

उत्तर प्रदेश : अलीगढ़ स्थित धर्म समाज डिग्री कॉलेज में लंबे समय से बंदरों का आतंक बना हुआ था। स्थिति ऐसी हो गई थी कि छात्र और स्टाफ लगातार परेशानी में थे। कई बार बंदर क्लासरूम के बाहर पहुंच जाते थे और खाने पीने की चीजें भी छीन लेते थे, जिससे सुरक्षा और अनुशासन दोनों प्रभावित हो रहे थे।
समाधान के तौर पर अपनाया गया अनोखा प्रयोग
बढ़ती समस्या से निपटने के लिए कॉलेज प्रशासन ने एक अलग ही रास्ता चुना। परिसर में गोलू नाम के लंगूर को लाने का निर्णय लिया गया। माना गया कि लंगूर की मौजूदगी से बंदर इलाके से दूर रहेंगे और परिसर में सामान्य स्थिति लौट सकेगी। इस व्यवस्था के लिए लंगूर के मालिक को हर महीने 12 हजार रुपये दिए जा रहे थे।
गोलू की मौजूदगी से बदला माहौल
गोलू को रोजाना तय समय पर कॉलेज लाया जाता था और वह पूरे दिन परिसर में रहता था। उसकी मौजूदगी से बंदरों के झुंड वहां से हटने लगे। छात्रों का कहना था कि गोलू के आने के बाद कैंपस का माहौल पहले से ज्यादा सुरक्षित महसूस होने लगा। कई छात्र उसे देखने और उसके आसपास फोटो लेने के लिए भी उत्साहित रहते थे।
सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने से मचा हड़कंप
यह पूरा मामला तब सुर्खियों में आया जब किसी ने इसका वीडियो सोशल मीडिया पर साझा कर दिया। वीडियो में लंगूर को रस्सी से बांधा हुआ देखा गया, जिसके बाद यह मामला तेजी से फैल गया और चर्चा का विषय बन गया।
वन विभाग की कार्रवाई और लंगूर की आजादी
वीडियो सामने आने के बाद वन विभाग ने तुरंत संज्ञान लिया। टीम कॉलेज पहुंची और जांच के बाद पाया कि जंगली जीव को इस तरह बांधकर रखना नियमों के खिलाफ है। इसके बाद लंगूर को मौके पर ही रस्सी से आजाद कराया गया। अधिकारियों ने कॉलेज प्रशासन को इस तरह की व्यवस्था पर चेतावनी भी दी।
अब उठे नए सवाल, समाधान की तलाश जारी
इस घटना के बाद कॉलेज परिसर में यह मामला लगातार चर्चा में बना हुआ है। एक तरफ छात्रों और स्टाफ को बंदरों से राहत मिली थी, वहीं दूसरी ओर वन्यजीवों के उपयोग और उनके संरक्षण से जुड़े नियमों पर सवाल खड़े हो गए हैं। अब प्रशासन के सामने चुनौती है कि बंदरों की समस्या का कोई ऐसा समाधान खोजा जाए जो सुरक्षित भी हो और कानूनी रूप से सही भी।

































