नई दिल्ली। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेता सौरव दास और आशुतोष रांका को सात दिन बाद जमानत मिल गई है। दिल्ली की विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट (SEM) अदालत ने दोनों को 50 हजार रुपये के बॉन्ड पर रिहा करने का आदेश दिया। जेल से बाहर आते ही सौरव दास ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग दोहराई और आंदोलन जारी रखने का संकेत दिया।

रिहाई के बाद सोशल मीडिया पर किया पहला पोस्ट

जेल से बाहर आने के बाद सौरव दास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा, 'Gyanu has to go', यानी ज्ञानू को जाना होगा। CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने भी ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग दोहराते हुए पोस्ट साझा की। रिहाई के बाद नेताओं के बयानों से साफ है कि वे अपना विरोध जारी रखने के पक्ष में हैं।

जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के बाद हिरासत में लिए गए थे दोनों नेता

मामला 13 अक्टूबर का है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, सरकार ने 12 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने पर रोक लगा दी थी। इसके अगले दिन सौरव दास और आशुतोष रांका वहां प्रदर्शन करने पहुंचे, जिसके बाद दिल्ली पुलिस ने दोनों को हिरासत में ले लिया। शांति व्यवस्था से जुड़े नियमों के उल्लंघन के आरोप में उन्हें जेल भेजा गया था।

अदालत में दिया आश्वासन, फिर मिली जमानत

21 अक्टूबर को दोनों नेताओं ने विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट के समक्ष लिखित आश्वासन दिया कि जंतर-मंतर को कानून के अनुसार प्रदर्शन के लिए अधिसूचित किए जाने तक वे शांति बनाए रखेंगे और वहां विरोध प्रदर्शन नहीं करेंगे। इसके बाद अदालत ने दोनों को 50 हजार रुपये के बॉन्ड पर रिहा करने का आदेश दिया। CJP ने इस फैसले का स्वागत किया है।

अभिजीत दीपके ने भी साझा किया संदेश और वीडियो

सौरव दास और आशुतोष रांका की रिहाई के बाद अभिजीत दीपके ने दोनों नेताओं की तारीफ करते हुए लिखा कि सौरव और आशु उनसे बेहतर ही नहीं, बल्कि उनसे बड़े नेता भी हैं। उन्होंने यह भी कहा कि वे अपने नेताओं के आदेश मानने के लिए तैयार हैं।दीपके ने दोनों नेताओं का एक वीडियो भी साझा किया, जिसमें वे हाथों में तिरंगा लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग करते नजर आ रहे हैं। वीडियो में आशुतोष रांका 'भारत माता की जय' और सौरव दास 'इंकलाब जिंदाबाद' के नारे लगाते दिखाई देते हैं। इसके बाद दोनों 'ज्ञानू मस्ट गो' का नारा लगाते हैं।

रिहाई के बाद भी जारी है विरोध

जमानत मिलने के बाद CJP नेताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की अपनी मांग वापस नहीं ली है। हालांकि, अदालत के समक्ष दिए गए लिखित आश्वासन के मुताबिक, जंतर-मंतर पर प्रदर्शन को लेकर उन्हें निर्धारित शर्तों का पालन करना होगा।

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