नई दिल्ली। दिल्ली में यमुना के झाग को खत्म करने के लिए इस्तेमाल होने वाले डिफॉमर के काम को लेकर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। आम आदमी पार्टी (AAP) के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने जल संसाधन विभाग पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए मंत्री प्रवेश वर्मा से जवाब मांगा है। उनका दावा है कि टेंडर प्रक्रिया पूरी होने से पहले ही एक कंपनी ने मौके पर काम की तैयारी शुरू कर दी थी। AAP ने सवाल उठाया है कि जब ठेका आवंटित ही नहीं हुआ, तो संबंधित कंपनी को काम मिलने का भरोसा कैसे हो गया?

कालिंदी कुंज घाट पर डिफॉमर और मशीनें दिखाने का दावा

सौरभ भारद्वाज ने इस मामले में एक वीडियो जारी किया है। वीडियो में वे कालिंदी कुंज के पास एक घाट पर रखी सफेद टंकियां दिखाते हैं। उनके मुताबिक, इन टंकियों में डिफॉमर रखा गया है, जिसका इस्तेमाल यमुना में बनने वाले झाग को कम करने के लिए किया जाता है।वीडियो में कुछ मोटरें भी दिखाई गई हैं। भारद्वाज के अनुसार, इन मोटरों को नावों पर लगाकर नदी के पानी में डिफॉमर का छिड़काव किया जाना था। उन्होंने दावा किया कि यह पूरा सेटअप आइकन इंस्ट्रूमेंट्स नाम की कंपनी का है।

टेंडर खुलने से पहले कंपनी की मौजूदगी पर सवाल

AAP नेता ने आरोप लगाया कि डिफॉमिंग कार्य का टेंडर उस समय तक खुला नहीं था, लेकिन मौके पर कंपनी का सामान और मशीनें मौजूद थीं। उन्होंने सवाल किया कि निविदा प्रक्रिया पूरी होने से पहले ही किसी कंपनी ने काम की तैयारी कैसे शुरू कर दी।भारद्वाज का कहना है कि इस घटनाक्रम से टेंडर प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठते हैं। उन्होंने आशंका जताई कि किसी खास कंपनी को काम देने की योजना पहले से तय हो सकती है। हालांकि, यह आरोप है और इसकी स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी से नहीं होती।

मंत्री प्रवेश वर्मा के विभाग पर मिलीभगत का आरोप

सौरभ भारद्वाज ने मंत्री प्रवेश वर्मा के विभाग और ठेकेदारों के बीच कथित मिलीभगत का आरोप भी लगाया। उन्होंने दावा किया कि कंपनी के एक व्यक्ति से बातचीत के दौरान बताया गया कि दिल्ली जल बोर्ड के एक इंजीनियर ने उन्हें मौके पर पहुंचकर काम शुरू करने के लिए कहा था।AAP नेता ने इस कथित बातचीत के आधार पर सवाल उठाया कि क्या टेंडर प्रक्रिया केवल औपचारिकता बनकर रह गई है। उन्होंने मंत्री प्रवेश वर्मा से पूरे मामले पर जवाब देने की मांग की है।

जांच और आधिकारिक जवाब का इंतजार

इस पूरे विवाद में मुख्य सवाल यह है कि संबंधित कंपनी को किस आधार पर मौके पर डिफॉमर और मशीनें रखने की अनुमति मिली थी। साथ ही, यह भी स्पष्ट होना बाकी है कि टेंडर की वास्तविक स्थिति क्या थी और क्या कंपनी को कोई औपचारिक निर्देश दिया गया था।फिलहाल, उपलब्ध जानकारी में मंत्री प्रवेश वर्मा, संबंधित विभाग या आइकन इंस्ट्रूमेंट्स कंपनी का पक्ष शामिल नहीं है। इसलिए भ्रष्टाचार और मिलीभगत से जुड़े आरोपों की पुष्टि आधिकारिक जवाब और दस्तावेजों के सामने आने के बाद ही हो सकेगी।

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