नई दिल्ली: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की विपक्ष की मांग के बीच लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने गुरुवार को स्पष्ट किया कि यदि विपक्ष इस संबंध में नया प्रस्ताव लाता है, तो निर्धारित नियमों और प्रक्रियाओं के अनुसार ही उस पर विचार किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा।

दरअसल, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और चुनावी प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों को लेकर विपक्षी दल लगातार चुनाव आयोग पर सवाल उठा रहे हैं। विपक्ष ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर आयोग की शक्तियों का कथित तौर पर एकतरफा और मनमाने ढंग से इस्तेमाल करने के आरोप लगाए हैं।

CEC को हटाने के लिए पहले से तय है प्रक्रिया

12वें ब्रिक्स संसदीय मंच से पहले आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने के प्रस्ताव पर विचार करने की प्रक्रिया पहले से निर्धारित है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि विपक्ष ऐसा कोई प्रस्ताव लाता है, तो नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।बिरला ने कहा कि जिस तरह न्यायाधीशों को पद से हटाने के लिए महाभियोग की निर्धारित प्रक्रिया होती है, उसी तरह मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने के मामले में भी तय प्रक्रिया का पालन किया जाता है।

लोकतंत्र में सभी को विचार रखने का अधिकार

लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि लोकतंत्र में प्रत्येक व्यक्ति को अपनी बात और विचार रखने का अधिकार है। संसद के सत्रावसान से जुड़े सवाल पर उन्होंने कहा कि इसके लिए संविधान में निर्धारित प्रक्रिया है और इसमें लोकसभा अध्यक्ष की भूमिका नहीं होती। यह प्रक्रिया सरकार की ओर से राष्ट्रपति को भेजी जाने वाली अनुशंसा के माध्यम से पूरी की जाती है।न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा से जुड़े मामले पर बिरला ने बताया कि इस संबंध में रिपोर्ट प्राप्त हो चुकी है और उस पर चर्चा के बाद जल्द निर्णय लिया जाएगा।

राष्ट्रपति से भी मिल चुका है विपक्ष

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग को लेकर विपक्षी दलों ने अपना अभियान तेज कर दिया है। इस मुद्दे पर विपक्षी नेताओं ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से भी मुलाकात की थी।

विपक्ष मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों को संरक्षण देने वाले वर्ष 2023 के कानून को रद्द करने की मांग भी कर रहा है। वहीं, लोकसभा अध्यक्ष के बयान से स्पष्ट है कि यदि इस संबंध में कोई नया प्रस्ताव आता है, तो उस पर निर्धारित संसदीय प्रक्रिया के अनुसार ही आगे बढ़ा जाएगा।

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