
नवरात्रि से शुरू हुए त्योहारी सीजन में भारतीय बाजारों में फिर से रौनक लौट आई है। खरीदारी में बढ़ोतरी के संकेत राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय के आंकड़ों, खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग की बिक्री रिपोर्टों तथा जीएसटी संग्रह जैसे सरकारी स्रोतों से साफ दिख रहे हैं। इसी बीच कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने नवरात्रि से दीपावली तक देशभर में ₹7 लाख करोड़ से अधिक त्योहारी कारोबार का अनुमान लगाया है, जो पिछले वर्ष के रिकॉर्ड से 15-18 प्रतिशत अधिक हो सकता है।
सरकारी आंकड़ों से त्योहारी माहौल के संकेत
राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय की 12 अक्टूबर 2026 की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, सितंबर 2026 में अखिल भारतीय उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति 5.54 प्रतिशत रही। ग्रामीण क्षेत्रों में 6.08 प्रतिशत और शहरी क्षेत्रों में 4.88 प्रतिशत दर्ज की गई, जबकि खाद्य मुद्रास्फीति 7.74 प्रतिशत रही। इन आंकड़ों के बीच सरकार आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए सक्रिय है। उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय ने त्योहारी मौसम को ध्यान में रखते हुए चीनी भंडारण मानदंडों में संशोधन किया है। 15 अक्टूबर से 30 नवंबर 2026 तक व्यापारियों के लिए स्टॉक रखने की अवधि 15 दिन और सीमा 1,000 क्विंटल तय की गई है। कोलकाता और असम के लिए यह सीमा 2,000 क्विंटल रखी गई है, ताकि जमाखोरी रोकी जा सके और उचित कीमतों पर आपूर्ति बनी रहे।
खादी बिक्री में रिकॉर्ड और स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा
खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग की भूमिका त्योहारी सीजन में खास रही है। प्रेस सूचना ब्यूरो की विज्ञप्तियों के अनुसार, गांधी जयंती पर नई दिल्ली के कनॉट प्लेस स्थित खादी भवन में एक दिन में रिकॉर्ड बिक्री हुई थी। 2024 में यह 2.01 करोड़ रुपये तक पहुंच गई थी। वित्तीय वर्ष 2025-26 में खादी एवं ग्रामोद्योग क्षेत्र का कारोबार 1.87 लाख करोड़ रुपये से अधिक रहा, जिससे 2.04 करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार मिला। 2 अक्टूबर 2026 से खादी उत्पादों पर 20 प्रतिशत और ग्रामोद्योग उत्पादों पर 10 प्रतिशत तक विशेष छूट भी शुरू की गई है, जो 16 नवंबर तक उपलब्ध रहेगी। वहीं जनजातीय कार्य मंत्रालय के तहत ट्राइफेड जयपुर में 13 से 20 अक्टूबर तक ‘आदि बाज़ार’ का आयोजन कर रहा है, जहां देश भर के जनजातीय कारीगरों के हस्तशिल्प, वस्त्र और जैविक उत्पाद उपलब्ध हैं। ये प्रयास स्थानीय उत्पादों की उपलब्धता बढ़ा रहे हैं।
जीएसटी संग्रह में मजबूती
अप्रैल-सितंबर 2026 के दौरान सकल जीएसटी संग्रह लगभग 12.46 लाख करोड़ रुपये रहा, जो वर्ष-दर-वर्ष 11.6 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है। पंजीकृत करदाताओं की संख्या लगभग 1.70 करोड़ पहुंच गई है। ये आंकड़े व्यापार और उपभोग की सक्रियता को रेखांकित करते हैं।
कैट का अनुमान: ₹7 लाख करोड़ से अधिक कारोबार
कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के राष्ट्रीय महामंत्री एवं सांसद प्रवीन खंडेलवाल ने कहा कि इस वर्ष नवरात्रि से दीपावली तक ₹7 लाख करोड़ से अधिक त्योहारी कारोबार होने का अनुमान है। पिछले वर्ष यह आंकड़ा लगभग ₹6.05 लाख करोड़ रहा था, जिसमें ₹5.40 लाख करोड़ वस्तु व्यापार और ₹65,000 करोड़ सेवा क्षेत्र शामिल था। कैट के आकलन के अनुसार प्रमुख क्षेत्रों की हिस्सेदारी कुछ इस प्रकार हो सकती है—किराना एवं एफएमसीजी 12%, सोना-चांदी एवं आभूषण 10%, इलेक्ट्रॉनिक्स 8%, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स 7%, रेडीमेड गारमेंट्स 7%, गिफ्ट आइटम्स 7%, होम डेकोर 5%, फर्नीचर 5%, मिठाई-नमकीन 5% तथा अन्य क्षेत्र। सेवा क्षेत्र की भूमिका और बढ़ने की उम्मीद है। परिवहन, लॉजिस्टिक्स, ई-कॉमर्स, होटल, कैटरिंग, टेंट-डेकोरेशन और इवेंट मैनेजमेंट जैसी सेवाओं में भारी मांग रहने का अनुमान है। सेवा क्षेत्र में 20-25 प्रतिशत वृद्धि के साथ कारोबार ₹80,000 करोड़ से ₹1 लाख करोड़ तक पहुंच सकता है।
वोकल फॉर लोकल बन रहा ताकत
खंडेलवाल ने कहा कि यह वृद्धि प्रधानमंत्री के ‘वोकल फॉर लोकल’, ‘मेड इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ विजन की व्यापक स्वीकार्यता को दर्शाती है। उपभोक्ता स्थानीय कारीगरों, एमएसएमई, महिला उद्यमियों और भारतीय ब्रांडों को प्राथमिकता दे रहे हैं। उन्होंने कहा, “₹7 लाख करोड़ से अधिक का संभावित कारोबार भारत की बढ़ती उपभोक्ता शक्ति और स्थानीय बाजारों की मजबूती का प्रमाण है।” त्योहारी सीजन अभी जारी है। सरकारी आंकड़े आपूर्ति और स्थानीय उत्पादों को समर्थन देते दिख रहे हैं, जबकि कैट का अनुमान व्यापक आर्थिक गतिविधियों की ओर इशारा करता है। दोनों मिलकर इस त्योहारी मौसम को बाजारों के लिए सक्रिय और उम्मीद भरा बना रहे हैं।




















