
पंजाब : मानसा में नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले परविंदर सिंह झोटा की हत्या ने उनके परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है। बेटे की मौत के बाद पिता ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। एसएसपी वैभव चौधरी से मुलाकात के दौरान उन्होंने पूछा कि जब भरे बाजार में उनके बेटे को गोली मारी जा रही थी, तब पुलिस कहां थी। दूसरी ओर, मां अपने बेटे से हुई आखिरी बातचीत को याद कर भावुक हो उठीं। उन्होंने बताया कि घर से निकलने से पहले झोटा ने उनके पैर छुए थे और वापस आकर खाना खाने की बात कही थी।
पिता ने पुलिस की भूमिका पर उठाए सवाल
एसएसपी से मुलाकात के दौरान झोटा के पिता भीम सिंह ने कहा कि वह किसी पद या पहचान के आधार पर नहीं, बल्कि अपने बेटे को खो चुके पिता के तौर पर जवाब मांग रहे हैं। उन्होंने घटना के समय पुलिस की मौजूदगी और उसकी भूमिका को लेकर सवाल किए। साथ ही, मामले में पुलिसकर्मियों की संभावित भूमिका की भी जांच की मांग उठाई।एसएसपी वैभव चौधरी ने परिवार को भरोसा दिलाया कि यदि जांच में किसी अधिकारी की संलिप्तता सामने आती है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। हालांकि, फिलहाल किसी पुलिस अधिकारी की भूमिका साबित होने की जानकारी सामने नहीं आई है।
मां को याद आई बेटे से हुई आखिरी मुलाकात
झोटा की मां के मुताबिक, उनके बेटे को अपनी जान का खतरा महसूस होता था। वह कई बार आशंका जताता था कि कुछ लोग उसकी हत्या कर सकते हैं। इसके बावजूद उसने नशे के खिलाफ अपनी आवाज उठाना बंद नहीं किया।मां ने बताया कि मंगलवार को घर से निकलते समय झोटा ने उनके पैर छुए और कहा कि खाना तैयार रखना, वह लौटकर खाएगा। परिवार के लिए अब यही आखिरी मुलाकात और बातचीत सबसे दर्दनाक याद बन गई है।
मेडिकल स्टोर पर विवाद के दौरान हुई थी हत्या
परविंदर सिंह झोटा की मंगलवार, 13 अक्टूबर को मानसा में एक मेडिकल स्टोर पर हुए विवाद के दौरान गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। पुलिस के अनुसार, वह दुकान संचालक से कुछ दवाओं की कथित अवैध बिक्री के संबंध में सवाल कर रहे थे। इस दौरान वह मोबाइल फोन से घटना का लाइव वीडियो भी बना रहे थे।बताया गया कि बातचीत के दौरान विवाद बढ़ गया और गोलीबारी शुरू हो गई। सामने आए वीडियो को लेकर प्रकाशित रिपोर्टों में दुकान संचालक के हाथ में पिस्तौल दिखाई देने की बात कही गई है। वीडियो में झोटा को हथियार नीचे रखने और संबंधित अधिकारियों को बुलाने की बात कहते सुना जा सकता है। इस घटना में कुछ अन्य लोगों के घायल होने की भी जानकारी है।दवाओं की कथित अवैध बिक्री, गोलीबारी की परिस्थितियों और घटना में शामिल लोगों की भूमिका को लेकर जांच जारी है।
नशे से बाहर निकलने के बाद शुरू किया था अभियान
झोटा का नशा विरोधी अभियान उनके अपने जीवन के अनुभवों से भी जुड़ा था। उनके करीबी लोगों के अनुसार, वह खुद नशे की समस्या से उबरने के बाद दूसरे लोगों को इससे दूर रखने के लिए सक्रिय हुए थे।खेलों में दिलचस्पी रखने वाले झोटा मानसा और आसपास के इलाकों में कथित नशा विक्रेताओं तथा मेडिकल स्टोर संचालकों से सवाल उठाते थे। वह अपने अभियान से जुड़े वीडियो सोशल मीडिया पर साझा करते थे। उनके पिता भीम सिंह सेना से सेवानिवृत्त हैं, जबकि परिवार खेती और डेयरी व्यवसाय से जुड़ा रहा है।झोटा के परिवार में माता-पिता, पत्नी और दो बेटे हैं। वह अपने बच्चों की खेल गतिविधियों में भी सक्रिय भूमिका निभाते थे और उन्हें अभ्यास के लिए लेकर जाते थे। उनके निधन से परिवार के साथ-साथ उनके अभियान से जुड़े लोगों को भी बड़ा झटका लगा है।
पहले भी विवादों में रहा था झोटा का अभियान
नशे के खिलाफ झोटा के अभियान का तरीका पहले भी विवाद का कारण बना था। वर्ष 2023 में एक मेडिकल स्टोर संचालक को जूतों की माला पहनाकर बाजार में घुमाने की घटना के बाद उनके खिलाफ मामले दर्ज किए गए थे। उस समय पुलिस ने कानून अपने हाथ में लेने पर आपत्ति जताई थी। बाद में कुछ मामलों में उन्हें राहत मिलने की जानकारी भी सामने आई थी।
राजस्थान से गिरफ्तार हुआ मुख्य आरोपी
इस हत्याकांड में मुख्य आरोपी अश्विनी कुमार को राजस्थान के सालासर से गिरफ्तार किए जाने की जानकारी सामने आई है। रिपोर्टों के अनुसार, वह मेडिकल स्टोर संचालक है और घटना के बाद से फरार था। उसकी गिरफ्तारी के बाद पुलिस मामले की आगे की जांच कर रही है।परिवार ने झोटा की हत्या के पीछे की परिस्थितियों का खुलासा करने और दोषियों को सजा दिलाने की मांग की है। पिता की ओर से पुलिस की भूमिका को लेकर लगाए गए आरोप भी जांच के दायरे में हैं। आरोपी की गिरफ्तारी के बावजूद हत्या के कारणों, घटनाक्रम और अन्य संभावित संलिप्तताओं पर अंतिम निष्कर्ष जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही सामने आएगा।




















