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सूरजपुर: जिले में शैक्षणिक एवं स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित करने तथा अनियमितताओं पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए जिला प्रशासन द्वारा सख्त कदम उठाए जा रहे हैं। कलेक्टर  रेना जमील के निर्देशानुसार जिले में संचालित पैरामेडिकल शिक्षण संस्थानों के पंजीयन, मान्यता एवं निर्धारित मापदंडों की जांच की जा रही है। साथ ही बिना वैध चिकित्सकीय पंजीयन एवं आवश्यक योग्यता के उपचार करने वाले झोलाछाप चिकित्सकों तथा अवैध चिकित्सा केंद्रों के विरुद्ध भी नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

कलेक्टर श्रीमती जमील ने संबंधित अधिकारियों को निर्देशित करते हुए कहा है कि पैरामेडिकल शिक्षण संस्थानों के संचालन से संबंधित आवश्यक दस्तावेजों, पंजीयन, मान्यता एवं निर्धारित मापदंडों की गहन जांच सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा है कि विद्यार्थियों के शैक्षणिक भविष्य के साथ किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। संस्थानों के संचालन में अनियमितता पाए जाने पर संबंधितों के विरुद्ध नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाए।

गुरुकुल पैरामेडिकल इंस्टीट्यूट में अनियमितता मिलने पर की गई सीलिंग की कार्रवाई

गौरतलब है कि ग्राम तिलसिवां स्थित गुरुकुल पैरामेडिकल इंस्टीट्यूट में शिकायत को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर श्रीमती जमील के निर्देश पर संस्थान की जांच कराई गई। जांच में संस्थान का पंजीयन नहीं पाया गया। इस पर स्वास्थ्य एवं राजस्व विभाग की संयुक्त टीम द्वारा संस्थान को सील करने की कार्रवाई की गई।

झोलाछाप चिकित्सकों एवं अवैध चिकित्सा केंद्रों पर भी रहेगी सतत निगरानी

जिले में आम नागरिकों को सुरक्षित एवं गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से बिना आवश्यक चिकित्सकीय योग्यता एवं वैध पंजीयन के उपचार करने वाले व्यक्तियों तथा अवैध रूप से संचालित चिकित्सा केंद्रों की भी जांच की जाएगी। कलेक्टर श्रीमती जमील ने स्वास्थ्य विभाग को ऐसे मामलों में आवश्यक जांच कर वैधानिक प्रावधानों के अनुरूप कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
प्रशासन द्वारा अनधिकृत चिकित्सा गतिविधियों पर प्रभावी रोक लगाने तथा नागरिकों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ करने वालों के विरुद्ध नियमानुसार सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करने प्राथमिकता दिया जा रहा है।

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. प्रशांत सिंह ने बताया कि कलेक्टर के निर्देशानुसार जिले में संचालित संबंधित पैरामेडिकल शिक्षण संस्थानों के पंजीयन, मान्यता एवं निर्धारित मापदंडों की जांच की जाएगी। साथ ही बिना वैध पंजीयन एवं आवश्यक योग्यता के चिकित्सा कार्य करने वाले व्यक्तियों तथा अवैध चिकित्सा केंद्रों के विरुद्ध भी नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

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