उत्तर प्रदेश के कासगंज जिले में डेढ़ महीने के मासूम की कथित खरीद-फरोख्त का मामला सामने आया है। आरोप है कि बच्चे की मां ने उसे दो लाख रुपये में दूसरे दंपती को सौंप दिया और बाद में उसके अपहरण की कहानी बता दी। बच्चे के पिता की शिकायत पर पुलिस ने जांच शुरू की और 24 घंटे के भीतर मामले का खुलासा करने का दावा किया। पुलिस ने मासूम को सुरक्षित बरामद कर उसकी मां, एक डॉक्टर और उसकी पत्नी समेत पांच लोगों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, आरोपियों के पास से 80 हजार रुपये नकद बरामद किए गए हैं।

दवा दिलाने के बहाने बच्चे को लेकर घर से निकली थी मां

पुलिस के मुताबिक, यह मामला सोरों कोतवाली क्षेत्र के बनूपुर पुख्ता गांव का है। बच्चे के पिता अरविंद फरीदाबाद की एक कंपनी में काम करते हैं, जबकि उनकी पत्नी क्रांति अपने तीन बच्चों के साथ गांव में रहती थी।

बताया गया कि 16 अक्टूबर को क्रांति अपने डेढ़ महीने के बेटे को दवा दिलाने के लिए कासगंज लेकर गई थी। दोपहर करीब 3 बजे वह कासगंज बस स्टैंड पहुंची। बाद में उसने परिवार को बताया कि बच्चे को कुछ समय के लिए एक अनजान महिला के पास छोड़कर गई थी। जब वह वापस लौटी, तो महिला और बच्चा दोनों वहां नहीं मिले।

इस जानकारी के बाद परिवार में चिंता फैल गई और बच्चे की तलाश शुरू कर दी गई। शुरुआत में मामला अपहरण का लग रहा था, लेकिन बाद में पिता को पत्नी की बताई कहानी पर संदेह हुआ।

पिता की शिकायत से सामने आया कथित सौदे का मामला

बच्चे के अचानक लापता होने से परेशान अरविंद ने घटना के बारे में जानकारी जुटानी शुरू की। उन्हें आशंका हुई कि मामला अपहरण का नहीं, बल्कि बच्चे की कथित खरीद-फरोख्त से जुड़ा हो सकता है। इसके बाद 17 अक्टूबर को उन्होंने सोरों कोतवाली में शिकायत दर्ज कराई।

शिकायत में उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी पत्नी ने एक डॉक्टर और उसकी पत्नी के साथ मिलकर बच्चे को दूसरे दंपती को बेच दिया है। पुलिस ने शिकायत के आधार पर प्राथमिकी दर्ज कर मामले की जांच शुरू की।

डॉक्टर दंपती की भूमिका की भी जांच

पुलिस की जांच में सोरों क्षेत्र में क्लीनिक चलाने वाले डॉक्टर अरुण कुमार और उनकी पत्नी पिंकी के नाम सामने आए। आरोप है कि दोनों ने बच्चे की मां और उसे खरीदने वाले दंपती के बीच संपर्क स्थापित कराने में भूमिका निभाई।

पुलिस के अनुसार, हाथरस जिले के सिकंदराराऊ थाना क्षेत्र के बारासरी गांव निवासी महिपाल और उनकी पत्नी ने पूछताछ में बच्चे को दो लाख रुपये में खरीदने की बात स्वीकार की। जांच में सामने आया कि इस रकम में से 1.30 लाख रुपये बच्चे की मां को दिए गए थे।

हालांकि, मामले में प्रत्येक आरोपी की भूमिका और कथित सौदे से जुड़ी परिस्थितियों की पुष्टि आगे की जांच तथा न्यायिक प्रक्रिया में होगी।

मां के खाते में जमा हुए 1.20 लाख रुपये

पुलिस के मुताबिक, बच्चे की मां को कथित सौदे के तहत 1.30 लाख रुपये मिले थे। इसमें से 1.20 लाख रुपये उसके बैंक खाते में जमा कराए गए, जबकि 10 हजार रुपये नकद दिए गए थे।

पुलिस ने संबंधित बैंक खाते में जमा रकम की निकासी पर रोक लगवाने की कार्रवाई की है। इसके अलावा आरोपियों की निशानदेही पर 80 हजार रुपये नकद बरामद किए जाने की जानकारी दी गई है। पुलिस अब लेनदेन से जुड़े साक्ष्यों की जांच कर रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि रकम किस तरह और किन परिस्थितियों में दी गई।

एसओजी और सर्विलांस टीम ने पांच आरोपियों को पकड़ा

बच्चे के पिता की शिकायत के बाद पुलिस अधीक्षक ओपी सिंह ने मामले को जल्द सुलझाने के निर्देश दिए। इसके बाद सीओ सदर आंचल चौहान के नेतृत्व में सोरों कोतवाली पुलिस, स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी) और सर्विलांस टीम ने जांच शुरू की।

पुलिस के अनुसार, जांच के दौरान मिले सुरागों के आधार पर 17 अक्टूबर को चंदपुरा-गऊपुरा कट के पास बने यात्री प्रतीक्षालय से पांचों आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। इनमें बच्चे की मां क्रांति, डॉक्टर अरुण कुमार, उनकी पत्नी पिंकी और हाथरस निवासी महिपाल तथा उनकी पत्नी शामिल हैं।

पुलिस ने आरोपियों की निशानदेही पर मासूम को भी सुरक्षित बरामद कर लिया। बच्चे के मिलने के बाद परिवार को राहत मिली।

बच्चों की खरीद-फरोख्त पर कानून क्या कहता है?

भारत में बच्चों की अवैध खरीद-फरोख्त गंभीर अपराध है। किसी बच्चे को गोद लेने के लिए निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन करना जरूरी होता है। केवल माता-पिता या परिजनों की सहमति से बच्चे का आर्थिक लेनदेन के जरिए हस्तांतरण वैध नहीं हो जाता।

पुलिस के अनुसार, मामले में भारतीय न्याय संहिता और किशोर न्याय अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई की गई है। अब जांच में यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि कथित सौदे की योजना कैसे बनाई गई और इसमें शामिल लोगों की क्या भूमिका रही।

आगे की जांच पर टिकी नजर

कासगंज में सामने आया यह मामला नवजात और छोटे बच्चों की सुरक्षा से जुड़ी गंभीर चिंताएं सामने लाता है। पुलिस ने मासूम को सुरक्षित बरामद कर पांच आरोपियों की गिरफ्तारी की जानकारी दी है। अब कथित खरीद-फरोख्त, पैसों के लेनदेन और अपहरण की कहानी से जुड़े सभी पहलुओं की जांच की जा रही है।

फिलहाल आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी। पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि इस मामले में आरोपियों के बीच संपर्क कैसे हुआ और क्या कथित सौदे से जुड़ी कोई अन्य गतिविधि भी जांच के दायरे में आती है।

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