

छत्तीसगढ़ : बस्तर में लगातार हो रही बारिश और बढ़ते जलस्तर को देखते हुए प्रशासन ने पर्यटकों की सुरक्षा के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। मॉनसून के दौरान संभावित हादसों से बचाव के लिए प्रमुख पर्यटन स्थलों पर जलक्रीड़ाओं और साहसिक गतिविधियों को अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया है।धुड़मारास, तीरथगढ़, मांझीपाल, तिरिया और नेतानार जैसे क्षेत्रों में बंबू राफ्टिंग और कयाकिंग पर रोक लगा दी गई है। वहीं चित्रकोट जलप्रपात में इंद्रावती नदी के तेज बहाव को देखते हुए नौकायन भी फिलहाल बंद कर दिया गया है।
तेज बहाव के कारण लिया गया फैसला
बारिश के मौसम में इंद्रावती नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ जाता है, जिससे चित्रकोट जलप्रपात का बहाव बेहद तेज और खतरनाक हो जाता है। इसी कारण प्रशासन ने पर्यटकों के झरने के निचले हिस्से में जाने और बोटिंग करने पर पूरी तरह रोक लगा दी है।हालांकि, बारिश के दौरान चित्रकोट और तीरथगढ़ जलप्रपात अपने पूरे सौंदर्य के साथ पर्यटकों को आकर्षित कर रहे हैं। प्रतिदिन दोनों स्थलों पर बड़ी संख्या में लोग प्राकृतिक नजारे देखने पहुंच रहे हैं।
रोजगार प्रभावित, खेती की ओर लौटे युवक
कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान के मांझीपाल क्षेत्र में संचालित बंबू राफ्टिंग और कयाकिंग से जुड़े ईको समिति के सदस्यों का कहना है कि गतिविधियां बंद होने से उनकी आजीविका प्रभावित हुई है।समिति से जुड़े युवाओं के अनुसार फिलहाल वे रोजगार के लिए खेती का सहारा ले रहे हैं। कई पर्यटक जलक्रीड़ाओं का आनंद लेने पहुंचते हैं, लेकिन प्रतिबंध की जानकारी मिलने पर वापस लौट जाते हैं।
कांगेर घाटी की गुफाएं भी बंद
कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान प्रशासन ने वर्षा ऋतु के दौरान कोटमसर गुफा, कैलाश गुफा और अन्य गुफा स्थलों को भी पर्यटकों के लिए बंद कर दिया है।उद्यान प्रबंधन के अनुसार बारिश के समय गुफाओं में जलभराव, फिसलन और अन्य सुरक्षा संबंधी जोखिम बढ़ जाते हैं। इसी वजह से यह निर्णय लिया गया है।
जलप्रपात के निचले हिस्से में जाने पर मनाही
तीरथगढ़ जलप्रपात में भी सुरक्षा के मद्देनजर नीचे स्थित मंदिर तक पर्यटकों के जाने पर रोक लगा दी गई है। वहीं चित्रकोट में बोटिंग बंद होने के कारण झरने के निचले हिस्से में प्रवेश भी प्रतिबंधित कर दिया गया है।प्रशासन का कहना है कि यह फैसला केवल पर्यटकों की सुरक्षा को ध्यान में रखकर लिया गया है।
जलक्रीड़ाएं बंद होने से मायूस लौट रहे पर्यटक
बंबू राफ्टिंग और कयाकिंग जैसी गतिविधियां बंद होने से कई पर्यटक निराश हो रहे हैं। राजनांदगांव समेत विभिन्न जिलों से पहुंचे पर्यटकों ने बताया कि वे जलक्रीड़ा का आनंद लेने आए थे, लेकिन प्रतिबंध के कारण केवल जलप्रपात का नजारा देखकर वापस लौटना पड़ा।











