

बिलासपुर : छत्तीसगढ़ के बिलासपुर से शिक्षकों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। हाईकोर्ट ने पूर्व सेवा गणना को लेकर लंबे समय से चल रहे विवाद में शिक्षकों के पक्ष में महत्वपूर्ण निर्णय दिया है। अदालत ने राज्य सरकार की अपील को खारिज कर दिया।
सिंगल बेंच के आदेश को मिली डबल बेंच से मजबूती
हाईकोर्ट की डबल बेंच ने पहले दिए गए सिंगल बेंच के आदेश को बरकरार रखा है। सिंगल बेंच ने राज्य सरकार को निर्देश दिया था कि पूर्व सेवा को पुरानी पेंशन योजना में शामिल करने पर विचार किया जाए और इसके लिए 120 दिन की समयसीमा भी तय की गई थी।
चिरमिरी के शिक्षक की याचिका से शुरू हुआ मामला
यह पूरा मामला चिरमिरी नगर निगम में पदस्थ शिक्षक राजेंद्र प्रसाद पटेल की याचिका से जुड़ा है। उन्होंने अदालत में मांग की थी कि उनकी पूर्व सेवा को पुरानी पेंशन योजना में जोड़ा जाए, क्योंकि संविलियन के बाद भी इसे नजरअंदाज किया जा रहा था।
सरकार की दलील कोर्ट ने नहीं मानी
राज्य सरकार ने अपनी अपील में कहा था कि संविलियन के समय तय शर्तों के आधार पर ही पेंशन का निर्धारण होना चाहिए। लेकिन कोर्ट ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया।
कोर्ट की अहम टिप्पणी: पूर्व सेवा को नजरअंदाज करना गलत
डबल बेंच ने स्पष्ट कहा कि जब संविलियन के दौरान पूर्व सेवा को मान्यता दी गई है, तो उसे पेंशन गणना से बाहर रखना उचित नहीं है। अदालत ने माना कि ऐसा करना न्यायसंगत नहीं होगा।
फैसले से शिक्षकों में राहत की उम्मीद
इस फैसले को शिक्षकों के लिए बड़ी जीत माना जा रहा है, जिससे पुरानी पेंशन से जुड़े कई मामलों पर भी असर पड़ सकता है।

































