष्टीकरण भी मांगा। अब इस मामले में लगभग छह सप्ताह बाद अगली सुनवाई प्रस्तावित है।

अभी आरोपों पर अदालत की अंतिम मुहर नहीं

इस पूरे मामले में यह स्पष्ट रहना जरूरी है कि फिलहाल मद्रास हाईकोर्ट ने केवल नोटिस जारी किया है। सौरभ दास के वास्तविक नाम, नागरिकता या पारिवारिक पृष्ठभूमि को लेकर याचिका में किए गए दावे अभी न्यायिक रूप से प्रमाणित नहीं हुए हैं। आने वाली सुनवाई में संबंधित पक्षों के जवाब और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर मामले में आगे की कार्यवाही होगी।

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