सूरजपुर:  सूरजपुर जिले के ग्राम केशवपुर के यादवपारा स्थित तालाब में मगरमच्छ दिखाई देने की सूचना पर वन विभाग द्वारा की गई जांच में यह तथ्य सामने आया कि सोशल मीडिया पर प्रसारित फोटो वास्तविक नहीं थी, बल्कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (ए.आई.) तकनीक की सहायता से तैयार की गई भ्रामक तस्वीर थी। 23 जुलाई 2026 को ग्राम पंचायत केशवपुर एवं ग्रामवासियों द्वारा वन विभाग को सूचना दी गई थी कि गांव के तालाब में मगरमच्छ देखा गया है। चूंकि मगरमच्छ वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के अंतर्गत संरक्षित अनुसूची -I वन्यजीव है, अतः सूचना को गंभीरता से लेते हुए वन विभाग द्वारा तत्काल अधिकारियों एवं कर्मचारियों को साथ लेकर मौके पर तालाब का निरीक्षण किया गया तथा वरिष्ठ अधिकारियों को अवगत कराते हुए रेस्क्यू दल को भी सक्रिय किया गया।

जांच एवं पूछताछ के दौरान संबंधित व्यक्ति ब्रजलाल यादव, पिता रूपनारायण यादव, निवासी ग्राम केशवपुर, थाना रामानुजनगर, जिला सूरजपुर द्वारा यह स्वीकार किया गया कि उसने अपने मोबाइल पर ए.आई. तकनीक की सहायता से तालाब की वास्तविक फोटो में मगरमच्छ का चित्र जोड़कर उक्त फोटो तैयार की तथा विभिन्न व्हाट्सएप समूहों में साझा की। इस भ्रामक एवं असत्य सूचना के कारण ग्रामवासियों एवं आसपास के क्षेत्र में भय एवं भ्रम का वातावरण निर्मित हुआ तथा वन विभाग को रेस्क्यू दल सहित शासकीय संसाधनों का अनावश्यक उपयोग करते हुए मौके पर जांच एवं खोजबीन करनी पड़ी, जिससे विभागीय कार्य भी प्रभावित हुए।
 

उक्त तथ्यों के आधार पर वन विभाग द्वारा संबंधित व्यक्ति के विरुद्ध वैधानिक कार्रवाई प्रारंभ करते हुए पुलिस थाना रामानुजनगर में प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज कराने हेतु प्रतिवेदन प्रस्तुत किया गया, जिसके उपरांत पुलिस द्वारा नियमानुसार गिरफ्तारी की कार्रवाई भी की गई है तथा प्रकरण में अग्रिम वैधानिक विवेचना जारी है। वन विभाग ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अथवा अन्य डिजिटल माध्यमों से तैयार भ्रामक फोटो, वीडियो अथवा असत्य सूचनाओं का निर्माण अथवा प्रसार न करें, क्योंकि इस प्रकार की भ्रामक जानकारी से जनसामान्य में अनावश्यक भय एवं अफवाह फैलती है, शांति व्यवस्था प्रभावित होती है तथा शासकीय संसाधनों का अनावश्यक उपयोग होता है। विभाग ने यह भी अपील की कि यदि किसी क्षेत्र में वास्तव में कोई वन्यजीव दिखाई दे, तो उसकी सूचना तत्काल निकटतम वन कार्यालय अथवा वन विभाग के अधिकारियों को दें तथा किसी भी अपुष्ट सूचना या फोटो को सोशल मीडिया पर साझा करने से बचें।

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