
नई दिल्ली: भारत में हवाई यात्रा करने वाले यात्रियों की बढ़ती संख्या विदेशी विमानन कंपनियों के लिए कारोबार विस्तार के नए अवसर पैदा कर रही है। इसी को देखते हुए मलेशिया की राष्ट्रीय विमानन कंपनी मलेशिया एयरलाइंस भारतीय बाजार में अपनी मौजूदगी मजबूत करने की तैयारी में है। कंपनी नई साझेदारियों के जरिए कारोबार बढ़ाना चाहती है, लेकिन द्विपक्षीय उड़ान अधिकारों पर लगी सीमाएं उसके विस्तार की राह में चुनौती बनी हुई हैं।
मलेशिया एयरलाइंस के ग्रुप प्रेसिडेंट एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) नसरुद्दीन ए बाकर के मुताबिक, भारत कंपनी के लिए महत्वपूर्ण बाजार है। फिलहाल एयरलाइन भारत के 10 शहरों से उड़ानें संचालित कर रही है। भारत और मलेशिया के बीच हर सप्ताह करीब 80 उड़ानें चलाई जा रही हैं। कंपनी का मानना है कि भारतीय यात्रियों की बढ़ती मांग को देखते हुए यहां कारोबार विस्तार की पर्याप्त संभावनाएं हैं।
कंपनी के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2026 की पहली छमाही में भारतीय बाजार में यात्रियों की संख्या में सालाना आधार पर करीब 13 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। इस अवधि में एयरलाइन ने भारत से आने-जाने वाले लगभग 10 लाख यात्रियों को सेवाएं दीं। यह कंपनी के कुल 1.06 करोड़ यात्रियों का करीब 10 प्रतिशत है।
कॉर्पोरेट और पारिवारिक यात्राओं में भी बढ़ोतरी
मलेशिया एयरलाइंस के अनुसार, भारत में हवाई यात्रा की मांग केवल पर्यटन तक सीमित नहीं है। कारोबार से जुड़ी यात्राओं के साथ परिवार और दोस्तों से मिलने जाने वाले यात्रियों की संख्या में भी तेजी आई है।
कंपनी ने बताया कि कॉर्पोरेट यात्रा की मांग में करीब 40 प्रतिशत, जबकि परिवार और दोस्तों से मिलने के लिए होने वाली यात्रा यानी वीएफआर (VFR) में लगभग 24 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। वहीं, एयरलाइन के भारतीय नेटवर्क पर औसतन करीब 91 प्रतिशत सीटें भरी रहती हैं।
कंपनी का कहना है कि यदि उसे अतिरिक्त उड़ानें संचालित करने और नए स्लॉट हासिल करने का अवसर मिलता है, तो भारतीय बाजार में उसकी पहुंच और कारोबार दोनों बढ़ सकते हैं। हालांकि, द्विपक्षीय हवाई सेवा समझौतों के तहत निर्धारित उड़ान अधिकारों की सीमाएं फिलहाल विस्तार को प्रभावित कर रही हैं।
इंडिगो के साथ पहले से कोडशेयर समझौता
मलेशिया एयरलाइंस की भारत की प्रमुख विमानन कंपनी इंडिगो के साथ पहले से कोडशेयर साझेदारी है। इस समझौते के माध्यम से यात्री मलेशिया एयरलाइंस के नेटवर्क के जरिए भारत के छह अतिरिक्त शहरों तक कनेक्टिविटी प्राप्त कर सकते हैं। इनमें गोवा भी शामिल है।
कंपनी भविष्य में अन्य एयरलाइंस के साथ-साथ प्रौद्योगिकी, डिजिटल सेवाओं, विमान रखरखाव और खेल क्षेत्र से जुड़ी कंपनियों के साथ भी साझेदारी की संभावनाएं तलाश रही है। CEO नसरुद्दीन ए बाकर के मुताबिक, किसी भी नई साझेदारी को अंतिम रूप देने से पहले यह सुनिश्चित किया जाएगा कि उससे दोनों पक्षों को व्यावसायिक लाभ मिले।
महंगे ईंधन ने बढ़ाई विमानन कंपनियों की चिंता
एक ओर भारतीय बाजार में यात्रियों की बढ़ती संख्या कारोबार विस्तार का अवसर दे रही है, वहीं दूसरी ओर पश्चिम एशिया में युद्ध के कारण ईंधन की लागत बढ़ने से विमानन कंपनियों पर दबाव बढ़ा है।
मलेशिया एयरलाइंस के मुताबिक, उसकी कुल परिचालन लागत में ईंधन की हिस्सेदारी पहले करीब 40 प्रतिशत थी, जो बढ़कर लगभग 55 प्रतिशत हो गई है। बढ़ती लागत से निपटने के लिए कंपनी ने अपनी परिचालन क्षमता में करीब 5 प्रतिशत की कटौती की है। इसके अलावा हवाई किरायों में 20 प्रतिशत तक बढ़ोतरी और वर्ष 2026 के लिए 36 प्रतिशत ईंधन की हेजिंग जैसे कदम भी उठाए हैं।
कुल मिलाकर, मलेशिया एयरलाइंस भारतीय बाजार में बढ़ती मांग का लाभ उठाना चाहती है। हालांकि, उड़ान अधिकारों की सीमाएं और ईंधन की बढ़ती कीमतें कंपनी के सामने दो बड़ी चुनौतियां हैं। आने वाले समय में अतिरिक्त उड़ानों की अनुमति और नई साझेदारियां कंपनी की विस्तार रणनीति के लिए अहम साबित हो सकती हैं।




















