
नई दिल्ली। मध्य प्रदेश से राज्यसभा की रिक्त सीट पर उपचुनाव के लिए भारत निर्वाचन आयोग ने कार्यक्रम घोषित कर दिया है। पूर्व केंद्रीय राज्य मंत्री और भाजपा नेता एल मुरुगन के इस्तीफे के बाद खाली हुई इस सीट पर 12 नवंबर 2026 को मतदान होगा। मतगणना भी उसी दिन कराई जाएगी।
26 अक्टूबर से शुरू होगी नामांकन प्रक्रिया
निर्वाचन आयोग के घोषित कार्यक्रम के मुताबिक, उम्मीदवार 26 अक्टूबर से 2 नवंबर तक नामांकन दाखिल कर सकेंगे। नामांकन पत्रों की जांच 3 नवंबर को होगी, जबकि उम्मीदवार 5 नवंबर तक अपना नाम वापस ले सकते हैं।
मतदान की जरूरत पड़ने पर प्रक्रिया 12 नवंबर को सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक चलेगी। मतगणना शाम 5 बजे शुरू होगी। यदि चुनाव मैदान में केवल एक वैध उम्मीदवार बचता है, तो उसे निर्विरोध निर्वाचित घोषित किया जा सकता है।
एल मुरुगन के इस्तीफे से रिक्त हुई सीट
एल मुरुगन ने 13 अक्टूबर 2026 को राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा दिया था। वे मध्य प्रदेश से उच्च सदन के सदस्य थे और उनका कार्यकाल अप्रैल 2030 तक निर्धारित था। कार्यकाल पूरा होने से पहले इस्तीफा देने के कारण सीट रिक्त हुई, जिसके बाद उपचुनाव की प्रक्रिया शुरू की गई।
मुरुगन तमिलनाडु में भाजपा के संगठनात्मक कामकाज से भी जुड़े रहे हैं। उनके इस्तीफे के बाद राज्य में पार्टी की गतिविधियों में उनकी संभावित भूमिका को लेकर चर्चाएं हो रही हैं। हालांकि, इस संबंध में पार्टी की भावी रणनीति पर कोई अंतिम निष्कर्ष निकालने के लिए आधिकारिक जानकारी जरूरी है।
उम्मीदवार के चयन पर रहेगी नजर
रिक्त सीट के लिए भाजपा किसे उम्मीदवार बनाती है और विपक्ष चुनाव में अपना प्रत्याशी उतारता है या नहीं, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा। उम्मीदवारों के नाम सामने आने के बाद मुकाबले की तस्वीर भी साफ होगी।
राज्यसभा के उपचुनाव में आम मतदाता सीधे मतदान नहीं करते। संबंधित राज्य विधानसभा के निर्वाचित सदस्य मतदान करते हैं। इस प्रक्रिया में आनुपातिक प्रतिनिधित्व और एकल संक्रमणीय मत प्रणाली लागू होती है। एक सीट के चुनाव में विधानसभा के भीतर दलों की संख्या और विधायकों के मत महत्वपूर्ण होते हैं।
परिसीमन की चर्चाओं के बीच चुनाव
यह उपचुनाव ऐसे समय घोषित हुआ है, जब राष्ट्रीय राजनीति में परिसीमन विधेयक को लेकर चर्चा जारी है। परिसीमन के तहत संसदीय और विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं तथा सीटों के निर्धारण से जुड़े विषय आते हैं। हालांकि, राज्यसभा उपचुनाव और परिसीमन विधेयक की प्रक्रिया अलग-अलग हैं। विधेयक की स्थिति या आगे की संसदीय कार्रवाई पर निष्कर्ष निकालने के लिए आधिकारिक घोषणाओं को आधार बनाना जरूरी होगा।
राज्यसभा में रिक्त सीट भरने की प्रक्रिया
राज्यसभा एक स्थायी सदन है और इसे भंग नहीं किया जाता। इसके सदस्यों का सामान्य कार्यकाल छह वर्ष का होता है तथा हर दो वर्ष में लगभग एक-तिहाई सदस्य सेवानिवृत्त होते हैं। किसी सदस्य के कार्यकाल पूरा होने से पहले इस्तीफा देने पर खाली हुई सीट के लिए उपचुनाव कराया जाता है। निर्वाचित नया सदस्य सामान्यतः पूर्व सदस्य के शेष कार्यकाल के लिए पद संभालता है।
अब सभी की नजरें उम्मीदवारों की घोषणा और नामांकन प्रक्रिया पर रहेंगी। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, मुकाबला होने की स्थिति में 12 नवंबर को मतदान और मतगणना के बाद परिणाम सामने आएगा।




















