दिल्ली :  मॉनसून के दौरान बारिश भले ही सामान्य से ज्यादा हुई, लेकिन हवा की गुणवत्ता में अपेक्षित सुधार नहीं दिखा। सरकारी आंकड़ों के विश्लेषण के अनुसार, जुलाई से सितंबर के बीच इस साल दिल्ली का औसत AQI 105 दर्ज किया गया, जो 2019 के बाद इस अवधि का सबसे अधिक स्तर है। इस दौरान PM10 का औसत स्तर भी 108 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर रहा।'सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर' यानी CREA के डेटा के विश्लेषण से सामने आया है कि मॉनसून के दौरान धूल और मोटे कण दिल्ली की हवा में प्रदूषण के प्रमुख कारणों में शामिल रहे।

84 दिन के मॉनसून में कैसा रहा AQI

जुलाई से सितंबर के बीच दिल्ली में करीब 84 दिनों तक मॉनसून का प्रभाव रहा। इस अवधि में केवल एक दिन AQI अच्छा रहा। 49 दिन हवा संतोषजनक, 39 दिन मध्यम और दो दिन खराब श्रेणी में रहे।तुलना करें तो जुलाई-सितंबर में औसत AQI 2025 और 2024 में 91, 2023 में 103, 2022 में 95, 2021 में 99 और 2020 में 88 रहा था। 2019 में यह आंकड़ा 106 था।

PM10 बना इस साल का प्रमुख प्रदूषक

इस मॉनसून की सबसे खास बात PM10 के स्तर में बढ़ोतरी रही। जुलाई से सितंबर के बीच PM10 की औसत मात्रा 108 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर दर्ज हुई। 2019 में यह आंकड़ा 109 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर था। यानी 2019 के बाद इस साल PM10 का औसत स्तर सबसे ज्यादा रहा।CREA के मनोज कुमार के मुताबिक, सामान्य से अधिक बारिश के बावजूद PM10 में बढ़ोतरी यह संकेत देती है कि धूल और मोटे कणों ने प्रदूषण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। बारिश के बीच आने वाले सूखे दौर और स्थानीय मौसम की परिस्थितियां भी प्रदूषण के जमा होने की वजह हो सकती हैं।

PM2.5 का स्तर भी रहा ऊंचा

इस साल जुलाई-सितंबर के दौरान PM2.5 का औसत स्तर 37 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर रहा। यह 2024 के बराबर है और हाल के वर्षों में ऊंचे स्तरों में शामिल है।हालांकि, 2023 में PM2.5 का औसत 39 और 2019 में 40 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर रहा था। वहीं 2025 में यह 32, 2022 में 36, 2021 में 37 और 2020 में 35 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर दर्ज किया गया था।

बारिश सामान्य से 16 फीसदी ज्यादा, फिर भी प्रदूषण में राहत सीमित

दिल्ली में इस साल मॉनसून 2 जुलाई को पहुंचा था, जबकि सामान्य तौर पर इसके 27 जून तक पहुंचने की उम्मीद रहती है। इस तरह मॉनसून का आगमन पांच दिन देर से हुआ। इसके बाद 23 सितंबर को मॉनसून की वापसी हो गई, जो सामान्य तारीख 25 सितंबर से दो दिन पहले थी।मॉनसून की अवधि कम रहने के बावजूद इस दौरान दिल्ली में 728.6 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। सामान्य बारिश 629.7 मिलीमीटर के मुकाबले यह करीब 16 फीसदी ज्यादा है।

बारिश के बाद फिर बढ़ गया PM2.5

सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट यानी CSE की अलग स्टडी में भी बारिश और प्रदूषण के बीच एक महत्वपूर्ण पैटर्न सामने आया। जून से अगस्त के दौरान छह बारिश के दौर का विश्लेषण करने पर पाया गया कि बारिश के समय PM2.5 में कमी आई, लेकिन यह राहत ज्यादा समय तक कायम नहीं रही।बारिश से पहले PM2.5 का औसत स्तर 40.6 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर था, जो बारिश के दौरान घटकर 32.7 हो गया। लेकिन बारिश के एक दिन बाद यह 36.2 और दो दिन बाद 45.1 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर तक पहुंच गया।यानी बारिश रुकने के बाद PM2.5 का स्तर फिर तेजी से बढ़ा और दो दिन बाद यह बारिश से पहले के स्तर से भी ऊपर चला गया।

भारी बारिश के बाद भी AQI अच्छा नहीं हुआ

CSE के विश्लेषण में जून से अगस्त के बीच 92 दिनों को देखा गया। इनमें केवल एक दिन AQI अच्छा रहा। 35 दिन हवा संतोषजनक, 53 दिन मध्यम और तीन दिन खराब श्रेणी में रहे।8 अगस्त को दिल्ली में सफदरजंग और पालम में औसतन 101.05 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई थी। इसके बावजूद उस दिन दिल्ली का AQI अच्छा नहीं बल्कि संतोषजनक श्रेणी में रहा।

बारिश ने प्रदूषण घटाया, लेकिन उत्सर्जन फिर बढ़ाता रहा स्तर

CSE के अनुसार, जून-अगस्त मॉनसून के दौरान दिल्ली में PM2.5 का औसत स्तर 40.2 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर रहा। अप्रैल-मई के दौरान यह 60.2 माइक्रोग्राम था। यानी मॉनसून के दौरान औसत PM2.5 में करीब 33 फीसदी की कमी आई।हालांकि, बारिश रुकने के बाद वाहनों, उद्योगों, कचरा जलाने और बिजली उत्पादन से होने वाले उत्सर्जन के कारण प्रदूषण फिर बढ़ता रहा।

सिर्फ धूल-कण नहीं, गैसीय प्रदूषक भी बने वजह

स्टडी में यह भी सामने आया कि मॉनसून के दौरान दिल्ली की प्रदूषण समस्या केवल PM2.5 और PM10 तक सीमित नहीं रही। पार्टिकुलेट प्रदूषण कम होने के बाद कई दिनों में गैसीय प्रदूषकों की भूमिका बढ़ी।मॉनसून के दौरान करीब 20 प्रतिशत समय जमीन के स्तर का ओजोन प्रमुख प्रदूषक रहा। वहीं 10 प्रतिशत समय नाइट्रोजन डाइऑक्साइड और सात प्रतिशत समय कार्बन मोनोऑक्साइड प्रमुख प्रदूषक रहे।इन आंकड़ों से पता चलता है कि बारिश दिल्ली की हवा में मौजूद धूल और अन्य कणों को कुछ समय के लिए कम कर सकती है, लेकिन वाहनों, उद्योगों और अन्य स्रोतों से लगातार होने वाला उत्सर्जन बारिश के बाद प्रदूषण का स्तर फिर बढ़ा देता है।

Leave a reply

Please enter your name here
Please enter your comment!