ग्वालियर। मध्य प्रदेश के ग्वालियर में 9 साल की मासूम बच्ची से दुष्कर्म और हत्या के मामले में मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है। हाई कोर्ट की डबल बेंच ने आरोपी कल्लू राठौड़ उर्फ कल्ला की फांसी की सजा को बदलकर आजीवन कारावास में परिवर्तित कर दिया है।अब दोषी को पूरी जिंदगी जेल में ही बितानी होगी। कोर्ट ने अपराध की गंभीरता, आरोपी के आपराधिक इतिहास और कानूनी प्रावधानों को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया।

POCSO कोर्ट ने सुनाई थी फांसी की सजा

यह मामला वर्ष 2023 का है, जब ग्वालियर के हजीरा थाना क्षेत्र में 9 साल की बच्ची के साथ दुष्कर्म के बाद उसकी हत्या कर दी गई थी।इस मामले में 12 दिसंबर 2023 को पॉक्सो कोर्ट ने आरोपी कल्लू राठौड़ को दोषी मानते हुए फांसी की सजा सुनाई थी। चूंकि फांसी की सजा की पुष्टि हाई कोर्ट से होना जरूरी थी, इसलिए मामला हाई कोर्ट भेजा गया।वहीं, आरोपी ने भी अपनी सजा के खिलाफ हाई कोर्ट में अपील दाखिल की थी और फांसी की सजा को चुनौती दी थी।

आइसक्रीम खिलाने का झांसा देकर ले गया था आरोपी

यह घटना ग्वालियर के हजीरा थाना क्षेत्र की है। जांच के अनुसार, मासूम बच्ची अपने घर के पास स्थित मंदिर परिसर में खेल रही थी।आरोप है कि उसी क्षेत्र में रहने वाले कल्लू राठौड़ ने बच्ची को बहलाया और आइसक्रीम खिलाने का लालच देकर अपने साथ ले गया। काफी देर तक बच्ची के घर नहीं लौटने पर परिजनों को चिंता हुई और उन्होंने उसकी तलाश शुरू कर दी।तलाशी के दौरान परिजनों की मुलाकात आरोपी कल्लू से भी हुई। उसने दावा किया कि बच्ची आइसक्रीम खाने के बाद घर की तरफ चली गई थी।

झाड़ियों में मिला था बच्ची का शव

परिजनों और पुलिस की तलाश के दौरान बच्ची का शव मां वैष्णोपुरम पोहा मिल के पास रेलवे क्रॉसिंग के नजदीक झाड़ियों में मिला था।जांच में सामने आया था कि आरोपी ने कथित रूप से बच्ची के साथ दुष्कर्म किया और पकड़े जाने के डर से उसकी हत्या कर दी। पुलिस ने मामले की जांच के दौरान सीसीटीवी फुटेज समेत अन्य सबूत जुटाए और आरोपी कल्लू राठौड़ को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।

हाई कोर्ट ने क्यों बदली फांसी की सजा

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की डबल बेंच ने मामले की सुनवाई के दौरान आरोपी के पुराने आपराधिक रिकॉर्ड की भी जांच की।कोर्ट को आरोपी के खिलाफ कोई ऐसा पुराना रिकॉर्ड नहीं मिला, जिससे यह साबित हो कि वह पहले भी इस तरह के अपराध में शामिल रहा हो। इसके अलावा अदालत के सामने ऐसा कोई ठोस प्रमाण नहीं आया, जिससे यह माना जाए कि आरोपी भविष्य में समाज के लिए लगातार गंभीर खतरा बना रहेगा।इन्हीं परिस्थितियों को देखते हुए हाई कोर्ट ने इस मामले को ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ श्रेणी में नहीं माना। अदालत ने कहा कि अपराध बेहद गंभीर है, लेकिन उपलब्ध तथ्यों के आधार पर फांसी की सजा के स्थान पर आजीवन कारावास उचित होगा।

अब जीवनभर जेल में रहेगा दोषी

हाई कोर्ट के फैसले के बाद कल्लू राठौड़ की फांसी की सजा खत्म हो गई है और उसे आजीवन कारावास की सजा भुगतनी होगी।इस फैसले के बाद एक बार फिर यह चर्चा तेज हो गई है कि गंभीर अपराधों में फांसी की सजा तय करने के लिए अदालतें किन परिस्थितियों को आधार बनाती हैं। कोर्ट ने इस मामले में अपराध की गंभीरता के साथ-साथ आरोपी के भविष्य के आचरण और कानूनी मानकों को भी ध्यान में रखा है।

Leave a reply

Please enter your name here
Please enter your comment!