
नई दिल्ली। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने अंतरिक्ष के क्षेत्र में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। शुक्रवार, 30 अक्टूबर की रात 11 बजकर 51 मिनट पर आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से नेविगेशन सैटेलाइट NVS-03 का सफल प्रक्षेपण किया गया। GSLV-F18 रॉकेट के जरिए भेजे गए इस उपग्रह को उड़ान के करीब 18 मिनट बाद निर्धारित कक्षा में स्थापित कर दिया गया। मिशन के तीनों चरणों ने सफलतापूर्वक काम किया।
इस लॉन्चिंग को भारत के स्वदेशी नेविगेशन सिस्टम NavIC के विस्तार की दिशा में अहम उपलब्धि माना जा रहा है। नए उपग्रह में भारत में विकसित परमाणु घड़ी और L1 सिग्नल जैसी तकनीक शामिल की गई है। इससे देश में लोकेशन आधारित सेवाओं, मैपिंग और नेविगेशन की सटीकता बेहतर होने की उम्मीद है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैज्ञानिकों को दी बधाई
NVS-03 के सफल प्रक्षेपण के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसरो के वैज्ञानिकों और इंजीनियरों को बधाई दी। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी प्रतिक्रिया साझा करते हुए GSLV-F18 मिशन की सफलता को देश के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।
प्रधानमंत्री ने कहा कि यह मिशन भारत की स्वदेशी उपग्रह नेविगेशन प्रणाली NavIC को और मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उनके मुताबिक, NVS-03 में शामिल आधुनिक तकनीक देश को महत्वपूर्ण क्षेत्रों में आत्मनिर्भर बनाने के प्रयासों को नई गति देगी। इससे आम नागरिकों को बेहतर नेविगेशन सेवाएं उपलब्ध कराने में भी मदद मिलेगी।
NVS-03 सैटेलाइट की क्या है खासियत?
NVS-03 भारत की दूसरी पीढ़ी के NavIC उपग्रहों की श्रृंखला का हिस्सा है। इसका उद्देश्य देश की स्वदेशी नेविगेशन व्यवस्था की निरंतरता बनाए रखना और उसकी तकनीकी क्षमताओं को बेहतर करना है।
इस उपग्रह की कुछ प्रमुख विशेषताएं इस प्रकार हैं:
- स्वदेशी परमाणु घड़ी: इसमें भारत में विकसित परमाणु घड़ी लगाई गई है, जो बेहद सटीक समय की जानकारी उपलब्ध कराने में मदद करती है।
- L1 सिग्नल: इस तकनीक से नेविगेशन सेवाओं को बेहतर बनाने और विभिन्न उपयोगकर्ता उपकरणों के साथ अनुकूलता बढ़ाने में मदद मिलेगी।
- बेहतर लोकेशन सुविधा: उपग्रह से प्राप्त सिग्नल की मदद से स्थान और दिशा की जानकारी अधिक प्रभावी तरीके से उपलब्ध कराई जा सकेगी।
- NavIC नेटवर्क को मजबूती: इस मिशन से भारत की अपनी उपग्रह आधारित नेविगेशन व्यवस्था को आगे बढ़ाने में सहायता मिलेगी।
परमाणु घड़ी किसी भी नेविगेशन सैटेलाइट का बेहद महत्वपूर्ण हिस्सा होती है। उपग्रह से मिलने वाले सिग्नल के समय का सटीक आकलन करके ही रिसीवर किसी स्थान की दूरी और उसकी लोकेशन निर्धारित कर पाता है।
क्या है NavIC और कैसे करता है काम?
NavIC का पूरा नाम Navigation with Indian Constellation है। यह भारत की अपनी क्षेत्रीय उपग्रह नेविगेशन प्रणाली है, जिसे अमेरिका के GPS की तर्ज पर विकसित किया गया है।
इस तकनीक के जरिए किसी व्यक्ति, वाहन या अन्य वस्तु की भौगोलिक स्थिति, दिशा और रास्ते की जानकारी हासिल की जा सकती है। NavIC का कवरेज भारत और इसकी सीमाओं से करीब 1,500 किलोमीटर तक के क्षेत्र में उपलब्ध कराने के लिए तैयार किया गया है।
इस प्रणाली का इस्तेमाल परिवहन, समुद्री गतिविधियों, आपदा प्रबंधन, सर्वेक्षण और सैन्य जरूरतों सहित कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में किया जा सकता है।
सेना के लिए भी महत्वपूर्ण साबित होगा NavIC
भारत की स्वदेशी नेविगेशन प्रणाली मजबूत होने से रणनीतिक और रक्षा क्षेत्र में भी कई फायदे मिल सकते हैं। सेना को सीमावर्ती क्षेत्रों में अपनी स्थिति निर्धारित करने, सैन्य वाहनों की निगरानी और ऑपरेशन के दौरान सटीक दिशा संबंधी जानकारी हासिल करने में सहायता मिल सकती है।
फिलहाल दुनिया के अलग-अलग देश अपनी नेविगेशन प्रणालियों का इस्तेमाल करते हैं। अमेरिका के पास GPS, रूस के पास GLONASS, चीन के पास BeiDou और यूरोप के पास Galileo सिस्टम है। ऐसे में NavIC भारत को अपनी स्वतंत्र नेविगेशन क्षमता उपलब्ध कराता है।
इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि महत्वपूर्ण सेवाओं और रणनीतिक गतिविधियों के लिए भारत की विदेशी नेविगेशन प्रणालियों पर निर्भरता कम होगी। NVS-03 की सफल लॉन्चिंग इसी दिशा में भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम की एक अहम उपलब्धि है।




















