भोपाल :  ऐतिहासिक बड़े तालाब यानी भोज वेटलैंड की सुरक्षा को लेकर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने प्रशासन को कड़ी चेतावनी दी है। ट्रिब्यूनल ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि फुल टैंक लेवल (एफटीएल) से 50 मीटर के दायरे और निर्धारित बफर जोन में मौजूद शेष अवैध कब्जों को तीन सप्ताह के भीतर हटाया जाए। यदि तय समयसीमा में कार्रवाई पूरी नहीं होती है तो संबंधित एसडीएम और तहसीलदार को व्यक्तिगत रूप से जवाबदेह माना जाएगा। मामले की अगली सुनवाई 31 अगस्त को निर्धारित की गई है।

कलियासोत और केरवा जलाशयों के वैज्ञानिक सीमांकन पर भी जोर

सुनवाई के दौरान एनजीटी ने भोज वेटलैंड संरक्षण से जुड़े कलियासोत और केरवा जलाशयों का वैज्ञानिक सीमांकन शीघ्र पूरा करने के निर्देश दिए। प्रशासन को आदेश दिया गया है कि तीन सप्ताह के भीतर पूरी कार्रवाई कर विस्तृत रिपोर्ट और शपथपत्र ट्रिब्यूनल के समक्ष प्रस्तुत किया जाए। एनजीटी ने दो टूक कहा कि वेटलैंड संरक्षण नियमों की अनदेखी किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

117 चिन्हित अतिक्रमणों में से 72 अब भी बने चुनौती

भोपाल स्थित एनजीटी की सेंट्रल जोन बेंच में हुई सुनवाई में जानकारी दी गई कि सात गांवों में किए गए सर्वेक्षण के दौरान बड़े तालाब के 50 मीटर बफर क्षेत्र में कुल 117 अतिक्रमण चिन्हित किए गए थे। हालांकि कुछ कार्रवाई होने के बावजूद 72 अतिक्रमण अब भी बरकरार हैं।याचिकाकर्ता राशिद नूर खान की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता हर्षवर्धन तिवारी ने ट्रिब्यूनल को बताया कि पहले भी कई बार आदेश जारी किए जा चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद एफटीएल और वेटलैंड क्षेत्र में नए कब्जों की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं।

जल प्रदूषण और पर्यावरणीय खतरे पर भी उठे गंभीर सवाल

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं ने जलाशयों के अधूरे सीमांकन पर चिंता जताई। उनका कहना था कि वेटलैंड के आसपास कृषि गतिविधियों में इस्तेमाल होने वाले रासायनिक कीटनाशक जल स्रोतों को प्रभावित कर सकते हैं, जिससे पेयजल की गुणवत्ता पर भी असर पड़ने की आशंका है।इसके अलावा ट्रिब्यूनल को बताया गया कि वेटलैंड क्षेत्र में अवैध मड रेसिंग और वाहन रेसिंग जैसी गतिविधियों को रोकने के लिए एफआईआर दर्ज की गई हैं और निगरानी व्यवस्था को मजबूत किया गया है। करीब 150 हेक्टेयर क्षेत्र में प्रस्तावित बॉटनिकल गार्डन के संरक्षण और विकास का विषय भी सुनवाई के दौरान प्रमुखता से सामने आया।

बारिश और कानूनी अड़चनों का हवाला देकर प्रशासन ने मांगी राहत

प्रशासन की ओर से पेश पक्ष में बताया गया कि कई अवैध निर्माण और कब्जे पहले ही हटाए जा चुके हैं। हालांकि शेष मामलों में पर्याप्त पुलिस बल उपलब्ध न होने, कुछ प्रकरणों में हाई कोर्ट से अंतरिम स्थगन मिलने और लगातार बारिश के कारण अभियान प्रभावित हुआ है।इसी आधार पर प्रशासन ने ट्रिब्यूनल से अतिरिक्त समय देने की मांग की, ताकि मानसून समाप्त होने के बाद बाकी अतिक्रमणों को भी हटाया जा सके। हालांकि एनजीटी ने मामले की गंभीरता को देखते हुए कार्रवाई में तेजी लाने पर जोर दिया है।

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