
उत्तर प्रदेश : कांग्रेस में संगठनात्मक बदलाव के बीच लखनऊ स्थित पार्टी मुख्यालय में हुआ विवाद अब पार्टी नेतृत्व के लिए नई चुनौती बन गया है। पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अजय राय और महिला कांग्रेस नेता ममता चौधरी के समर्थकों के बीच हुई कथित धक्का-मुक्की के बाद मामला हाईकमान तक पहुंच गया है। विवाद को गंभीरता से लेते हुए ममता चौधरी को दिल्ली बुलाया गया है। वहीं, घटना की जांच के लिए पांच सदस्यीय समिति गठित की गई है, जिसे सात दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपनी है। इस घटनाक्रम ने उत्तर प्रदेश में कांग्रेस की अंदरूनी खींचतान को फिर चर्चा में ला दिया है।
प्रदेश मुख्यालय में कैसे शुरू हुआ विवाद?
यह घटना रविवार को उस समय हुई, जब आराधना मिश्रा मोना को उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष और इमरान मसूद को कार्यकारी अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभालनी थी। इसी कार्यक्रम के दौरान अजय राय अपने समर्थकों के साथ पार्टी कार्यालय पहुंचे। इसके बाद दोनों पक्षों के समर्थकों के बीच कहासुनी शुरू हो गई।देखते ही देखते विवाद बढ़ गया और स्थिति धक्का-मुक्की तक पहुंच गई। घटना के दौरान जूते-चप्पल फेंके जाने की खबरें भी सामने आईं। पार्टी कार्यालय में हुए इस घटनाक्रम से कांग्रेस की संगठनात्मक एकजुटता पर सवाल उठने लगे।
ममता चौधरी को दिल्ली बुलाया, पदाधिकारियों से भी मांगा जा सकता है जवाब
पार्टी मुख्यालय में हुए विवाद के बाद कांग्रेस नेतृत्व मामले को लेकर सक्रिय हो गया है। महिला कांग्रेस नेता ममता चौधरी को दिल्ली तलब किए जाने को इसी घटनाक्रम से जोड़कर देखा जा रहा है। पार्टी स्तर पर अनुशासनहीनता और सार्वजनिक रूप से संगठन की छवि प्रभावित होने के पहलू की भी समीक्षा की जा सकती है।इसके साथ ही प्रदेश कांग्रेस के पदाधिकारियों से घटना के संबंध में विस्तृत रिपोर्ट मांगे जाने की संभावना है। हालांकि, पूरे मामले में अंतिम कार्रवाई जांच समिति की रिपोर्ट और नेतृत्व के फैसले पर निर्भर करेगी।
पांच सदस्यीय समिति सात दिन में सौंपेगी रिपोर्ट
विवाद की पड़ताल के लिए कांग्रेस ने पांच सदस्यीय जांच समिति का गठन किया है। इसकी अध्यक्षता उत्तर प्रदेश कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष बृजलाल खाबरी करेंगे। समिति में अभिषेक दत्त, अब्दुल हन्नान, रवि वर्मा और शमीना शफीक को शामिल किया गया है।समिति को सात दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया है। जांच के दौरान घटना से जुड़े तथ्यों और संबंधित पक्षों की भूमिका की पड़ताल की जाएगी। रिपोर्ट सामने आने के बाद पार्टी नेतृत्व आगे की कार्रवाई पर निर्णय ले सकता है।
2027 के विधानसभा चुनाव से पहले संगठन के सामने बड़ी चुनौती
उत्तर प्रदेश में कांग्रेस आगामी विधानसभा चुनाव से पहले अपने संगठन को मजबूत करने और राजनीतिक आधार बढ़ाने की कोशिश कर रही है। ऐसे समय में पार्टी के भीतर नेताओं के समर्थकों के बीच टकराव सामने आना संगठन के लिए चुनौती बन सकता है।नए प्रदेश नेतृत्व के सामने कार्यकर्ताओं और नेताओं के बीच समन्वय स्थापित करने, अनुशासन बनाए रखने और आपसी मतभेदों को सुलझाने की जिम्मेदारी होगी। पार्टी मुख्यालय में हुआ विवाद इस बात की परीक्षा भी है कि कांग्रेस नेतृत्व आंतरिक असहमति को किस तरह संभालता है।अब सबकी नजर जांच समिति की रिपोर्ट और हाईकमान के अगले कदम पर है। यह फैसला तय करेगा कि विवाद के बाद पार्टी संगठन में क्या बदलाव होते हैं और उत्तर प्रदेश कांग्रेस अपनी एकजुटता को लेकर उठ रहे सवालों का सामना कैसे करती है।




















