

बिलासपुर : में शिक्षा के अधिकार (आरटीई) के तहत गरीब बच्चों के एडमिशन में हो रही देरी को लेकर छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने गंभीर रुख अपनाया है। कोर्ट ने इस मामले का स्वतः संज्ञान लेते हुए राज्य सरकार से स्पष्ट और समयबद्ध कार्ययोजना प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।राज्य शासन की ओर से कोर्ट को बताया गया कि पहले चरण की लॉटरी प्रक्रिया पूरी कर ली गई है, जिसमें लगभग 15 हजार छात्रों को सीटें आवंटित की गई हैं। इन छात्रों को 1 मई से 30 मई के बीच एडमिशन लेना होगा। इसके बाद दूसरे चरण की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
कोर्ट की सख्त टिप्पणी, बच्चों की पढ़ाई कब शुरू होगी
हाई कोर्ट ने प्रक्रिया में हो रही देरी पर कड़ी नाराजगी जताते हुए सवाल उठाया कि यदि एडमिशन प्रक्रिया अगस्त तक चलेगी तो बच्चों की पढ़ाई कब शुरू होगी। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि शिक्षा में देरी किसी भी हाल में स्वीकार्य नहीं है।कोर्ट ने शिक्षा विभाग से 7 मई से पहले पूरी प्रक्रिया को तेज करने और जल्द एडमिशन सुनिश्चित करने के लिए विस्तृत कार्ययोजना प्रस्तुत करने को कहा है।
आरटीई प्रक्रिया धीमी, हजारों आवेदन अभी लंबित
प्रदेश में नया शिक्षा सत्र 1 अप्रैल से शुरू हो चुका है, लेकिन आरटीई के तहत प्रवेश प्रक्रिया बेहद धीमी गति से चल रही है। अब तक 38,438 आवेदनों में से केवल 23,766 यानी लगभग 62 प्रतिशत की ही जांच पूरी हो पाई है। वहीं 14 हजार से अधिक आवेदन अभी भी लंबित हैं।कई जिलों में स्थिति और भी चिंताजनक है, जहां 10 प्रतिशत से भी कम जांच कार्य पूरा हुआ है। निर्धारित समय सीमा 31 मार्च थी, लेकिन उसके बाद भी प्रक्रिया अधूरी पड़ी हुई है।
अगस्त तक खिंच सकती है एडमिशन प्रक्रिया
वर्तमान समयसीमा को देखें तो पूरी प्रवेश प्रक्रिया लंबे समय तक खिंचने की संभावना है। पहले चरण में लॉटरी 13 से 17 अप्रैल के बीच हुई और एडमिशन 1 से 30 मई तक होना है।इसके बाद दूसरा चरण 8 जून से शुरू होगा, जिसमें नए स्कूलों का पंजीकरण किया जाएगा। इसके बाद 1 से 11 जुलाई तक छात्र पंजीयन और 27 से 31 जुलाई तक लॉटरी और आवंटन होगा। अंतिम चरण में 3 से 17 अगस्त तक एडमिशन प्रक्रिया चलेगी।इस पूरी व्यवस्था के चलते नया शिक्षा सत्र शुरू होने के कई महीने बाद तक बच्चों का दाखिला पूरा होने की आशंका जताई जा रही है।
सीटों के लिए भारी प्रतिस्पर्धा, शहरों में ज्यादा दबाव
राज्य के 6861 स्कूलों में कुल 21,698 सीटों के लिए 38,438 आवेदन प्राप्त हुए हैं। यानी औसतन हर सीट पर लगभग 1.77 दावेदार हैं, लेकिन यह आंकड़ा वास्तविक असंतुलन को पूरी तरह नहीं दर्शाता।रायपुर, दुर्ग और बिलासपुर जैसे बड़े शहरों में सीटों के लिए भारी प्रतिस्पर्धा देखने को मिल रही है, जबकि बस्तर जैसे कई जिलों में सीटें खाली रहने की स्थिति बन रही है।राज्य के 33 जिलों में से 11 जिले ऐसे हैं जहां सीटों से कम आवेदन आए हैं, जिससे संसाधनों के असमान वितरण की समस्या भी सामने आई है।
हाई कोर्ट का स्पष्ट संदेश, शिक्षा में देरी नहीं होगी स्वीकार
हाई कोर्ट की सख्ती के बाद अब शिक्षा विभाग पर दबाव बढ़ गया है कि वह आरटीई प्रक्रिया को तेज और पारदर्शी बनाए। कोर्ट ने साफ संकेत दिया है कि बच्चों के भविष्य से जुड़ी प्रक्रियाओं में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

































