रायपुर: नवा रायपुर स्थित मंत्रालय महानदी भवन की कैंटीन व्यवस्था अब बदलने जा रही है। वर्षों से बिना निविदा के चल रही पुरानी व्यवस्था को खत्म कर सरकार अब नई टेंडर आधारित प्रणाली लागू करने की तैयारी में है। इस फैसले ने मंत्रालय के कर्मचारियों के बीच नई चर्चा और चिंता दोनों पैदा कर दी है।

इंडियन कॉफी हाउस का लंबा कार्यकाल खत्म, अब आएगी नई एजेंसी

अब तक कैंटीन का संचालन इंडियन कॉफी हाउस के जरिए किया जा रहा था, जिसे हर महीने सरकार की ओर से सब्सिडी भी मिलती थी। इसी वजह से यहां मिलने वाले खाने-पीने के सामान बाजार की तुलना में काफी सस्ते रहते थे। लेकिन अब इस व्यवस्था को बदलकर निविदा के जरिए नई एजेंसी को जिम्मेदारी दी जा रही है।

टेंडर सिस्टम लागू, लागत के आधार पर तय होंगी कीमतें

नई व्यवस्था के तहत कैंटीन पूरी तरह लागत आधारित मॉडल पर चलेगी। यानी अब खाने-पीने की चीजों की कीमतें उनकी वास्तविक लागत के हिसाब से तय की जाएंगी। इससे कर्मचारियों को महंगे भोजन का सामना करना पड़ सकता है, जिसकी आशंका पहले से जताई जा रही है।

कर्मचारी संघ की चिंता बढ़ी, सस्ती सुविधा खत्म होने का डर

मंत्रालयीन कर्मचारी संघ ने इस बदलाव पर चिंता जताई है। उनका मानना है कि नई प्रणाली लागू होने के बाद कैंटीन में मिलने वाला भोजन महंगा हो सकता है, जिससे कर्मचारियों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा।

महिला स्व-सहायता समूह को जिम्मेदारी देने की मांग तेज

इसी बीच कर्मचारी संघ ने मुख्य सचिव को पत्र लिखकर एक वैकल्पिक सुझाव भी दिया है। उन्होंने मांग की है कि कैंटीन का संचालन निजी एजेंसी को देने के बजाय महिला स्व-सहायता समूहों को सौंपा जाए। उनका तर्क है कि प्रदेश के कई सरकारी कार्यालयों में ऐसे समूह सफलतापूर्वक कैंटीन चला रहे हैं, जिससे सस्ती और गुणवत्तापूर्ण सुविधा बनी रहती है।

नई व्यवस्था पर सबकी नजर, क्या मिलेगा सस्ता और बेहतर विकल्प

अब यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार कर्मचारियों की मांग पर कितना ध्यान देती है और नई कैंटीन व्यवस्था किस दिशा में जाती है। यह बदलाव केवल एक प्रशासनिक निर्णय नहीं, बल्कि कर्मचारियों की रोजमर्रा की सुविधा से जुड़ा अहम मुद्दा बन चुका है।

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