रायपुर :  माना क्षेत्र स्थित नकटी गांव में सोमवार को 48 मकानों पर बेदखली की कार्रवाई की तैयारी के बीच तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई है। संभावित विरोध को देखते हुए मौके पर एक हजार से अधिक पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है। प्रशासन का दावा है कि संबंधित मकान सरकारी भूमि पर बनाए गए हैं, जबकि ग्रामीण इस दावे का विरोध कर रहे हैं।

सरकारी जमीन या पीएम आवास, विवाद की यही है जड़

पूरा मामला उन मकानों को लेकर है, जिन्हें लेकर प्रशासन का कहना है कि उनका निर्माण सरकारी भूमि पर अतिक्रमण कर किया गया है। दूसरी ओर ग्रामीणों का दावा है कि उन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आवास मिले हैं और वे वर्षों से यहां रह रहे हैं।

नोटिस के बाद बढ़ा विरोध

राजस्व विभाग ने संबंधित मकानों पर बेदखली के नोटिस चस्पा किए हैं। इसके बाद ग्रामीणों ने कार्रवाई का विरोध शुरू कर दिया। प्रशासन और ग्रामीणों के दावों के बीच गांव में तनाव का माहौल बना हुआ है।

ग्रामीणों ने उठाया बड़ा सवाल

ग्रामीणों का कहना है कि यदि जमीन वास्तव में सरकारी है तो प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत यहां मकानों का निर्माण कैसे हुआ। उनका दावा है कि वर्ष 2017 में योजना के तहत उन्हें आवास मिले थे और कई लोगों ने मकान निर्माण के लिए ऋण भी लिया था।

जमीन के स्वामित्व को लेकर भी दावा

ग्रामीणों के अनुसार, संबंधित भूमि चकबंदी की है और उसका स्वामित्व चार बुजुर्गों के नाम दर्ज है। उनका कहना है कि जमीन का सरकारी अधिग्रहण नहीं हुआ है, इसलिए बेदखली की कार्रवाई उचित नहीं है।

विधायक कॉलोनी बनाने की चर्चा

ग्रामीणों का आरोप है कि जिस भूमि पर कार्रवाई की जा रही है, वहां भविष्य में विधायक कॉलोनी विकसित करने की योजना है। उनका कहना है कि उन्होंने अपनी बात जनप्रतिनिधियों और सांसद तक पहुंचाई, लेकिन उनकी मांग पर कोई सुनवाई नहीं हुई।

अधिकारियों ने टिप्पणी से किया इनकार

मामले में प्रशासन की ओर से फिलहाल कोई विस्तृत बयान सामने नहीं आया है। बताया जा रहा है कि संबंधित अधिकारियों को इस विषय पर सार्वजनिक टिप्पणी नहीं करने के निर्देश दिए गए हैं।

पहले भी हो चुकी है बेदखली की कोशिश

ग्रामीणों का कहना है कि पिछले वर्ष भी प्रशासन ने अवैध कब्जे का हवाला देते हुए बेदखली नोटिस जारी किए थे। उस समय विरोध और जनप्रतिनिधियों के हस्तक्षेप के बाद कार्रवाई रोक दी गई थी। अब एक बार फिर बेदखली की प्रक्रिया शुरू होने से क्षेत्र में तनाव बढ़ गया है।

प्रशासन और ग्रामीणों के दावे अलग-अलग

फिलहाल प्रशासन सरकारी भूमि पर अतिक्रमण का दावा कर रहा है, जबकि ग्रामीण प्रधानमंत्री आवास योजना और भूमि स्वामित्व से जुड़े दस्तावेजों का हवाला देकर कार्रवाई का विरोध कर रहे हैं। मामले को लेकर आगे की स्थिति प्रशासनिक कार्रवाई और संबंधित दस्तावेजों की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

Leave a reply

Please enter your name here
Please enter your comment!