राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य के अंतर्गत संचालित देवरी घड़ियाल संरक्षण केंद्र ने घड़ियाल संरक्षण अभियान में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। संरक्षण कार्यक्रम के तहत संग्रहित अंडों में से 54 घड़ियाल शावकों का सफलतापूर्वक जन्म हुआ है, जिसे वन विभाग ने संरक्षण प्रयासों की बड़ी सफलता बताया है।

बाबू सिंह घेर क्षेत्र से लाए गए थे अंडे

वन विभाग के अनुसार, बाबू सिंह घेर क्षेत्र से घड़ियाल के 95 अंडों का सावधानीपूर्वक संग्रहण किया गया था। इसके बाद सभी अंडों को सुरक्षित तरीके से देवरी स्थित हैचरी में स्थानांतरित कर वैज्ञानिक पद्धति से संरक्षित किया गया।निरंतर निगरानी और अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराने के बाद इनमें से 54 अंडों से घड़ियाल शावकों का सफल हैचिंग हुआ है।

नवजात शावकों पर रखी जा रही विशेष नजर

जन्म लेने वाले सभी घड़ियाल शावकों को फिलहाल क्वॉरेंटाइन में रखा गया है। यहां उनके स्वास्थ्य, पोषण और विकास की नियमित निगरानी की जा रही है। विशेषज्ञों की देखरेख में शावकों को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराया गया है, ताकि वे स्वस्थ रूप से विकसित हो सकें।

देवरी केंद्र में बढ़कर 153 हुई संख्या

नवजात शावकों के जुड़ने के बाद देवरी घड़ियाल संरक्षण केंद्र में कुल घड़ियाल शावकों की संख्या बढ़कर 153 हो गई है। इससे केंद्र की संरक्षण क्षमता और उपलब्धियां दोनों मजबूत हुई हैं।

चंबल नदी में बढ़ेगी घड़ियालों की आबादी

वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि घड़ियाल संरक्षण के लिए अंडों का वैज्ञानिक तरीके से संरक्षण, नियंत्रित वातावरण में हैचिंग और शावकों की व्यवस्थित देखभाल की जा रही है। इन प्रयासों का उद्देश्य भविष्य में चंबल नदी में घड़ियालों की संख्या बढ़ाना और इस दुर्लभ प्रजाति को सुरक्षित रखना है।

जैव विविधता संरक्षण की दिशा में अहम कदम

घड़ियाल दुनिया की सबसे दुर्लभ मगरमच्छ प्रजातियों में से एक माने जाते हैं और चंबल नदी उनका प्रमुख प्राकृतिक आवास है। ऐसे में शावकों का सफल जन्म न केवल संरक्षण कार्यक्रम की सफलता को दर्शाता है, बल्कि क्षेत्र की जैव विविधता को सुरक्षित रखने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इसी तरह के सतत संरक्षण प्रयास आने वाले वर्षों में घड़ियालों की घटती आबादी को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

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