

मध्य प्रदेश: डिंडौरी जिले से सरकारी शिक्षा व्यवस्था की चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। पड़रिया कला स्थित एकीकृत शासकीय हाई स्कूल में छात्र-छात्राएं ऐसे भवन में पढ़ाई करने को मजबूर हैं, जिसकी छत बारिश में लगातार टपकती है और दीवारें जर्जर हो चुकी हैं। हालात इतने खराब हैं कि बच्चों की पढ़ाई से ज्यादा उनकी सुरक्षा चिंता का विषय बन गई है।
101 विद्यार्थियों के सिर पर खतरा, फिर भी जारी है पढ़ाई
स्कूल में कक्षा 6वीं से 10वीं तक के करीब 101 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। इनमें डिंडौरी जिले के अलावा पड़ोसी अनूपपुर जिले के बच्चे भी शामिल हैं। बरसात के दिनों में कक्षाओं के भीतर पानी भरने और छत से रिसाव होने के बावजूद बच्चों को इसी भवन में बैठकर पढ़ाई करनी पड़ रही है।
हाई स्कूल का दर्जा मिला, लेकिन भवन आज तक नहीं बना
स्थानीय लोगों के अनुसार इस विद्यालय को वर्षों पहले मिडिल स्कूल से हाई स्कूल में उन्नत कर दिया गया था। हालांकि दर्जा बढ़ने के बाद भी नए भवन का निर्माण नहीं कराया गया। नतीजा यह है कि छात्र आज भी पुराने और जर्जर ढांचे में शिक्षा ग्रहण करने को मजबूर हैं।
बारिश से बचाव के लिए स्कूल प्रशासन ने छत पर प्लास्टिक की चादरें बिछा रखी हैं। इतना ही नहीं, कक्षाओं के भीतर भी प्लास्टिक तानकर किसी तरह शिक्षण कार्य जारी रखा जा रहा है। यह व्यवस्था समस्या का समाधान कम और जोखिम को टालने का प्रयास अधिक नजर आती है।
कभी भी हो सकता है बड़ा हादसा, डरे हुए हैं अभिभावक
भवन की मौजूदा स्थिति को देखते हुए स्थानीय अभिभावकों में गहरी चिंता है। उनका कहना है कि बच्चों की सुरक्षा को लेकर कई बार आवाज उठाई गई, लेकिन अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। अभिभावकों का डर है कि लगातार कमजोर हो रहे भवन में किसी भी समय बड़ा हादसा हो सकता है।
डिंडौरी में नया नहीं है यह संकट
जर्जर इमारतों में संचालित हो रहे स्कूलों का मामला डिंडौरी जिले में पहली बार सामने नहीं आया है। इससे पहले भी ऐसे कई मामले उजागर हो चुके हैं, जहां बच्चों को जोखिम भरे भवनों में पढ़ाई करनी पड़ी। बावजूद इसके हालात में अपेक्षित सुधार दिखाई नहीं दे रहा है।
आखिर कब मिलेगी सुरक्षित और बेहतर शिक्षा की गारंटी?
पड़रिया कला स्कूल की तस्वीरें एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर रही हैं कि शिक्षा के नाम पर बच्चों को आखिर कब तक खतरे के साये में बैठाया जाएगा। जब स्कूल की छत से पानी टपक रहा हो और दीवारों पर भरोसा न हो, तब सिर्फ पढ़ाई नहीं बल्कि बच्चों की जान भी दांव पर लगी होती है। ऐसे में जरूरत केवल आश्वासनों की नहीं, बल्कि तत्काल और ठोस कार्रवाई की है, ताकि विद्यार्थियों को सुरक्षित वातावरण में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके।











