नई दिल्ली:  देशभर में एक राज्य से दूसरे राज्य तक सामान पहुंचाने वाले ट्रक चालकों, ट्रांसपोर्टरों और कारोबारियों के लिए राहत भरी खबर है। वस्तु एवं सेवा कर (GST) व्यवस्था के तहत मालवाहक वाहनों की जांच से जुड़े नियमों में बदलाव की तैयारी है। प्रस्तावित व्यवस्था के लागू होने के बाद रास्ते में पड़ने वाले राज्यों के अधिकारी सामान्य परिस्थितियों में माल ले जा रहे वाहनों को अपनी मर्जी से रोककर जांच नहीं कर सकेंगे। इससे माल की आवाजाही आसान होने और डिलीवरी में होने वाली देरी कम होने की उम्मीद है।

8 अक्टूबर को आयोजित जीएसटी काउंसिल की 57वीं बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। प्रस्तावित प्रावधानों के अनुसार, माल भेजने वाले राज्य और माल पहुंचने वाले राज्य के अधिकारियों को वाहन रोककर जांच करने का अधिकार देने की व्यवस्था की जाएगी। बीच में पड़ने वाले राज्यों के अधिकारी सामान्य तौर पर ऐसे वाहनों को नहीं रोक सकेंगे। हालांकि, इन प्रावधानों का वास्तविक प्रभाव अधिसूचना जारी होने और नियम लागू होने के बाद ही स्पष्ट होगा।

ठोस जानकारी के आधार पर ही रोका जा सकेगा वाहन

प्रस्तावित नियमों का उद्देश्य जीएसटी जांच के नाम पर कारोबारियों और ट्रांसपोर्टरों को होने वाली अनावश्यक परेशानी को कम करना है। इसके तहत केवल सामान्य संदेह के आधार पर मालवाहक वाहन को रोकने की अनुमति नहीं होगी। वाहन की जांच के लिए विशेष खुफिया जानकारी या ठोस इनपुट होना जरूरी होगा।

इसके अलावा, वाहन रोकने से पहले ज्वाइंट कमिश्नर या उससे ऊपर के स्तर के अधिकारी की मंजूरी लेने का प्रावधान भी प्रस्तावित है। इससे जांच की प्रक्रिया में जवाबदेही बढ़ने और बिना पर्याप्त आधार के वाहनों को रोकने की घटनाओं पर अंकुश लगने की उम्मीद है।

ई-वे बिल और जरूरी दस्तावेज रखना होगा अनिवार्य

नियमों में बदलाव का यह मतलब नहीं है कि माल परिवहन के दौरान दस्तावेजों की अनिवार्यता समाप्त हो जाएगी। जीएसटी नियमों के तहत सामान्य तौर पर 50 हजार रुपये या उससे अधिक मूल्य के माल की आवाजाही के लिए ई-वे बिल जरूरी होता है। हालांकि, निर्धारित परिस्थितियों में इससे छूट भी लागू होती है।

नए प्रावधान लागू होने के बाद भी कारोबारियों और ट्रांसपोर्टरों को ई-वे बिल, बिल-इनवॉइस और अन्य जरूरी दस्तावेजों से संबंधित नियमों का पालन करना होगा। दस्तावेजों की जानकारी का इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम के माध्यम से मिलान भी किया जा सकता है। इसलिए माल रवाना करने से पहले सभी जरूरी कागजात दुरुस्त रखना महत्वपूर्ण रहेगा।

कारोबारियों और ट्रांसपोर्टरों को क्या होगा फायदा?

वर्तमान व्यवस्था में रास्ते में पड़ने वाले राज्यों में भी जीएसटी जांच के दौरान वाहनों से दस्तावेज मांगे जा सकते हैं। ऐसी जांच के कारण कई बार ट्रकों को लंबे समय तक रुकना पड़ता है, जिससे माल की डिलीवरी प्रभावित होती है और परिवहन लागत बढ़ने की आशंका रहती है।उदाहरण के तौर पर, दिल्ली से पंजाब जा रहे किसी ट्रक को यदि हरियाणा में जांच के लिए रोक लिया जाता है, तो प्रस्तावित नियम लागू होने के बाद संबंधित कार्रवाई की वैधता नए प्रावधानों के आधार पर देखी जाएगी।

कुल मिलाकर, प्रस्तावित बदलाव का उद्देश्य अंतरराज्यीय माल परिवहन को अधिक सुगम बनाना, अनावश्यक जांच पर नियंत्रण रखना और कारोबारियों को राहत देना है। हालांकि, नए नियमों के लागू होने तक मौजूदा कानूनी प्रावधानों और दस्तावेज संबंधी आवश्यकताओं का पालन करना जरूरी होगा।

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