
लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजनीति में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस ने एक अहम रणनीतिक फैसला लिया है। पार्टी ने विधान परिषद की 11 सीटों के चुनाव से खुद को अलग रखने का निर्णय किया है। लंबे समय से इन सीटों पर चुनावी तैयारी कर रही कांग्रेस अब अपने उम्मीदवार मैदान मे नहीं उतारेगी।
पार्टी नेतृत्व का कहना है कि इस समय संगठन की पूरी ताकत 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारी मे लगाना ज्यादा जरूरी है। कांग्रेस अब बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत करने और कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने पर जोर देगी।
संभावित उम्मीदवारों की तैयारी पर लगा ब्रेक
कांग्रेस ने करीब एक साल पहले विधान परिषद चुनाव को लेकर तैयारी शुरू की थी। संभावित प्रत्याशियों की पहचान, क्षेत्रीय स्तर पर संपर्क और चुनावी गतिविधियों के लिए पर्यवेक्षक व समन्वयक भी लगाए गए थे। चुनावी कामकाज पर नजर रखने के लिए कंट्रोल रूम तक बनाया गया था।
कई संभावित उम्मीदवार करीब नौ महीने से अपने क्षेत्रों मे सक्रिय थे। शिक्षक और स्नातक मतदाताओं के बीच संपर्क अभियान भी चलाया जा रहा था। ऐसे समय मे पार्टी के चुनाव से हटने के फैसले ने इन नेताओं की राजनीतिक रणनीति बदल दी है।
विधानसभा चुनाव को बनाया पहली प्राथमिकता
कांग्रेस अब 2027 के विधानसभा चुनाव को सबसे बड़ी प्राथमिकता मान रही है। पार्टी नेतृत्व का फोकस प्रदेश संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने पर है। कांग्रेस के सामने उत्तर प्रदेश मे अपनी राजनीतिक जमीन को फिर से मजबूत करने की चुनौती भी है।
इसी वजह से विधान परिषद चुनाव मे संसाधन और संगठनात्मक ताकत लगाने के बजाय पार्टी विधानसभा चुनाव की तैयारी पर ध्यान देना चाहती है।
प्रदेश अध्यक्ष ने फैसले पर दी सफाई
उत्तर प्रदेश कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष आराधना मिश्रा मोना ने विधान परिषद चुनाव से दूरी बनाने के फैसले पर स्थिति स्पष्ट की है। पार्टी की ओर से कहा गया है कि यह निर्णय उनके प्रदेश अध्यक्ष बनने से पहले ही लिया जा चुका था।
कांग्रेस से जुड़े सूत्रों के अनुसार, विधान परिषद चुनाव की शुरुआती तैयारियां केंद्रीय नेतृत्व के साथ पर्याप्त तालमेल के बिना शुरू हुई थीं। अब चुनाव प्रक्रिया काफी आगे बढ़ चुकी है और पार्टी ने अपनी मौजूदा प्राथमिकताओं को देखते हुए प्रत्याशी नहीं उतारने का फैसला किया है।
सपा के साथ तालमेल भी अहम वजह
कांग्रेस के इस फैसले को समाजवादी पार्टी के साथ उसके राजनीतिक तालमेल से भी जोड़कर देखा जा रहा है। दोनों दल विपक्षी गठबंधन का हिस्सा हैं। ऐसे मे विधान परिषद चुनाव मे आमने-सामने उम्मीदवार उतारने से बचना गठबंधन की राजनीति के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
हालांकि 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर दोनों दलों के बीच सीट बंटवारे की अंतिम तस्वीर अभी साफ नहीं है। इसके बावजूद विधान परिषद चुनाव से कांग्रेस का हटना दोनों दलों के बीच समन्वय की दिशा मे एक अहम संकेत माना जा रहा है।
23 अक्टूबर को 11 सीटों पर मतदान
उत्तर प्रदेश विधान परिषद की 11 सीटों के लिए 23 अक्टूबर 2026 को मतदान होगा। इनमे पांच स्नातक और छह शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र शामिल हैं।
स्नातक सीटों मे लखनऊ, वाराणसी, आगरा, मेरठ और इलाहाबाद-झांसी शामिल हैं। शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों मे लखनऊ, वाराणसी, आगरा, मेरठ, बरेली-मुरादाबाद और गोरखपुर-फैजाबाद की सीटें हैं।
चुनाव कार्यक्रम के अनुसार 29 सितंबर को अधिसूचना जारी हुई थी। नामांकन की अंतिम तारीख 6 अक्टूबर थी और 7 अक्टूबर को नामांकन पत्रों की जांच हुई। 9 अक्टूबर तक नाम वापस लिए जा सकते हैं। मतदान 23 अक्टूबर को सुबह 8 बजे से शाम 4 बजे तक होगा, जबकि मतगणना 27 अक्टूबर को होगी।
BJP और SP के बीच मुकाबला हुआ अहम
कांग्रेस के मैदान से बाहर होने के बाद इन सीटों पर भाजपा और समाजवादी पार्टी की लड़ाई पर खास नजर रहेगी। भाजपा ने सभी 11 सीटों के लिए अपने उम्मीदवार घोषित कर दिए हैं। पार्टी ने कई मौजूदा MLC को दोबारा चुनाव मैदान मे उतारा है।
समाजवादी पार्टी ने भी अपने उम्मीदवारों को लेकर तैयारी तेज कर दी है। पार्टी ने कुछ सीटों पर प्रत्याशियों मे बदलाव करते हुए दूसरे दलों से आए नेताओं को भी मौका दिया है। गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक सीट से संजयन त्रिपाठी और आगरा सीट से आकाश अग्रवाल को सपा ने उम्मीदवार बनाया है।
हालांकि मुकाबला सिर्फ भाजपा और सपा तक सीमित नहीं रहेगा। कई अन्य प्रत्याशी भी मैदान मे हैं।
कांग्रेस समर्थित नेता निर्दलीय उतर सकते हैं
कांग्रेस के चुनाव से हटने के बाद उन नेताओं के सामने नई राह खुली है, जो पार्टी के समर्थन की उम्मीद के साथ लंबे समय से तैयारी कर रहे थे। जानकारी के अनुसार, कांग्रेस से जुड़े कुछ संभावित उम्मीदवार अब निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर चुनाव लड़ने की तैयारी मे हैं।
इन उम्मीदवारों की अंतिम स्थिति नाम वापसी की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी। इसके बाद ही सभी सीटों पर चुनावी तस्वीर पूरी तरह सामने आएगी।
2027 की तैयारी के लिए संगठन मे बदलाव
कांग्रेस ने अब अपना ध्यान संगठन को मजबूत करने पर केंद्रित करने का संकेत दिया है। प्रदेश नेतृत्व मे बदलाव के बाद पार्टी नए सिरे से संगठन को सक्रिय करने की कोशिश कर रही है। आराधना मिश्रा मोना को प्रदेश अध्यक्ष और इमरान मसूद को कार्यकारी अध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई है।
पार्टी की कोशिश है कि विधानसभा चुनाव से पहले कार्यकर्ताओं को सक्रिय किया जाए और संगठन की मौजूदगी को बूथ स्तर तक मजबूत बनाया जाए।
विधान परिषद की 11 सीटों से कांग्रेस का पीछे हटना इसी बड़ी चुनावी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। अब पार्टी के सामने असली चुनौती 2027 के विधानसभा चुनाव मे अपनी राजनीतिक स्थिति मजबूत करने की है। दूसरी ओर 23 अक्टूबर के विधान परिषद चुनाव मे भाजपा, सपा और अन्य प्रत्याशियों के प्रदर्शन पर सभी की नजर रहेगी।




















