
बिहार : जमुई जिले के झाझा से गरीबी और बदहाली को उजागर करने वाली एक घटना सामने आई है। यहां पत्नी की मौत के बाद एक बुजुर्ग को उसके अंतिम संस्कार के लिए ऐसी मुश्किलों का सामना करना पड़ा कि उन्हें शव ठेले पर ले जाना पड़ा। आर्थिक तंगी के कारण न तो वे शव ले जाने के लिए वाहन का इंतजाम कर सके और न ही दाह संस्कार के लिए लकड़ी खरीद पाए। आखिरकार, स्थानीय युवाओं की मदद से उन्होंने ठेले की व्यवस्था की और पत्नी के शव को अंतिम विदाई देने के लिए घर से निकले।
घर पर हुई पत्नी की मौत, मदद के लिए भटकता रहा बुजुर्ग
यह घटना झाझा की रेलवे कॉलोनी की बताई जा रही है, जहां शिव कुमार दास अपनी 60 वर्षीय पत्नी राखी देवी के साथ रहते थे। राखी देवी की घर पर ही मौत हो गई। पत्नी को खोने के दुख के बीच शिव कुमार के सामने उनके अंतिम संस्कार की व्यवस्था करने की चुनौती खड़ी हो गई।शिव कुमार के मुताबिक, उनके पास इतने पैसे नहीं थे कि शव को ले जाने के लिए वाहन किराये पर ले सकें। दाह संस्कार के लिए लकड़ी खरीदना भी उनकी आर्थिक स्थिति से बाहर था। ऐसे में स्थानीय युवाओं ने आगे आकर ठेले का इंतजाम किया, जिस पर बुजुर्ग अपनी पत्नी का शव लेकर निकले।
पैसे नहीं जुटा पाए तो गड्ढा खुदवाकर दफनाया शव
शिव कुमार दास ने बताया कि आर्थिक मजबूरी के चलते वह पत्नी का पारंपरिक तरीके से दाह संस्कार नहीं कर सके। संसाधनों की कमी के कारण उन्हें गड्ढा खुदवाकर शव को दफनाना पड़ा।बताया गया कि एक वार्ड सदस्य ने अपनी ओर से दो हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी थी। हालांकि, इतनी मदद के बावजूद परिवार की मुश्किलें पूरी तरह दूर नहीं हो सकीं।
प्रशासन को घटना की जानकारी नहीं
मामले पर नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी जनार्दन वर्मा ने कहा कि उन्हें फिलहाल इस घटना की जानकारी नहीं है। उन्होंने बताया कि मामले की जानकारी लेने के बाद ही इस संबंध में कुछ कहा जा सकेगा।अब तक प्रशासन की ओर से यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि जरूरतमंद परिवार को समय पर सहायता क्यों नहीं मिल सकी। यह घटना आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के लिए अंतिम संस्कार जैसी बुनियादी जरूरतों की व्यवस्था में आने वाली कठिनाइयों को सामने लाती है।




















