नई दिल्ली, 20 जुलाई । प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भारत के युवाओं के साहस, आत्मविश्वास और दृढ़ संकल्प की सराहना करते हुए सोमवार को एक संस्कृत सुभाषित साझा किया। उन्होंने कहा कि आज देश के युवा अपने साहस, संसाधनों के प्रभावी उपयोग और अथक परिश्रम के बल पर ऐतिहासिक सफलताएं हासिल कर रहे हैं, जो विकसित भारत की सबसे बड़ी शक्ति बनकर उभर रही हैं।

प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि

प्राप्यापदं न व्यथते कदाचिदुद्योगमनविचति चाप्रमत्तः।

दुःखं च काले सहते महात्मा धुरंधरस्तस्य जिताः सपत्नीः॥

अर्थात- जो महान व्यक्ति विपरीत परिस्थितियों में भी कभी विचलित नहीं होता, पूरी सावधानी और सजगता के साथ अपने कार्य में निरंतर जुटा रहता है तथा कठिन समय का धैर्यपूर्वक सामना करता है, उसके शत्रु पहले से ही पराजित माने जाते हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि आज भारत के युवा अपने साहस, आत्मविश्वास और कठिन परिश्रम के दम पर नई-नई उपलब्धियां हासिल कर रहे हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि युवाओं की यही ऊर्जा, संकल्प और कर्मठता विकसित भारत के निर्माण की सबसे बड़ी ताकत है।

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