बैंकिंग क्षेत्र में बड़े सुधार की दिशा में केंद्र सरकार ने आईडीबीआई बैंक की रणनीतिक बिक्री को मंजूरी दे दी है। आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने 14 अक्टूबर 2026 को बैंक की 60.72 प्रतिशत हिस्सेदारी 52,878 करोड़ रुपये में बेचने के प्रस्ताव को मंजूरी दी। कनाडा की फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स से जुड़ी कंपनी को रणनीतिक खरीदार के रूप में मंजूरी दी गई है। इस सौदे से बैंक के प्रबंधन और नियंत्रण में बदलाव का रास्ता खुलेगा।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आर्थिक सुधारों के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा, “The reform express will continue.” यानी आर्थिक सुधारों की रफ्तार जारी रहेगी। सरकार का कहना है कि रणनीतिक निवेश से बैंक की कार्यक्षमता बढ़ाने, आधुनिक तकनीक अपनाने और ग्राहक सेवाओं को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।

सरकार और एलआईसी बेचेंगी अपनी हिस्सेदारी

प्रस्तावित सौदे के तहत केंद्र सरकार अपनी 30.48 प्रतिशत और भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) अपनी 30.24 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचेगा। इस तरह कुल 60.72 प्रतिशत हिस्सेदारी की बिक्री होगी।

सौदा पूरा होने के बाद केंद्र सरकार के पास बैंक की 15 प्रतिशत और एलआईसी के पास 19 प्रतिशत हिस्सेदारी रह जाएगी। दोनों की संयुक्त हिस्सेदारी 34 प्रतिशत होगी। लेनदेन पूरा करने के लिए आवश्यक नियामकीय प्रक्रियाओं और शर्तों का पालन करना होगा।

सरकार इस कदम को बैंकिंग क्षेत्र में निजी पूंजी और विशेषज्ञता लाने की पहल के रूप में देख रही है। उम्मीद है कि रणनीतिक निवेश से बैंक की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता, तकनीकी ढांचे और परिचालन दक्षता को मजबूती मिलेगी।

संकट से उबरकर लाभ कमाने की स्थिति में पहुंचा बैंक

आईडीबीआई बैंक की वित्तीय स्थिति में पिछले कुछ वर्षों में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। सितंबर 2018 में बैंक का सकल गैर-निष्पादित परिसंपत्ति अनुपात 31.78 प्रतिशत था, जो मार्च 2026 में घटकर 2.32 प्रतिशत रह गया। इसी अवधि में शुद्ध गैर-निष्पादित परिसंपत्ति अनुपात 17.30 प्रतिशत से घटकर 0.15 प्रतिशत पर आ गया।

बैंक ने वित्त वर्ष 2025-26 में 9,513 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ दर्ज किया। वहीं, बैंक का पूंजी पर्याप्तता अनुपात मार्च 2018 के 6.22 प्रतिशत से बढ़कर मार्च 2026 में 26.65 प्रतिशत हो गया। ये आंकड़े बैंक की वित्तीय स्थिति में सुधार को दर्शाते हैं। सरकार का तर्क है कि बैंक को संकट से उबारने और उसकी वित्तीय स्थिति मजबूत करने के बाद अब रणनीतिक निवेश के माध्यम से विकास के अगले चरण की ओर बढ़ा जा सकता है।

जमाकर्ताओं के हितों पर भी रहेगा ध्यान

स्वामित्व में बदलाव के बाद भी आईडीबीआई बैंक भारतीय रिजर्व बैंक के नियामकीय दायरे में रहेगा। पात्र जमाओं पर जमा बीमा एवं ऋण गारंटी निगम के नियमों के तहत प्रति जमाकर्ता, प्रति बैंक अधिकतम पाँच लाख रुपये तक का बीमा संरक्षण लागू रहेगा।

बैंक जनधन योजना, बीमा योजनाओं, अटल पेंशन योजना और छोटे कारोबारियों को ऋण सहायता जैसी सेवाओं में भी अपनी भूमिका निभाता रहेगा। सरकार का कहना है कि रणनीतिक पुनर्गठन का उद्देश्य बैंक की सेवाओं को आधुनिक बनाना और उसकी दीर्घकालिक विकास क्षमता को बढ़ाना है।

आईडीबीआई बैंक की बिक्री पर अखिलेश यादव को निर्मला सीतारमण का जवाब

आईडीबीआई बैंक की हिस्सेदारी बिक्री के बीच वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) सरकार के कार्यकाल में ‘फोन बैंकिंग’ और ‘क्रोनी कैपिटलिज्म’ के कारण सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को नुकसान पहुँचा।

सामाजिक माध्यम एक्स पर अखिलेश यादव को संबोधित करते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि उनकी पार्टी ने वर्ष 2004 से यूपीए को समर्थन दिया था। उन्होंने सवाल उठाया कि जब उस समय बैंकिंग क्षेत्र की स्थिति खराब थी, तब सहयोगी दलों ने इस मुद्दे पर सवाल क्यों नहीं उठाए।

सीतारमण ने विशेष रूप से आईडीबीआई बैंक का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि यूपीए सरकार के कार्यकाल में बैंक ने कुछ ऐसे लोगों को ऋण दिए, जिनसे मूलधन और ब्याज की वसूली आज भी चुनौती बनी हुई है।

वित्त मंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) सरकार को बैंकिंग व्यवस्था में सुधार का श्रेय देते हुए कहा कि पारदर्शी नीतियों और पूँजी निवेश के माध्यम से आईडीबीआई बैंक सहित पूरे बैंकिंग तंत्र को मजबूत किया गया है।

विपक्ष पर तंज कसते हुए उन्होंने लिखा, “Why these crocodile tears?” यानी, ‘ये घड़ियाली आंसू क्यों ?’

आईडीबीआई बैंक की रणनीतिक बिक्री अब आर्थिक सुधारों के साथ-साथ राजनीतिक बहस का भी विषय बन गई है। सरकार इसे बैंक की वित्तीय मजबूती के बाद विकास का अगला चरण बता रही है। इस सौदे की दीर्घकालिक सफलता बैंक की वित्तीय स्थिरता, ग्राहक सेवाओं और जमाकर्ताओं के हितों की रक्षा के आधार पर आंकी जाएगी।

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