मध्य प्रदेश:  भिंड जिले के लहार सिविल अस्पताल से स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़े करने वाला मामला सामने आया है। सड़क दुर्घटना में घायल एक युवक को एम्बुलेंस से अस्पताल तो पहुंचाया गया, लेकिन उसे तत्काल इमरजेंसी वार्ड में भर्ती करने के बजाय अस्पताल परिसर की पार्किंग में ही छोड़ दिया गया। आरोप है कि युवक करीब आधे घंटे तक बारिश के बीच दर्द से तड़पता रहा।

वीडियो बनने के बाद हरकत में आया अस्पताल प्रशासन

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, घायल युवक खुले आसमान के नीचे मदद का इंतजार करता रहा। जब वहां मौजूद लोगों ने घटना का वीडियो बनाना शुरू किया और अस्पताल प्रशासन का विरोध किया, तब स्वास्थ्यकर्मी सक्रिय हुए और मरीज को इलाज के लिए भीतर ले जाया गया। घटना का वीडियो सामने आने के बाद मामला चर्चा का विषय बन गया।

सफाई में अस्पताल प्रबंधन ने कही यह बात

विवाद बढ़ने पर अस्पताल प्रबंधन ने अपनी ओर से सफाई दी। बीएमओ का कहना है कि एम्बुलेंस कर्मियों ने मरीज के पहुंचने की सूचना अस्पताल स्टाफ को नहीं दी थी। उनके अनुसार, जानकारी मिलते ही युवक को वार्ड में भर्ती कर उपचार शुरू कर दिया गया।

रिकॉर्ड और वीडियो में दिखा समय का अंतर

हालांकि अस्पताल के दस्तावेजों ने प्रबंधन के दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। रिकॉर्ड में मरीज को शाम 4:12 बजे भर्ती दिखाया गया है, जबकि शाम 4:35 बजे वायरल वीडियो में वह अस्पताल परिसर के बाहर ही पड़ा दिखाई देता है। रिकॉर्ड और वीडियो के समय में अंतर सामने आने के बाद स्थानीय लोगों ने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग उठाई है।

डॉक्टर की दलील भी बनी चर्चा का विषय

बीएमओ डॉ. विजय शर्मा ने कहा कि घायल युवक शराब के नशे में था और एम्बुलेंस कर्मियों ने उसे बाहर छोड़ दिया था, जो उनकी गलती थी। उन्होंने दावा किया कि बाद में अस्पताल स्टाफ ने युवक को वार्ड में भर्ती कर आवश्यक इलाज उपलब्ध कराया।

स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल

घटना के बाद अस्पताल की कार्यप्रणाली और आपातकालीन सेवाओं को लेकर लोगों में नाराजगी है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि हादसे में घायल मरीज को तत्काल चिकित्सा सहायता मिलनी चाहिए थी। अब पूरे मामले में जिम्मेदारी तय करने और लापरवाही बरतने वालों पर कार्रवाई की मांग तेज हो गई है।

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