Surajpur Double Murder Case: छत्तीसगढ़ के सूरजपुर में प्रधान आरक्षक की पत्नी और नाबालिग बेटी की जघन्य हत्या के मामले में फास्ट ट्रैक कोर्ट ने गुरुवार को बड़ा फैसला सुनाया। अदालत ने मामले में दोषी पाए गए तीन आरोपियों को मृत्युदंड और एक आरोपी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। कोर्ट ने मामले में वैज्ञानिक और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों को अहम माना।

सूरजपुर जिले में सामने आए चर्चित प्रधान आरक्षक की पत्नी और नाबालिग बेटी की जघन्य हत्या के मामले में गुरुवार को अदालत ने अपना फैसला सुना दिया। जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश (फास्ट ट्रैक कोर्ट) आनंद प्रकाश वारियाल की अदालत ने मामले की सुनवाई पूरी करने के बाद चारों आरोपियों को अलग-अलग धाराओं में दोषी ठहराया। इनमें कुलदीप साहू, फुल सिंह उर्फ रिंकू और चन्द्रकांत चौधरी को मृत्युदंड जबकि आर्यन विश्वकर्मा उर्फ गोल्डी को आजीवन कारावास की सजा दी गई है।

दरअसल यह मामला सूरजपुर थाना क्षेत्र से जुड़ा है। प्रधान आरक्षक की पत्नी और उनकी नाबालिग पुत्री की हत्या के बाद पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए आरोपियों के खिलाफ विभिन्न गंभीर धाराओं में अपराध दर्ज किया था। जांच के दौरान पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके खिलाफ पर्याप्त दस्तावेजी, वैज्ञानिक और परिस्थितिजन्य साक्ष्य जुटाए।

पुलिस ने वैज्ञानिक साक्ष्यों के साथ दाखिल किया था चालान

मामले की विवेचना तत्कालीन सूरजपुर थाना प्रभारी निरीक्षक विमलेश दुबे ने की। पुलिस ने घटनाक्रम से जुड़े साक्ष्यों को एकत्र करने के साथ आरोपियों की भूमिका की जांच की। इसके बाद बीएनएस, आर्म्स एक्ट, पॉक्सो एक्ट और छत्तीसगढ़ राज्य सुरक्षा अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत अभियोग पत्र न्यायालय में पेश किया गया।अभियोजन पक्ष की ओर से मामले की पैरवी विशेष लोक अभियोजक सुरेश कुमार शर्मा ने की। सुनवाई के दौरान अभियोजन ने न्यायालय के समक्ष वैज्ञानिक एवं परिस्थितिजन्य साक्ष्यों को प्रस्तुत किया। अदालत ने पूरे मामले के तथ्यों और उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद आरोपियों को दोषी माना।

तीन आरोपियों को मृत्युदंड

अदालत ने कुलदीप साहू पिता अशोक साहू, उम्र 25 वर्ष, को धारा 103(1), 3(5) बीएनएस के तहत मृत्युदंड और 25 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। इसके अलावा अन्य धाराओं में भी उसे अलग-अलग सजा और अर्थदंड से दंडित किया गया है। इसमें धारा 70(1) बीएनएस के तहत मृत्यु पर्यंत कारावास, धारा 331(8) बीएनएस के तहत आजीवन कारावास, धारा 238(ए) बीएनएस में तीन वर्ष का कठोर कारावास, धारा 61(2) बीएनएस में आजीवन कारावास तथा छत्तीसगढ़ राज्य सुरक्षा अधिनियम की धारा 14 में तीन वर्ष के कठोर कारावास की सजा शामिल है।इसी तरह फुल सिंह उर्फ रिंकू पिता स्व. गणपत सिंह, उम्र 28 वर्ष और चन्द्रकांत चौधरी पिता शिवप्रसाद चौधरी, उम्र 28 वर्ष को भी हत्या के आरोप में दोषी ठहराते हुए मृत्युदंड की सजा सुनाई गई है। दोनों पर 25-25 हजार रुपये अर्थदंड भी लगाया गया है। इसके अलावा विभिन्न धाराओं में आजीवन कारावास, कठोर कारावास और अर्थदंड की सजा भी सुनाई गई है।

चौथे आरोपी को उम्रकैद

मामले के चौथे आरोपी आर्यन विश्वकर्मा उर्फ गोल्डी पिता संजय विश्वकर्मा, उम्र 20 वर्ष को अदालत ने धारा 103(1), 3(5) बीएनएस सहित अन्य धाराओं में दोषी पाया। उसे आजीवन कारावास और 20 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई गई है। इसके साथ ही धारा 331(8) एवं 49 बीएनएस के तहत भी आजीवन कारावास और अन्य धाराओं में कठोर कारावास की सजा दी गई है।

इस बहुचर्चित हत्याकांड में अदालत का फैसला आने के बाद मामले में एक महत्वपूर्ण न्यायिक मोड़ आया है। कोर्ट ने उपलब्ध वैज्ञानिक, परिस्थितिजन्य और अन्य साक्ष्यों के आधार पर तीन आरोपियों को मृत्युदंड और एक आरोपी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।8 अक्टूबर 2026 को आए इस फैसले में चारों आरोपियों को गंभीर अपराध का दोषी ठहराया गया। तीन आरोपियों को सुनाई गई मृत्युदंड की सजा अब मामले में आगे की न्यायिक प्रक्रिया के अधीन होगी।

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