

रायपुर। छत्तीसगढ़ युवा कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष पद को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। संगठनात्मक चुनाव के बीच युवा नेता शैलेंद्र बंजारे का नाम सबसे मजबूत दावेदार के रूप में उभरकर सामने आया है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि उन्हें नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत और पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव का समर्थन मिल सकता है। यदि उनके नाम पर अंतिम मुहर लगती है तो इसे कांग्रेस के भीतर बदलते शक्ति संतुलन के तौर पर भी देखा जाएगा।
दो खेमों के बीच प्रतिष्ठा की लड़ाई
प्रदेश युवा कांग्रेस का चुनाव अब केवल संगठनात्मक प्रक्रिया तक सीमित नहीं रह गया है। इसे कांग्रेस के भीतर दो प्रमुख धड़ों के बीच शक्ति प्रदर्शन के रूप में देखा जा रहा है। एक ओर विधायक देवेंद्र यादव समर्थक खेमा सक्रिय है, जबकि दूसरी ओर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का गुट अब तक अपने पत्ते पूरी तरह नहीं खोल रहा है।
देवेंद्र यादव खेमे ने खेला बड़ा दांव
सूत्रों के मुताबिक, लंबे मंथन के बाद देवेंद्र यादव समर्थक नेताओं ने शैलेंद्र बंजारे के नाम पर सहमति बनाई है। बताया जा रहा है कि इस रणनीति के तहत पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का समर्थन जुटाने की भी कोशिश की गई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह फैसला आगामी विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखकर संगठन को मजबूत करने की रणनीति का हिस्सा हो सकता है।
सोशल इंजीनियरिंग पर भी फोकस
बंजारे के नाम को लेकर यह भी माना जा रहा है कि कांग्रेस सामाजिक समीकरणों को साधने की कोशिश कर रही है। जानकारों का कहना है कि पार्टी अलग-अलग वर्गों और समुदायों में अपनी पकड़ मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रही है, जिससे भविष्य के चुनावों में संगठनात्मक लाभ मिल सके।
रेफरल में सबसे आगे शैलेंद्र बंजारे
प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए हुए नामांकन में भी शैलेंद्र बंजारे सबसे आगे दिखाई दे रहे हैं। उन्हें 317 रेफरल मिले हैं। वहीं प्रशांत बोकड़े 224 रेफरल के साथ दूसरे स्थान पर हैं। इसके अलावा सोनू शर्मा, विनय शील, लोकेश वशिष्ठ और हनी बग्गा भी दावेदारों में शामिल हैं। मौजूदा आंकड़ों के आधार पर बंजारे की स्थिति सबसे मजबूत मानी जा रही है।
बीजेपी ने साधा निशाना, कांग्रेस ने किया पलटवार
युवा कांग्रेस के चुनावी माहौल पर भाजपा ने भी प्रतिक्रिया दी है। कैबिनेट मंत्री श्यामबिहारी जायसवाल ने कांग्रेस पर तंज कसते हुए इसे 'गुरु-चेले की राजनीति' बताया। वहीं कांग्रेस ने जवाब देते हुए कहा कि युवा कांग्रेस में लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत चुनाव हो रहे हैं, जबकि भाजपा में नियुक्तियां शीर्ष नेतृत्व के निर्णय से होती हैं।
2028 की राजनीति का संकेत माना जा रहा चुनाव
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि युवा कांग्रेस का यह चुनाव केवल प्रदेश अध्यक्ष चुनने तक सीमित नहीं है। इससे यह भी तय होगा कि कांग्रेस के भीतर किस गुट का प्रभाव अधिक मजबूत है। यही कारण है कि संगठनात्मक चुनाव को 2028 के विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी के अंदर शक्ति परीक्षण के रूप में भी देखा जा रहा है।











