Mauganj News:  मऊगंज जिले के नईगढ़ी क्षेत्र में स्थित मां अष्टभुजा धाम में शारदीय नवरात्रि के दौरान भक्तिमय माहौल बना हुआ है। देवीपुर में स्थित इस प्राचीन मंदिर में माता के दर्शन के लिए सुबह से शाम तक श्रद्धालुओं की भीड़ जुट रही है। मध्य प्रदेश के अलग-अलग जिलों के साथ अन्य राज्यों से भी भक्त माता के दरबार में पहुंच रहे हैं। करीब 500 साल पुरानी धार्मिक मान्यताओं से जुड़ा यह धाम क्षेत्र की आस्था और सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण केंद्र है।

दिव्य ज्वाला से जुड़ी है मंदिर की प्राचीन कथा

मां अष्टभुजा धाम के प्राकट्य को लेकर स्थानीय क्षेत्र में एक प्राचीन जनश्रुति प्रचलित है। मान्यता है कि कभी इस स्थान पर घने जंगल हुआ करते थे। इसी जंगल में माता दिव्य ज्वाला के रूप में प्रकट हुई थीं। कहा जाता है कि लालगंज गांव के एक ग्वाले ने उस ज्वाला को बुझाने का प्रयास किया था, लेकिन वह देवी का अलौकिक स्वरूप था।लोककथा के अनुसार, सेंगर वंश के राजा प्रताप सिंह को स्वप्न में माता ने इस स्थान को भक्तों के लिए समर्पित करने का आदेश दिया। इसके बाद राजा ने यहां नईगढ़ी बसाई। स्थानीय लोगों की मान्यताओं में यह प्रसंग आज भी विशेष महत्व रखता है। इसी कथा के कारण मंदिर के प्रति श्रद्धालुओं का विश्वास पीढ़ी दर पीढ़ी बना हुआ है।

127 साल पहले हुआ था वर्तमान मंदिर का निर्माण

मंदिर के मौजूदा स्वरूप को लेकर मान्यता है कि करीब 127 वर्ष पहले साधु राम कोडरिया ने इसका निर्माण कराया था। समय के साथ स्थानीय लोगों के सहयोग से मंदिर परिसर में मरम्मत और सुधार के कार्य भी होते रहे हैं।नवरात्रि के अवसर पर मंदिर में नियमित पूजा-अर्चना के अलावा धार्मिक संस्कार भी कराए जा रहे हैं। कई परिवार अपने बच्चों का मुंडन और कर्ण छेदन कराने के लिए यहां पहुंच रहे हैं। भक्त माता को नारियल, चुनरी और प्रसाद चढ़ाकर परिवार में सुख, शांति और समृद्धि की प्रार्थना कर रहे हैं। कथा श्रवण, हवन और विशेष पूजन के चलते पूरे परिसर में धार्मिक वातावरण बना हुआ है।

श्रद्धालुओं की भीड़ के बीच प्रशासन ने संभाली व्यवस्था

नवरात्रि के दौरान बढ़ती भीड़ को देखते हुए राजस्व विभाग, नगर परिषद और पुलिस प्रशासन की ओर से व्यवस्थाओं पर ध्यान दिया जा रहा है। थाना प्रभारी अनिल काकड़े पुलिस बल के साथ सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी कर रहे हैं। वहीं, मुख्य नगर पालिका अधिकारी के मार्गदर्शन में नगर परिषद की टीम साफ-सफाई और आवागमन को सुचारु बनाए रखने के लिए प्रयासरत है।मंदिर परिसर और आसपास सैकड़ों दुकानें भी सजती हैं। इससे स्थानीय दुकानदारों और कई परिवारों को रोजगार मिलता है। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए धर्मशाला और पेयजल जैसी व्यवस्थाएं भी उपलब्ध हैं। नवरात्रि के दौरान मंदिर में आने वाले भक्तों की संख्या बढ़ने से स्थानीय बाजारों में भी चहल-पहल बनी हुई है।

धार्मिक पर्यटन के साथ स्थानीय कारोबार को भी मिलता है बढ़ावा

मां अष्टभुजा धाम नईगढ़ी की धार्मिक पहचान का अहम हिस्सा है। यहां की प्राचीन मान्यताएं, ऐतिहासिक जनश्रुतियां और वर्षों से चली आ रही पूजा परंपराएं इस स्थल को खास बनाती हैं। नवरात्रि के दिनों में दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालु इस धार्मिक विरासत से जुड़ते हैं।मंदिर में भक्तों की आवाजाही का असर स्थानीय कारोबार पर भी दिखाई देता है। प्रसाद, पूजा सामग्री और अन्य सामान की दुकानों से व्यापारियों को कमाई का अवसर मिलता है। इस तरह मां अष्टभुजा धाम धार्मिक आस्था के साथ स्थानीय संस्कृति और अर्थव्यवस्था को भी मजबूती देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।करीब पांच शताब्दियों की मान्यताओं से जुड़ा यह धाम आज भी हजारों श्रद्धालुओं के विश्वास का केंद्र बना हुआ है। नवरात्रि के दौरान यहां पहुंच रहे भक्तों की भीड़ माता के प्रति उनकी गहरी आस्था को दर्शाती है।

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