नई दिल्ली:  वैश्विक राजनीति में हलचल तेज है, क्योंकि अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव खत्म होने का नाम नहीं ले रहा। दो महीने से ज्यादा समय बीत जाने के बाद भी दोनों देशों के बीच किसी ठोस समझौते पर सहमति नहीं बन पाई है। हालात ऐसे हैं कि बातचीत और चेतावनी साथ साथ चल रही हैं।

ईरान का नया प्रस्ताव: पहले युद्ध रोको, फिर होगी परमाणु पर बात

ईरान की ओर से हाल ही में एक नया प्रस्ताव सामने रखा गया, जिसमें तीन अहम बिंदु शामिल थे।
पहली शर्त थी कि तत्काल युद्धविराम किया जाए और अमेरिका तथा इजराइल भविष्य में हमला न करने की गारंटी दें।
दूसरा मुद्दा होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर था, जहां ईरान ने संकेत दिया कि वह इसे खोलने को तैयार है, बशर्ते अमेरिका नाकेबंदी हटाए।
तीसरी और सबसे अहम बात यह रही कि ईरान ने फिलहाल परमाणु कार्यक्रम पर चर्चा को टालने की बात कही, ताकि पहले माहौल सामान्य हो सके।

ट्रंप का सख्त रुख: ‘फिर से हमला कर सकते हैं’

डोनाल्ड ट्रंप ने इस प्रस्ताव पर संतोष नहीं जताया। फ्लोरिडा में पत्रकारों से बातचीत करते हुए उन्होंने साफ संकेत दिया कि जरूरत पड़ी तो अमेरिका दोबारा सैन्य कार्रवाई कर सकता है।

ट्रंप ने यह भी कहा कि होर्मुज क्षेत्र में नाकेबंदी को चुनौती नहीं मिल रही और इसे उन्होंने ‘दोस्ताना स्थिति’ बताया, जिससे यह साफ होता है कि अमेरिका अपनी रणनीति में बदलाव के मूड में नहीं है।

परमाणु मुद्दा बना असली अड़ंगा: समझौता क्यों अटका

ईरान की ओर से यह भी मांग रखी गई कि शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए यूरेनियम समृद्ध करना उसका अधिकार माना जाए। यही मुद्दा लंबे समय से दोनों देशों के बीच सबसे बड़ा विवाद बना हुआ है।

हालांकि, इस बार ईरान ने इसे बाद में चर्चा के लिए टालने की बात कही, जिसे एक नरम रुख के तौर पर देखा जा रहा है। इसके बावजूद अमेरिका की असहमति बनी हुई है।

प्रस्ताव पर ट्रंप का जवाब: अभी भी असंतोष बरकरार

ट्रंप ने स्पष्ट किया कि उन्हें ईरान का प्रस्ताव संतोषजनक नहीं लगा। उन्होंने कहा कि ईरान ऐसी शर्तें रख रहा है, जिन्हें स्वीकार करना संभव नहीं है। हालांकि उन्होंने यह भी संकेत दिया कि प्रस्ताव की समीक्षा की जाएगी।

उनके बयान से साफ है कि अमेरिका फिलहाल दबाव की रणनीति पर कायम है और किसी भी तरह की जल्दबाजी में समझौता करने के पक्ष में नहीं है।

आगे क्या: बातचीत या बढ़ेगा टकराव?

मौजूदा हालात में यह साफ है कि दोनों देशों के बीच अविश्वास अभी भी गहरा है। एक तरफ ईरान समझौते की दिशा में कदम बढ़ाता दिख रहा है, वहीं अमेरिका सख्त रुख अपनाए हुए है।

अब पूरी दुनिया की नजर इस बात पर टिकी है कि क्या कूटनीति इस टकराव को खत्म कर पाएगी या फिर हालात और ज्यादा गंभीर रूप ले सकते हैं।

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