

मध्य प्रदेश: सागर जिले से मानवता को झकझोर देने वाला मामला सामने आया है। यहां एक विधवा महिला ने अपने जीवन को दोबारा संभालने की कोशिश की, लेकिन समाज के कुछ लोगों की सोच ने उसकी खुशी को मुश्किलों में बदल दिया।महिला का “कसूर” सिर्फ इतना बताया जा रहा है कि उसने दूसरी शादी कर ली और समाज को भोज नहीं कराया।
कोरोना में पति की मौत, फिर परिवार की सहमति से दूसरी शादी
पीड़िता प्रियंका पटैल के अनुसार वर्ष 2021 में कोरोना काल के दौरान उसके पहले पति का निधन हो गया था। उसके साथ तीन साल की बच्ची भी है।लंबे संघर्ष के बाद करीब आठ महीने पहले परिवार की सहमति से उसने राजेंद्र पटैल से मंदिर में विवाह कर लिया और एक नई जिंदगी शुरू की।
समाज की शर्त बनी परेशानी, दावत नहीं तो मान्यता नहीं
प्रियंका का आरोप है कि ग्राम चितौरा के कुछ पंच और समाज के मुखिया लगातार दबाव बना रहे हैं कि शादी को मान्यता तभी मिलेगी जब पूरे समाज को कच्चा पक्का भोजन कराया जाएगा।इस शर्त ने एक खुशहाल शुरुआत को विवाद में बदल दिया है और परिवार पर मानसिक दबाव बढ़ा दिया है।
बच्ची को भी बनाया गया निशाना, खेलने से रोका गया
स्थिति यहां तक पहुंच गई है कि प्रियंका की मासूम बच्ची को गांव के अन्य बच्चों के साथ खेलने तक नहीं दिया जा रहा।परिवार को सामाजिक रूप से अलग-थलग कर दिया गया है, जिससे उनका जीवन और भी कठिन हो गया है।
मजदूरी से चल रहा घर, फिर भी जारी है दबाव
प्रियंका ने बताया कि उसका पति मजदूरी करके किसी तरह परिवार का पालन पोषण कर रहा है और उन्हें खुश रखने की कोशिश कर रहा है।लेकिन समाज के कुछ लोग उनकी खुशी से ज्यादा दावत और रस्मों को अहमियत दे रहे हैं।
कलेक्ट्रेट और एसपी से लगाई न्याय की गुहार
पीड़िता अब कलेक्ट्रेट पहुंचकर प्रशासन से न्याय की गुहार लगा रही है और एसपी से भी सुरक्षा और हस्तक्षेप की मांग की है।
सवाल समाज से, क्या रिश्तों की कीमत अब दावत से तय होगी
यह मामला सिर्फ एक परिवार का नहीं बल्कि उस सोच का आईना है जहां इंसानियत से ज्यादा रस्मों और दबाव को महत्व दिया जा रहा है।अब बड़ा सवाल यही है कि क्या समाज में किसी की नई शुरुआत को स्वीकार करने के लिए भी “दावत” अनिवार्य हो चुकी है।

































