
नई दिल्ली: मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर विपक्ष की ओर से सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका में दस्तावेजों और प्रक्रिया से जुड़ी कई कमियां सामने आई हैं। राहुल गांधी, अखिलेश यादव और तेजस्वी यादव समेत 11 नेताओं की ओर से दायर इस याचिका में सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री ने करीब 14 आपत्तियां दर्ज की हैं। इनमें जरूरी दस्तावेजों की स्पष्ट प्रतियां, याचिकाकर्ताओं की सहमति और कोर्ट फीस से जुड़ी कमियां शामिल हैं।
इस बीच, SIR के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट तक निकाले गए विपक्षी नेताओं के मार्च को लेकर दिल्ली पुलिस ने दो FIR दर्ज की हैं। विपक्ष इस मामले में कानूनी और राजनीतिक स्तर पर आगे की रणनीति तैयार करने में जुटा है।
याचिका में दस्तावेजों से लेकर कोर्ट फीस तक पर आपत्ति
समाचार एजेंसी PTI की रिपोर्ट के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री ने याचिका दाखिल करने वाले वकील से कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के पहचान पत्र की स्पष्ट प्रति जमा करने को कहा है। साथ ही, याचिका दायर करने वाले 11 नेताओं में से नौ की लिखित सहमति से संबंधित कमी भी बताई गई है।
रजिस्ट्री ने याचिका के साथ संलग्न दस्तावेजों की गुणवत्ता और उपलब्धता पर भी सवाल उठाए हैं। कुछ पन्ने अस्पष्ट बताए गए हैं, जबकि कुछ दस्तावेजों के पन्ने गायब होने की बात कही गई है। इसके अलावा, निर्धारित कोर्ट फीस से 220 रुपये कम जमा किए जाने की आपत्ति भी दर्ज की गई है।
यह याचिका 12 अक्टूबर को दाखिल की गई थी। इसमें भारत निर्वाचन आयोग, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू तथा विवेक जोशी को पक्षकार बनाया गया है।
रजिस्ट्री की ओर से बताई गई कमियां प्रक्रियागत हैं। इनके आधार पर याचिका के मुख्य आरोपों या मांगों पर अदालत का अंतिम रुख तय नहीं माना जा सकता।
मतदाता सूची से नाम हटाने की स्वतंत्र जांच की मांग
विपक्षी नेताओं ने SIR के दौरान मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं और बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने के आरोपों को लेकर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। उनका कहना है कि मतदाता सूची में हुए बदलावों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
याचिका में सुप्रीम कोर्ट के किसी सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में स्वतंत्र समिति गठित करने की मांग की गई है। प्रस्तावित समिति में तकनीकी विशेषज्ञों और प्रतिष्ठित नागरिकों को शामिल करने की बात भी कही गई है।
विपक्ष का आरोप है कि मतदाता सूची से संबंधित प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करना जरूरी है। हालांकि, इन आरोपों की सत्यता और स्वतंत्र जांच की मांग पर अदालत का फैसला आना बाकी है।
मार्च के मामले में दिल्ली पुलिस ने दर्ज की दो FIR
SIR के मुद्दे पर विपक्षी नेताओं के सुप्रीम कोर्ट तक मार्च करने के मामले में दिल्ली पुलिस ने दो प्राथमिकी दर्ज की हैं। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, ये FIR बाराखंभा रोड और तिलक मार्ग थानों में दर्ज की गई हैं।
सोमवार को विपक्षी नेता अपनी याचिका दाखिल करने के लिए मार्च करते हुए सुप्रीम कोर्ट पहुंचे थे। यह प्रदर्शन मतदाता सूची के पुनरीक्षण और चुनाव आयोग की भूमिका को लेकर विपक्ष की ओर से उठाए जा रहे सवालों के बीच हुआ।
इस मामले में FIR दर्ज होने के बाद कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। प्राथमिकी दर्ज होना अपने आप में किसी व्यक्ति के दोषी होने का प्रमाण नहीं है।
विपक्ष की बैठक में आगे के आंदोलन पर चर्चा
राहुल गांधी ने मंगलवार शाम को विपक्षी सांसदों, नागरिक समाज के प्रतिनिधियों और छात्र संगठनों के सदस्यों को सुनहरी बाग रोड स्थित अपने आवास पर बैठक के लिए आमंत्रित किया है। इस बैठक को 'हाई टी' नाम दिया गया है।
बैठक में मतदाता सूची से जुड़े विवाद और कथित वोट चोरी के आरोपों को लेकर साझा आंदोलन की आगे की दिशा पर चर्चा होने की उम्मीद है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग भी चर्चा में शामिल हो सकती है।
इससे पहले मंगलवार दोपहर विपक्षी सांसदों की प्रेस कॉन्फ्रेंस प्रस्तावित है। इसके जरिए विपक्ष अपनी मांगों और आगे की रणनीति को सार्वजनिक कर सकता है।
राष्ट्रपति से मुलाकात के बाद सुप्रीम कोर्ट पहुंचा मामला
10 अक्टूबर: विपक्षी सांसदों ने संसद से राष्ट्रपति भवन तक पैदल मार्च किया था। राहुल गांधी, ममता बनर्जी और मल्लिकार्जुन खड़गे समेत 10 सांसदों के प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति से मुलाकात की, जबकि अन्य सांसद विजय चौक पर धरने पर बैठे। मुलाकात के बाद राहुल गांधी ने मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों का मुद्दा उठाते हुए सुप्रीम कोर्ट जाने की बात कही थी।
11 अक्टूबर: INDIA ब्लॉक के नेताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत को पत्र लिखा। राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे ने अपनी मांगों पर ज्ञापन सौंपने के लिए समय मांगा था। हालांकि, मुख्य न्यायाधीश ने मुलाकात से इनकार करते हुए याचिका दाखिल करने का रास्ता बताया।
12 अक्टूबर: चुनाव आयोग के खिलाफ प्रदर्शन और उस पर लागू पाबंदियों से जुड़े मुद्दे पर मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि यह मामला उनके सामने उस रूप में नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि आम नागरिक और निर्वाचित जनप्रतिनिधि, दोनों सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर सकते हैं। उन्होंने विचाराधीन मामलों पर चर्चा को न्यायिक मर्यादा के लिहाज से अनुचित भी बताया।
अब आगे क्या होगा?
विपक्ष की याचिका में रजिस्ट्री की ओर से बताई गई कमियों को दूर करना और जरूरी दस्तावेज जमा करना आगे की कानूनी प्रक्रिया के लिए महत्वपूर्ण होगा। इसके बाद याचिका पर आगे की कार्रवाई का रास्ता साफ हो सकता है।
दूसरी ओर, SIR को लेकर विपक्ष के आरोप, चुनाव आयोग की भूमिका और दिल्ली पुलिस की ओर से दर्ज FIR अब राजनीतिक और कानूनी चर्चा के केंद्र में हैं। मामले में अंतिम स्थिति अदालत की कार्यवाही और संबंधित पक्षों के जवाबों के बाद ही स्पष्ट होगी।




















