नई दिल्ली: ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ को लेकर चल रही बहस के बीच सुप्रीम कोर्ट और संसद की संयुक्त संसदीय समिति (JPC) के बीच प्रस्तावित बातचीत को लेकर स्थिति स्पष्ट हो गई है। सुप्रीम कोर्ट प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) और सुप्रीम कोर्ट के मौजूदा जजों के साथ ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ से जुड़े विधेयकों पर कोई बैठक नहीं होगी। 6 अक्टूबर को प्रस्तावित JPC का सुप्रीम कोर्ट दौरा भी रद्द कर दिया गया है।

दरअसल, ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ से जुड़े संविधान (129वां संशोधन) विधेयक, 2024 और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक, 2024 की जांच संयुक्त संसदीय समिति कर रही है। समिति की अध्यक्षता भाजपा सांसद पी.पी. चौधरी कर रहे हैं। समिति के कार्यक्रम में 6 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट का दौरा और CJI तथा अन्य जजों के साथ अनौपचारिक चर्चा का उल्लेख सामने आया था।

कपिल सिब्बल ने उठाए थे सवाल

वरिष्ठ अधिवक्ता और राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने 1 अक्टूबर को प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रस्तावित बातचीत पर सवाल उठाए थे। उन्होंने कहा था कि यदि संसद की समिति किसी ऐसे विधेयक पर मौजूदा सुप्रीम कोर्ट के जजों से चर्चा करती है, जिसे भविष्य में अदालत में चुनौती दी जा सकती है, तो इससे विधायिका और न्यायपालिका के बीच शक्तियों के पृथक्करण से जुड़े सवाल उठते हैं।

सिब्बल का तर्क था कि संसद कानून बनाती है और यदि उस कानून की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी जाती है तो सुप्रीम कोर्ट उसकी न्यायिक समीक्षा कर सकता है। ऐसे में विधेयक के अंतिम रूप लेने से पहले मौजूदा जजों के साथ उस पर चर्चा को लेकर उन्होंने आपत्ति जताई थी।

सुप्रीम कोर्ट प्रशासन ने क्यों रोकी बातचीत?

रिपोर्टों के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ जजों के बीच प्रस्तावित अनौपचारिक चर्चा के मुद्दे पर विचार हुआ। इस दौरान यह बात सामने आई कि प्रस्तावित संवैधानिक संशोधन भविष्य में सुप्रीम कोर्ट के समक्ष न्यायिक समीक्षा का विषय बन सकता है। ऐसे में जजों के साथ इस मुद्दे पर प्रशासनिक स्तर पर चर्चा करना उचित नहीं माना गया। इसके बाद प्रस्तावित बैठक रद्द कर दी गई।

लोकसभा सचिवालय की ओर से भी सदस्यों को 6 अक्टूबर का प्रस्तावित ‘लोकल स्टडी विजिट’ रद्द किए जाने की जानकारी दी गई। वहीं JPC के अध्यक्ष पी.पी. चौधरी की ओर से इसे कार्यक्रम और समय-सारिणी से जुड़ा मामला बताया गया।

JPC पहले भी ले चुकी है विशेषज्ञों की राय

‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ से जुड़े विधेयकों की जांच के दौरान JPC राजनीतिक दलों, सांसदों, संवैधानिक विशेषज्ञों और अन्य हितधारकों से राय ले चुकी है। समिति ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीशों और सेवानिवृत्त जजों से भी संवैधानिक पहलुओं पर विचार-विमर्श किया है।

फिलहाल मौजूदा सुप्रीम कोर्ट के CJI और जजों के साथ ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ विधेयकों पर प्रस्तावित बातचीत नहीं होगी। इससे विधेयकों की जांच कर रही संसदीय समिति और न्यायपालिका के बीच संस्थागत सीमाओं को लेकर उठे सवालों के बीच स्थिति स्पष्ट हो गई है।

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